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भेल की छोटी यूनिटें होंगी मर्ज

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भोपाल

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) जैसी महारत्न कंपनी अब खर्चों में कटौती करते हुए उन छोटी यूनिटों को मर्ज करने जा रही है जहां काम भी पूरा नहीं होता और अधिकारी कर्मचारियों की संख्या भी ज्यादा है। इस पर कार्पोरेट प्रबंधन गंभीरता से विचार कर रहा है। खबर है कि कंपनी मुंबई की इलेक्ट्रिकल मशीन रिपेयर प्लांट, जगदीशपुर सेंट्रल लाईन स्टेपिंग एण्ड फेब्रीकेशन यूनिट और विशाखापट्टनम की हैवी प्लेट एण्ड वेसल प्लांट जल्द ही अन्य यूनिटों में मर्ज होगी। यहां क्रमश: कर्मचारी अधिकारियों की संख्या 55, 290 और 1100 बताई जा रही है। खास बात यह है कि मुंबई ईएमआरपी को भोपाल यूनिट में मर्ज किया जाएगा। इसी तरह पंजाब, गोविन्दवाल इंडस्ट्रीयल वाल्व प्लांट, जगदीशपुर का एक और इंसुलेटर प्लांट एवं रूद्रपुर यूनिट का सेंट्रलाईज फे ब्रीकेशन प्लांट और बैंगलौर का इलेक्ट्रोर्पाेसलीन डिविजन भी छोटी यूनिटों में गिना जाता है। अब देखना यह है कि भेल कार्पोरेट इनको मर्ज करने पर कब मुहर लगाता है। वैसे भी इस बार कंपनी का टर्न ओवर व प्राफिट ठीक-ठाक होने की खबर है।

और साहब ने स्टेशन ही तुड़वा डाला

भेल नगर प्रशासन विभाग के एक अपर महाप्रबंधक की जितनी तारीफ करेें कम है उन्होंने तो कमाल ही कर दिया, पहले तो कॉर्नर की एक सड़क चौड़ी करने के नाम पर एक बिजली का सब-स्टेशन का कुछ भाग ही तोड़ डाला, और बाद में समझ में आया कि गलत हो गया है तो दोबारा से सब-स्टेशन को फिर से बनाना शुरू कर दिया। मामला हबीबगंज मस्जिद के पास एक बिजली सब-स्टेशन का बताया जा रहा है। यह स्टेशन आरसीसी बिल्डिंग में बना हुआ है। इससे भेल को करीब 1 लाख की चपत भी लग गई, लेकिन साहब को इससे क्या लेना-देना। तोडऩा था बिजली सब स्टेशन का छोटा सा कमरा और तोड़ डाला आधा भाग। चर्चा है कि इसी तरह टाउनशिप में पानी की किल्लत को लेकर टाउनशिन के रहवासी परेशान है, लेकिन साहब है कि कुछ करने को तैयार नहीं है। टाउनशिप में कितने ट्यूबवेल और हैडपंप हैं साथ ही नये जल स्त्रोत कहां हो सकते है इसकी जानकारी भी नहीं है। इन सब बातों को लेकर भेल के मुखिया ने अपर महाप्रबंधक सिविल को फटकार भी लगाई। लेकिन साहब को इसका कोई असर ही नहीं।

कॉक साहब आ सकते हैं भोपाल

भोपाल यूनिट से प्रमोशन के बाद अपर महाप्रबध्ंाक से महाप्रबंधक बनकर दिल्ली कार्पोरेट पहुंचे संजीव कॉक अब फिर भोपाल वापसी की जुगाड़ में है। वैसे भी उनकी जुगाड़ पक्की मानी जाती है। प्रशासनिक स्तर पर चर्चा है कि वह अपना तबादला कराकर या तो यूनिट में टीसीबी विभाग में आएंगे या फिर महाप्रबंधक मानव संसाधन के पद पर विराजेंगे। इसमें कितनी सच्चाई है यह कार्पोरेट ही जाने। वह कार्मशियल के एक्सपर्ट है। अब इन्हें भोपाल के मुखिया कैसे संभालेंगे इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इधर जल्द ही तबादलों का बाजार गर्म होने वाला है। भेल के महाप्रबंधकगण डीडी पाठक और एम हलदर का भी बाहर जाने की चर्चाएं शुरू हो गई है। महाप्रबंधक टीके बागची का भी बाहर जाना तय माना जा रहा है लेकिन टीसीबी में काम ज्यादा होने के कारण 6 माह तक वह यहां से नहीं जा सकेंगे। ईडी की प्रमोशन लिस्ट जारी होने के बाद कुछ अफसरों के तबादले भी किये जाने की खबर है।

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