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बागपत: धमकियों के चलते बेटियों को गांव से दूर भेजने पर मजबूर दलित परिवार

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बागपत

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के एक गांव में पिछले महीने हुए दलित-गुर्जर टकराव के बाद करीब आधा दर्जन दलित परिवारों का कहना है कि उन्होंने अपने घर की बेटियों को गांव से दूर भेज दिया है। इन परिवारों की मानें तो उन्होंने यह फैसला मिल रही धमकियों के बाद सुरक्षा को देखते हुए लिया है और बेटियों को रिश्तेदारों के घर जाना पड़ा है।

28 मई को उपचुनाव के लिए तैयार हो रहे कैराना से करीब 40 किलोमीटर दूर बागपत के कमला गांव में बीते दिनों गुर्जर युवकों द्वारा एक दलित से मारपीट का मामला सामने आया था। चोटों की वजह से बाद में उसकी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से ही गांव के दलित छुप गए हैं और कथित रूप से कइयों ने गांव भी छोड़ दिया है।

सात युवकों की गिरफ्तारी
इस सप्ताह की शुरुआत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूपी डीजीपी और मुख्य सचिव को 19 साल के आकाश खोंडवाल की मौत को लेकर नोटिस भेजा था, जिसे कथित रूप से गुर्जरों ने 27 अप्रैल को मारा-पीटा था। आकाश को करीब आधा दर्जन गुर्जर युवक उठाकर ले गए थे और मारा-पीटा था। आकाश एक दलित युवक का दोस्त था, जिसने कथित रूप से 22 अप्रैल को एक गुर्जर लड़की से छेड़खानी की थी। आकाश का मेरठ हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था, जहां 7 मई को उसकी मौत हो गई।

बता दें, इस मामले में सात युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया है। खोंडवाल की बहन अल्का कुमारी ने कहा, ‘उन्होंने (गुर्जरों ने) पहले ही हमारी जिंदगी खराब कर दी है और अब वे उनके साथियों को जेल भेजने के लिए हमारी बहन-बेटियों को रेप और जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। हमारे पास गांव छोड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।’ वहीं गांव के गुर्जर इस आरोप को निराधार और झूठा बता रहे हैं। ग्राम प्रधान प्रमोद राणा ने कहा, ‘ये धमकियों से जुड़े आरोप निराधार हैं। इसके उलट हमारे परिवार भी लड़के की मौत को लेकर दुखी हैं।’

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