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भेल में टूल्स खरीदी का खेल

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भोपाल

कारखाने के मेन्यूफेक्चरिंग विभागों के लिए मशीनों की एफीशिएंसी बढ़ाने के लिए टूलिंग एरिया में बेहतर टूल्स की जरूरत होती है। इसके लिए बेहतर क् वालिटी के टूल्स लगाना पहली प्राथमिकता मानी जाती है। खबर है कि वर्तमान में टूलिंग में ट्रेडर्स का बोलबाला है यानी बिचौलिए की मनमानी के चलते जो टूल्स ओईएम से लेना चाहिए वह कुछ अफसर अपने लाभ शुभ के चलते बिचौलियों से खरीदने लगे हैं। चर्चा तो यह भी है कि कुछ जगहों पर परचेज ऑर्डर कम वेल्यू के लगाये जा रहे है इसलिए टूल्स खरीदी के खेल की बातें प्रशासनिक स्तर पर की जा रही है।

ओरिजनल इक्यूपमेन्ट मेन्यूफक्चरिंग से टूल्स खरीदने के बजाय कम कीमत का पीओ से खरीदी का काम लगातार जारी रहने से जहां बिचौलियों की पौ बारह है वहीं भेल की विजिलेंस की नाकामयाबी पर सवालिया निशान लग गया है। टूल्स में घपले पर घपले हो रहे हैं लेकिन विजिलेंस विभाग के सिर पर जूं तक नहीं रेंग रही है। इसे क्या कहे कुछ कहा नहीं जा सकता। हर हाल में हर साल टूलिंग खरीदी के ऑडिट होने की जरूरत महसूस की जा रही है। भेल के मुखिया सालों से नहीं बनी पीएमडी बनाने पर ध्यान दे तो यह सब घोटाले रूक सकते है। इससे भेल को आर्थिक संकट में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

झूठा है तेरा वादा, वादा तेरा…

इन दिनों भेल कारखाने में कर्मचारी यूनियनेंंं एक महाप्रबंधक के संबंध में यह कहते नहीं थकती कि झूठा है तेरा वादा, वादा तेरा वादा। दरअसल कारखाने के एक कर्मचारी की मौत के समय इस महाप्रबंधक ने सभी के सामने सिर्फ वादा ही नहीं वचन भी दिया था कि इस मृतक कर्मचारी के एक परिजन को नौकरी पर जरूर रखेंगे, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। जबकि भेल की त्रिची यूनिट में इसी तरह केे एक मामलें में एक मृतक कर्मचारी के परिजन को नौकरी पर रख लिया। यह मामला भेल भोपाल यूनिट में प्लांट कमेटी की बैठक में इंटक ने उठाया था और टूल डाउन की स्थिति भी निर्मित हुई थी। साफ जाहिर है कि कारखाने में झूठे वादों के चलते औद्योगिक संबंध बिगडऩे से इंकार नहीं किया जा सकता। चर्चा है कि मानव संसाधन विभाग के मुखिया कर्मचारियों के हितों से कोई मतलब ही नहीं रह गया। दो विभागों के काम के बोझ के तले दबकर रह गये हैं। इसके चलते कार्पोरेट प्रबंधन उनके अनुभव का लाभ उठाते हुए उन्हें भेल की रूद्रपुर यूनिट भेज सकता है। वैसे भी स्विचगियर में काम कर चुके है और यहां के आयटम इसी यूनिट में ज्यादा बनते है।

बड़े पैमाने पर हो सकता फेरबदल

देखने में सीधे भेल के मुखिया अपना एक साल से ज्यादा समय पूरा कर चुके हैं। उत्पादन बढ़ाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाने के कारण वह प्रशासनिक पकड़ पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाये। अब यह खबर उडऩे लगी है कि साहब अपनी प्रशासनिक पकड़ का जलवा जल्दी दिखाने वाले हैं। चर्चा है कि वह जल्द ही बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल करनें की तैयारी में जुटे हैं। वह बेहतर परफार्मेंस करने वाले प्रबंधक से लेकर अपर महाप्रबंधक स्तर तक के अधिकारियों को सही जगह पर बिठा सकते है। ट्रांसफार्मर की बागडोर महाप्रबंधक विनय निगम को सौंपने के बाद हाइड्रो में भी अपनी मनपसंद के अफसर को बिठा सकते हैं। फीडर्स और सीडीसी विभाग में भी अपर महाप्रबंधक स्तर के अफसरों को कमान सौंप सकते हैं। मानव संसाधन विभाग में बदलाव से इंकार नहीं किया जा सकता है। वैसे तो ट्रांसफर का सीजन जून का माना जाता है। लेकिन इसी माह मुखिया बेमौसम बरसात कर सकते है। रही बात कुछ बाहर से भोपाल यूनिट में आने वाले अफसरों की तो वह आज भी यहां आने की जुगाड़ में लगे है।
इधर पिपलानी क्षेत्र में एक एसटीएससी यूनियन को प्रबंधन द्वारा दो एन-4 बंगलें आवंटित तो कर दिये लेकिन उन्हें किराये पर चलाने की चर्चा थम नहीं रही है।

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