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मोदी के लिए 2014 में ‘शहजादा’ तो 2019 में ‘नामदार’ बने राहुल गांधी!

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कर्नाटक चुनाव के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव पर फोकस कर लिया है. साल 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी को ‘शहजादा’ नाम दिया था. अब 2019 की जंग के लिए मोदी अब राहुल गांधी को ‘नामदार’ के नाम से जनता के सामने पेश कर रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को दिए गए ये दोनों नाम दरअसल, नेहरू-गांधी दौर की याद दिलाते हैं.

जब से राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बने हैं, तब से मोदी ने उन्हें ‘शहजादा’ कहना बंद कर दिया. कर्नाटक चुनाव में बीजेपी के लिए प्रचार अभियान की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने राहुल गांधी को नया नाम दिया. मोदी ने उन्हें ‘नामदार’ और खुद को ‘कामदार’ बताया. राहुल गांधी के 15 मिनट बोलने के चैलेंज पर पीएम मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘आप (राहुल गांधी) तो ‘नामदार’ हैं और हम ‘कामदार’. आप (राहुल गांधी) दरबारी कल्चर को बढ़ाने वाले हैं. हम जैसे ‘कामदार’ आपके सामने कैसे बैठ सकते हैं.”

कर्नाटक के चामराजनगर में अपने चुनावी प्रचार की शुरुआत करते मोदी ने राहुल गांधी को ‘कांग्रेस के अध्यक्ष’ कहकर बुलाया. इस बार वो राहुल के कांग्रेस अध्यक्ष बनने को लेकर हुए ‘सिलेक्शन VS इलेक्शन’ डिबेट पर नहीं गए. मोदी ने देश के गांवों में बिजली नहीं लाने के कारण कांग्रेस को कोसा.

चामराजनगर की रैली में मोदी ने कहा, “कांग्रेस के नेता और कांग्रेस के नए अध्यक्ष अति उत्साह में कभी-कभी मर्यादा तोड़ देते हैं. अच्छा होता इनके मुंह से 18, 000 गांव में बिजली पहुंचाने वाले मजदूरों के लिए कुछ अच्छे शब्द निकल जाते.”

भगवा पार्टी (बीजेपी) के एक नेता बताते हैं, “पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, मोदी गांधी को एक योग्य विपक्ष के रूप में प्रोजेक्ट नहीं करना चाहते. मोदी एक आम आदमी हैं और आम आदमी की तरह ही सोचते हैं. एक आम आदमी के लिए राहुल गांधी जवाहर लाल नेहरू के पड़पोते, इंदिरा गांधी के पोते और राजीव-सोनिया गांधी के बेटे हैं.”

सामाजिक वैज्ञानिक मनीषा प्रियम के मुताबिक, मोदी राहुल गांधी को अब शहजादा इसलिए नहीं बुला रहे, क्योंकि वह वंशवाद राजनीति के विरोध में हैं. वहीं, मोदी के ऐसा करने के पीछे एक दूसरी वजह भी है. वह ऐसा करके अपनी गरीब और राहुल गांधी के संपन्न फैमिली बैकग्राउंड का अंतर लोगों को दिखाना चाहते हैं.

हालांकि, साल 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान मोदी ने अखिलेश यादव को लेकर ऐसे कमेंट नहीं किए थे. समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठजोड़ कर यूपी का चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे बीजेपी के हाथों करारी शिकस्त मिली थी. चुनाव के दौरान रैली करते हुए मोदी ने कहा था, “जब अखिलेश यादव सीएम बने, तो मैंने सोचा कि वो युवा हैं, पढ़े-लिखे हैं. इसलिए उत्तर प्रदेश के लिए अच्छे काम कर सकते हैं. लेकिन, चुनाव को लेकर अखिलेश इतने डरे हुए हैं कि किसी के साथ भी ‘दोस्ती’ कर ले रहे हैं. समझ नहीं आता कि कोई कैसे जान-बूझकर डूबती नाव पर सवार हो सकता है?”

राहुल गांधी और अखिलेश यादव दोनों राजनीतिक परिवार से हैं. फिर दोनों के लिए ये अलग-अलग बर्ताव क्यों? क्या इसलिए कि अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव उस राजनीतिक जमाने के हैं, जहां राजनीति में विनम्रता थी? क्या इसलिए कि अखिलेश यादव मुलायम के परिवार की पहली पीढ़ी थे, जिन्होंने सियासत में कदम रखा था? क्या इसलिए राहुल गांधी के साथ मोदी का व्यवहार थोड़ अलग है.

सीनियर जर्नलिस्ट नीरजा चौधरी के मुताबिक, यह ‘ओल्ड स्कूल पॉलिटिक्स’ का नियम है. राहुल पर वार करने के लिए मोदी चुन-चुन कर शब्दों का इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने राहुल गांधी के लिए इसके पहले ‘पप्पू’, ‘शहजादा’ और ‘युवराज’ शब्दों को इस्तेमाल किया. राहुल गांधी को लेकर बीजेपी ने कई मीम्स भी बनाए.

‘पायोनियर’ के एडिटर अमित गोयल बताते हैं, “मोदी गांधी परिवार को बिल्कुल पसंद नहीं करते. राहुल गांधी के लिए इन शब्दों का इस्तेमाल कर मोदी विपक्ष की वो छवि जनता के सामने रखना चाहते हैं, जो उनकी नजर में है.” मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भले ही राहुल गांधी को ‘नामदार’ बता रहे हो. जनता बीजेपी की चीजें भी जानती है और कांग्रेस की बातें भी समझती है. ऐसे में यह देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि 2019 के चुनाव में क्या जनता ‘नामदार’ को ठुकरा देती है या फिर ‘कामदार’ से काम का हिसाब लेती है.

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