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मोदी-शाह ने येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण से क्यों किया किनारा?

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नई दिल्ली

कर्नाटक में प्रतिष्ठापूर्ण चुनावी लड़ाई के बाद बीजेपी के मुख्यमंत्री बी.एस.येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण समारोह से बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किनारा करने पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, बीजेपी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है लेकिन माना जा रहा है कि किसी भी असहज स्थिति से बचने के लिए ही इन दोनों नेताओं ने शपथ ग्रहण समारोह से दूरी बनाए रखी। इसका एक संकेत यह भी माना जा रहा है कि अभी ये दोनों नेता भी आश्वस्त नहीं हैं कि विधानसभा में येदियुरप्पा पूर्ण बहुमत साबित कर पाएंगे या नहीं।

उल्लेखनीय है कि केंद्र में मोदी सरकार के गठन के बाद इक्का दुक्का राज्यों को छोड़कर जब भी बीजेपी की सरकार बनी है, शपथ ग्रहण कार्यक्रम में न सिर्फ प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष मौजूद रहते हैं बल्कि पार्टी के अन्य नेता भी लावलश्कर के साथ हिस्सा लेते हुए उसे ग्रैंड फंक्शन बना देते हैं। लेकिन कर्नाटक के मामले में ऐसा नहीं हुआ। न तो दोनों आला नेता ही कार्यक्रम में पहुंचे और न ही अन्य नेताओं को वहां भेजा गया।

हालांकि, पार्टी के कुछ नेताओं का तर्क है कि इसकी वजह यह थी कि कानूनी अड़चनों से बचने के लिए जल्दबाजी में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ था इसलिए न तो ये दोनों नेता ही जा सके और न ही अन्य नेताओं को भेजा गया। जबकि इससे पहले जब भी शपथ ग्रहण कार्यक्रम होता रहा है, उसमें दो से तीन दिन का वक्त मिलता था लेकिन कर्नाटक के लिए यह वक्त नहीं था।

पार्टी के सूत्रों का कहना है कि एक तो येदियुरप्पा ने भले ही शपथ ली हो लेकिन अभी भी पार्टी के पास बहुमत लायक आंकड़ें नहीं हैं। ऐसे में दोनों आला नेता नहीं चाहते थे कि आने वाले वक्त में अगर बहुमत में कुछ गड़बड़ हो जाए तो असहज स्थिति से बचा जा सके। इसके अलावा दूसरी बड़ी दिक्कत यह है कि इस मामले में पहले से ही पार्टी को लग गया था कि जिस तरह से कांग्रेस और जेडीएस आक्रामक हैं, उस स्थिति में यह मामला अदालत में जा सकता है। ऐसे में अगर प्रधानमंत्री कार्यक्रम तय कर लेते तो बाद में अदालत से नकारात्मक फैसला आने पर उन्हें भी कार्यक्रम रद्द करना पड़ता। इससे भी असहज स्थितियां बनतीं। पार्टी के कुछ नेताओं का तर्क है कि प्रधानमंत्री उन शपथ कार्यक्रमों में ही जाते रहे हैं, जहां बीजेपी या उसके सहयोगियों को पूर्ण बहुमत मिला हो। गोवा में भी प्रधानमंत्री नहीं गए थे। इसी वजह से येदियुरप्पा ने भी सिर्फ खुद ही शपथ ली है।

अभी भी कई प्लान पर हो रहा है काम
अदालत के साथ ही सदन में बहुमत साबित करने के लिए बीजेपी एक साथ कई प्लान पर काम कर रही है। हालांकि उसका पहला फोकस इसी बात पर है कि किसी तरह से कांग्रेस या जेडीएस के विधायकों को इस तरह से अपने पाले में लाया जाए, जिससे ये दोनों या एक पार्टी टूट जाए। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि टूटने वाले विधायकों की संख्या इतनी हो कि वे दलबदल कानून में न फंसें। हालांकि इस मामले में इसलिए दिक्कत आ रही है, क्योंकि पर्याप्त संख्या में विधायक नहीं मिल रहे।

इसके अलावा बीजेपी प्लान बी पर भी काम कर रही है। इस प्लान के तहत पार्टी चाहती है कि कांग्रेस व जेडीएस के कुछ विधायकों को बहुमत के वक्त सदन से अनुपस्थिति रहने के लिए मनाया जा सके। अगर ऐसा होगा तो उस स्थिति में महज 10 से 12 विधायक भी अगर गैरहाजिर हो जाएं तो सदन में येदियुरप्पा अपना बहुमत साबित कर लेंगे।

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