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भागवत के बयान पर RSS की फिर सफाई, नहीं की सेना के साथ तुलना

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पटना

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के सेना के लेकर उठे विवाद के बाद सह सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भी उनकी ओर सफाई दी है. दो दिन में संघ की ओर से शीर्ष स्तर पर दूसरी बार ऐसी सफाई आई है.आरएसएस के सह सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पटना में सफाई देते हुए कहा, ‘संघ प्रमुख ने कहा था कि यदि संविधान इजाजत दे और देश को अगर जरूरत होगी तो दो-तीन दिन में अनुशासित लोगों को तैयार कर सकते हैं जबकि सेना को एक जवान को तैयार करने में छह-सात महीने लगते हैं.’

दत्तात्रेय ने पटना में आरएसएस के पूर्व प्रमुख के जीवन पर लिखी पुस्तक का विमोचन करने के बाद कहा कि संघ प्रमुख ने सेना से कोई इसकी तुलना नहीं की थी. उनका कहना था कि सामान्य लोगों को अनुशासन सीखने में समय लगेगा, लेकिन स्वयंसेवक पहले से ही अनुशासन में रहते हैं तो उन्हें तैयार करने में ज्यादा वक्त नहीं लगता है.

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को मुजफ्फरपुर में एक कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों से सेना की तुलना की बात सामने आई, और इसके बाद इस पर विवाद शुरू हो गया. उन्होंने कहा था कि देश को अगर हमारी जरूरत पड़े और हमारा संविधान और कानून इजाजत दे हम तुरंत तैयार हो जाएंगे. स्वयंसेवकों की कुव्वत का बखान करते हुए संघ प्रमुख ये भी कह गए कि सेना को तैयार होने में 6-7 महीने लग जाएंगे, लेकिन हम दो से तीन दिन में ही तैयार हो जाएंगे, क्योंकि हमारा अनुशासन ही ऐसा है.

इसके बाद तमाम दलों ने इसे सेना का अपमान बताया हालांकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संघ प्रमुख का बचाव करते हुए कहा कि अगर कोई संगठन देश की रक्षा करना चाहता है तो इसमें विवाद नहीं होना चाहिए.

विवाद बढ़ता देख सोमवार को ही संघ ने इस बयान पर सफाई भी पेश कर दी. संघ के प्रवक्ता मनमोहन वैद्य ने कहा था कि संघ प्रमुख के बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है. उन्होंने कहा कि ‘भागवत जी ने कहा था कि परिस्थिति आने पर तथा संविधान द्वारा मान्य होने पर भारतीय सेना को सामान्य समाज को तैयार करने के लिए 6 महीने का समय लगेगा तो संघ स्वयंसेवकों को भारतीय सेना 3 दिन में तैयार कर सकेगी, कारण स्वयंसेवकों को अनुशासन का अभ्यास रहता है.

मनमोहन वैद्य ने कहा कि यह सेना के साथ तुलना नहीं थी पर सामान्य समाज और स्वयंसेवकों के बीच में थी, दोनों को भारतीय सेना को ही तैयार करना होगा. आरएसएस को उम्मीद है कि संघ की ओर से एक और सफाई के बाद अब शायद इस विवाद का पटाक्षेप हो जाए.

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