Home भोपाल/ म.प्र भ्रष्टाचार के आरोप से घिरे मप्र-छग के तीन IAS को अनिवार्य सेवानिवृत्ति

भ्रष्टाचार के आरोप से घिरे मप्र-छग के तीन IAS को अनिवार्य सेवानिवृत्ति

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भोपाल/ रायपुर

केन्द्र सरकार ने खराब सर्विस रिकार्ड के चलते मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ के तीन आईएएस अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृति दे दी है।जिन अधिकारियों को समय से पूर्व रिटायर किया गया है उनमें मध्यप्रदेश कॉडर के 1985 बैच के अधिकारी एमके सिंह,छत्तीसगढ़ कॉडर के 1986 बैच के अधिकारी अजय पाल सिंह और 1988 बैच के अधिकारी बाबूलाल अग्रवाल शामिल हैं।

मध्यप्रदेश के 1985 बैच के अधिकारी एमके सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। राज्य शिक्षा केन्द्र में आयुक्त रहते हुए की गई खरीदी में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते सरकार ने उन्हें दंडित भी किया है।सिंह कई साल राजस्व मंडल में पदस्थ रहे। इस दौरान उन्होंने पूरे प्रदेश में हजारों एकड़ सरकारी जमीन को निजी घोषित कर दिया। सरकार दो माह पूर्व ही उन्हें राजस्व मंडल से हटाकर मंत्रालय में ओएसडी बनाया था।

एमके सिंह को अनिवार्य सेवानिवृति दिए जाने की अनुशंसा राज्य सरकार द्वारा कुछ समय पूर्व ही भेजी गई थी। प्रदेश में मौजूद एमके सिंह के बैच के सभी अधिकारी अपर मुख्य सचिव बन चुके हैं लेकिन वे आज भी सचिव स्तर पर ही हैं।उनके खिलाफ न सिर्फ जांच चल रही है बल्कि राजस्व बोर्ड में बतौर सदस्य उन्होंने जो फैसले किए वे सरकार के लिए परेशानी का सबब भी बने।यही वजह है कि मई 2017 में प्रदेश की छानबीन समिति ने एमके सिंह को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का प्रस्ताव केंद्र को भेज दिया था।

सूत्रों का कहना है कि सरकार के आदेश को सामान्य प्रशासन विभाग ने एक अधिकारी उनके घर भेजकर तामील भी करा दिया।मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एसके मिश्रा ने एमके सिंह को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने के फैसले की पुष्टि की है।उधर छत्तीसगढ़ कॉडर के 1988 बैच के आईएएस बाबूलाल अग्रवाल पर सीबीआई को रिश्वत देने का आरोप है। अग्रवाल, हाल के दिनों में कई महीने तक दिल्ली की तिहाड़ जेल में रहे। उन पर सेल कंपनियों के जरिए 2010 में करोड़ों रुपए की हेराफेरी करने का आरोप था।

इस मामले को कमजोर करने की लिए उन्होंने कथित तौर पर पीएमओ और सीबीआई को रिश्वत की पेशकश की, जिसमें दलालों की भूमिका थी। इस साल फरवरी में सीबीआई ने उनके रायपुर स्थित बंगले पर छापा मारा था। बाबूलाल उच्च शिक्षा विभाग में प्रमुख सचिव थे।

जबरन रिटायर किए गए छत्तीसगढ़ के दूसरे अफसर अजयपाल सिंह हैं। वे पिछले एक साल से मंत्रालय में बिना काम के पदस्थ थे। अजयपाल 1986 बैच के आईएएस हैं। भ्रष्टाचार के आरोप के बाद भी 6 साल पहले राज्य सरकार ने उन्हें प्रमोट कर प्रमुख सचिव बनाया था।

वे जीएडी सचिव और राजस्व मंडल के अध्यक्ष भी रहे। छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड में रहते हुए उन पर इलेक्ट्रिक चाक की खरीदी में गड़बड़ी का आरोप लगा। उन पर पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने का भी आरोप था।वर्तमान वे वह जनशिकायत एवं निवारण विभाग में प्रमुख सचिव थे। सूत्रों पर यकीन करें तो पिछले एक साल में वे मुश्किल से तीन दिन अपने दफ्तर पहुंचे।

उनके दफ्तर में एक स्टॉफ आफिसर, एक निजी सचिव और दो भृत्य नियुक्त हैं। बताया गया है कि वे लगातार बीमार रहे। पिछले एक साल में दो बार उनका ऑपरेशन हुआ। केंद्र सरकार ने अजय पाल सिंह को शारीरिक अक्षमता के आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी है।

आईएफएस होतगी और कोहली का मामला अटका
उधर, मध्यप्रदेश के दो आईएफएस अधिकारी वीएस होतगी और देवेश कोहली को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने का मामला केंद्र में लंबित है। प्रदेश सरकार ने इन दोनों अधिकारियों की सर्विस रिव्यू करने के बाद इन्हें सेवा के लिए अनफिट करार दिया है। दोनों अधिकारियों को अब तक कोई पदोन्न्ति नहीं मिली है।

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