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भोपाल सैन्ट्रल को-आपरेटिव बैंक में डेढ़ करोड़ की सीसी लिमिट की गिरवी रखी संपत्ति बेच डाली

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भोपाल

भोपाल सैन्ट्रल को-आपरेटिव बैंक लिमिटेड का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। बैंक प्रबंधन ने एक कन्ज्यूमर स्टोर के संचालक द्वारा गिरवी रखी संपत्ति के दस्तावेजों को गायब कर दिया है। जिन दस्तावेजों के आधार पर बैंक ने कन्ज्यूमर स्टोर्स को केश क्रेडिट लिमिट (सीसी लिमिट) दिया था उसने उक्त संपत्ति को बैंक में गिरवी रखे होने के बाद भी बेच डाली। अब बैंक प्रबंधन के पास कोई आधार नहीं बचा तो उन्होंने वसूली के लिए तहसीलदार नजूल को भेज दिया। तहसीलदार ने कई बार संपत्ति कुर्क करने के इश्तहार तो जारी कर डाले, लेकिन लंबा समय गुजर जाने के बाद भी संपत्ति कुर्क नहीं कर पाये। इस मामले में बंैंक प्रबंधन ने आज तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की। इसमें बैंक कर्मियों की मिलीभगत की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।मजेदार बात यह है कि इस मामले से जुड़े एक बैंक कर्मी आज भी बैंक में नौकरी में हैं।

सूत्रों के मुताबिक बैंक ने नेशनल कन्ज्यूमर को-आपरेटिव को करीब 1.5 करोड़ की सीसी लिमिट कृषि भूमि ग्राम पलासी के खसरा क्रमांक 136/1/3 रकबा 1.33 हैक्टेयर और आवासीय डुपलेक्स अचल संपत्ति गिरवी रखने के बाद दी थी। यह संपत्ति लिमिट देने के समय से ही बैंक में गिरवी रखी थी लेकिन संबंधित संस्था के कर्ताधर्ताओं ने धीरे-धीरे उक्त संपत्ति को किसी अन्य को विक्रय कर डाला।

सूत्र बताते है कि इस संपत्ति के दस्तावेज बैंक में बंधक रखे थे तो इसे किसी अन्य को कैसे विक्रय कर डाला। उक्त संस्था के कर्ताधर्ता के एक रिश्तेदार इसी बैंक में नौकरी भी करते है। जब बैंक प्रबंधन उक्त संस्था से सीसी लिमिट की वसूली नहीं कर पाये तब उसने मामला तहसीलदार नजूल की अदालत में डाल दिया। यहां से संबंधित को कुर्की आदेश भी जारी कर दिये। इसके लिए बकायदा इश्तहार भी जारी किया गया। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में रसूखदारों के दबाव के चलते नीलामी की प्रक्रिया बार-बार रोका जा रहा है।

मजेदार बात यह है कि इस पूरे मामले की जानकारी बैंक प्रबंधन को होने के बाद भी सीसी लिमिट लेने वाले और जमानतदारों पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। पूरे मामले में बैंक प्रबंधन चुप्पी साधे बैठा है। लिमिट लेने वालों को इतने बड़े मामले का कोई डर नहीं। एक आरटीआई कार्यकर्ता जैनेन्द्र कुमार को मिली जानकारी के मुताबिक जमानतदारों ने भी अपने आप को संपत्तिहीन बताया जबकि उसके परिजनों के पास करोड़ों की संपत्ति है। बैंक के सूत्रों की माने तो बैंक का एक अधिकारी इस संस्था में पार्टनर रहा है। इसके चलते बैंक प्रबंधन कार्यवाही करने में असहाय महसूस कर रहा है। इस संबंध में बैंक के एमडी आरएस विश्वकर्मा के उनके मोबाइल नंबर पर बात करनी चाही तो उन्होंने मोबाईल नहंीं उठाया।

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