Home मिर्च- मसाला मामला सुपरवाइजर के ई-5 बंगले का

मामला सुपरवाइजर के ई-5 बंगले का

0 1,190 views
Rate this post

1 bhel 1मामला सुपरवाइजर के ई-5 बंगले का
भेल टाउनशिप में बंगला खाली न होने के कारण कई मैनेजर से लेकर बड़े अधिकारी आवास की समस्या से परेशान है। लेकिन भेल का एक सुपरवाइजर ऐसा भी है जिसने सात साल पहले गलत एप्रुवल लेकर ई-5 बंगला अलॉट करा लिया। कोई बात नहीं, यदि बंगला मिला है तो उसे रहना भी चाहिए और समय पर सभी बिल भी अदा करना चाहिए। यहां तो ऐसा भी नहीं हो रहा है। सुपरवाइजर साहब पर करीब साढ़े तीन लाख का किराया आज भी बकाया है। इन साहब के बारे में बताया जाता है कि भेल की पॉश कॉलोनी अल्कापुरी के मामले में इन पर सीबीआई में मामला दर्ज है। भेल के आला अधिकारी इन पर मेहरबान है। इसी के चलते ये एमआरपी मुंबई से लेकर कई साइडों पर काम करते हुए वापस भोपाल आ गए। वर्तमान में एफसीएफ विभाग में काम कर रहे है। अब ई-5 बंगले का का मामला सीपीओ के हाथ मे है।

सुपरवाइजर की बल्ले-बल्ले
भेल लेडीज क्लब द्वारा संचालित स्कील डेवलपमेंट सेंटर के एक सुपरवाइजर की बल्ले-बल्ले हो रही है। चर्चा है कि दिन में वह लाभ-शुभ का काम कर शाम ढलते ही सेंटर को शराब का अड्डा बना लेता है। साथ ही इस काम में अपने दोस्तों को भी शामिल कर देर रात तक जाम से जाम टकराते रहता है। स्कील डेवलपमेंट सेंटर संवेदनशील जगह है। खासतौर पर इसे महिलाएं संचालित करती है। यदि समय रहते इस मामले पर ध्यान नहीं दिया तो यह मामला काफी तूल पकड़ सकता है। चर्चा है कि सुपरवाइजर साहब को लोग ताकतवर मानते है। इसलिए शिकायत करने से कतराते है।

हेल्पिंग हैंड का ईएसआई फंड सीज
भेल लेडीज क्लब द्वारा संचालित हेल्पिंग हैंड शाखा का ईएसआई फंड शील करने की खबर है। इस शाखा पर 28 लाख रुपए ईएसआई में जमा करने थे। इसमें शाखा ने 20 लाख रुपए ही जमा किए। अभी भी 8 लाख रुपया जमा न होने के कारण ईएसआई सीज किया गया है। इसके चलते अब यहां के वर्करों को ईएसआई की सुविधा से वंचित रहना पड़ सकता है। ऐसा क्यों हो रहा है, यह गंभीर विषय है। भारी भरकम लाभ कमाने वाली यह संस्था वर्करों के भविष्य को न देखते हुए इस तरह की गलतियों पर गलती किए जा रही है।

जीएम कर रहे संडे को भी काम
भेल कारखाने के महाप्रबंधक मानव संसाधन विभाग के सिर पर काम का जुनून सवार है। वैसे भी काम के मामले में इन्हें शुरू से ही मेहनती कहा जा रहा है। इसी कारण ईडी साहब ने इन्हें जीएम एचआर के लिए कुछ सोच-समझकर ही चुना। भले ही जीएम एचआर का डंडा काम के चलते जूनियर अधिकारियों पर चल रहा है। इसको लेकर यह अधिकारी भले ही नाराज हो लेकिन यह बात तो चल ही चुकी है कि साहब मेहनती और कर्मठ है। यही नहीं इन्होंने ईएम ग्रुप की कई मशीनें जो स्क्रेप में जा रही थी को ठीक कर भेल के लाखों रुपए बचाए, और आगे टाउनशिप तक पहुंचकर भेल के कमला नेहरू पार्क की बंद पड़ी छुक-छुक टॉय ट्रेन को भी शुरू कर अपना झंडा गाड़ दिया। अब देखना यह है कि साहब आगे क्या गुल खिलाते है।

दोस्तों के साथ शेयर करे.....