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महिलाओं के लिए सबसे असुक्षित हैं ये शहर, जानें दिल्ली-UP का नंबर

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नई दिल्ली

कठुआ गैंगरेप और उन्नाव रेप की घटना के बाद पूरा देश गुस्से में है बिल्कुल वैसे ही जैसे साल 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप के बाद उबाल आया था. दिल्ली में भी लोगों ने इंडिया गेट पर कैंडल मार्च, जंतर-मंतर पर प्रर्दशन और सोशल मीडिया के जरिए अपना गुस्सा जाहिर किया. एक नजर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) समेत उन रिपोर्ट्स पर नजर डाल लें आखिर भारत महिलाओं के लिए कितना सुरक्षित है.

NCRB 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बलात्कार के मामले 2015 की तुलना में 2016 में 12.4% बढ़े हैं. 2016 में 38,947 बलात्कार के मामले देश में दर्ज हुए. इनमें सबसे ज्यादा केस 4,882 मध्य प्रदेश में हुए. वहीं, दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश रहा, जहां 4,816 बलात्कार के मामले दर्ज हुए. महाराष्ट्र तीसरे नंबर पर रहा, जहां 4,189 बलात्कार के मामले दर्ज हुए हैं. वहीं, भारत की राजधानी दिल्ली को NCRB के सालाना सर्वेक्षण के बाद महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित शहर माना गया है.

क्या कहते हैं आंकड़े:
बता दें, साल 2011 से 2016 के बीच दिल्ली में महिलाओं के साथ दुष्कर्म के मामलों में 277 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. साल 2011 में जहां इस तरह के कुल 572 मामले सामने आए थे, वहीं 2016 में यह आंकड़ा 2155 रहा. इनमें से 291 केसों का अप्रैल 2017 तक नतीजा नहीं निकला था. निर्भया कांड के बाद दुष्कर्म के दर्ज मामलों में 132 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. साल 2017 में अकेले जनवरी में दुष्कर्म के 140 मामले दर्ज किए गए थे. इसके अलावा मई 2017 तक दिल्ली में दुष्कर्म के कुल 836 मामले दर्ज किए गए. NCRB की 2014 की रिपोर्ट के अनुसार हर एक घंटे में 4 रेप यानी हर 14 मिनट में 1 रेप हुआ है यानी 2014 में कुल 36975 रेप के मामले सामने आए हैं.

भारत सबसे असुरिक्षत देशों में से एक
साल 2011 में Tomson-Reuters Trust Law Foundation की शोध-रिपोर्ट में पता चला कि भारत भी महिलाओं के लिए सबसे असुरिक्षत देशों में से एक है. शोध रिपोर्ट में भारत को दुनिया में चौथा स्थान मिला. फाउंण्डेशन की इस सर्वे रिपोर्ट पर भारत की काफी आलोचना हुई.

वहीं साल 2016 जारी NCRB की रिपोर्ट में बताया गया है साल 2014 में महिलाओं को सुरक्षा उपलब्ध कराने के बावजूद भी प्रतिदिन 100 महिलाओं का बलात्कार हुआ और 364 महिलाएं यौन शोषण का शिकार हुई. रिपोर्ट के मुताबिक 2014 में केंद्रशासित और राज्यों में मिलाकर कुल 36735 मामले दर्ज हुए थे.

क्या कहती हैं अन्य रिपोर्ट
यूनिसेफ की रिपोर्ट ‘Hidden in Plain Sight’ में सामने आया कि भारत में 15 साल से 19 साल की उम्र वाली 34 फीसदी विवाहित महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने अपने पति या साथी के हाथों शारीरिक या यौन हिंसा झेली है. 15 साल से 19 साल तक की उम्र वाली 77 फीसदी महिलाएं कम से कम एक बार अपने पति या साथी के द्वारा यौन संबंध बनाने या अन्य किसी यौन क्रिया में जबरदस्ती का शिकार हुई हैं.

वहीं संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष तथा वाशिंगटन स्थित संस्था ‘International Center Research on Women ‘(ICRW) की रिपोर्ट से सामने आया कि भारत में 10 में से 6 पुरुषों ने कभी न कभी अपनी पत्नी अथवा प्रेमिका के साथ हिंसक व्यवहार किया है. रिपोर्ट में कहा गया कि यह प्रवृत्ति उन लोगों में ज्यादा है जो आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं. इन सभी रिपोर्ट्स को पढ़ने के बाद आप इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि महिलाओं को लेकर देश ना कल सुरक्षित था, ना आज है, और भविष्य का पता नहीं. लेकिन ये बात सोचने वाली है के देश में ‘नारी का सम्मान’ जरूरी है इसके लिए हम और आप क्या कर रहे हैं.

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