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राजन बोले- नियम के दायरे में थी गोल्ड इम्पोर्ट स्कीम

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पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में हुए 13, 500 करोड़ के स्कैम की सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की जांच जारी है. इस फ्रॉड को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कामकाज और 80:20 गोल्ड इम्पोर्ट स्कीम पर भी सवाल उठे हैं. घोटाले के बाद केंद्रीय बैंक पर लग रहे सभी आरोपों को आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने खारिज किया है. 2013 से 2016 तक आरबीआई के गवर्नर रहे रघुराम राजन ने 2014 में लॉन्च हुई ‘गोल्ड इम्पोर्ट स्कीम’ को भी सही और नियम के दायरे के तहत बताया.

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के 26 जुलाई, 2014 को रघुराम राजन के नाम लिखे गए एक लेटर के सामने आने के बाद यह मामला उजागर हुआ है. इस लेटर में IBJA ने पिछली संयुक्त प्रगतिशील सरकार (यूपीए) पर आरोप लगाया है कि कुछ गिने-चुने लोगों और कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से इस सरकार गोल्ड इम्पोर्ट पॉलिसी में बदलाव किए थे.

उन्होंने कहा, “हमें यह भी जानना चाहिए कि पीएनबी के बोर्ड मेंबर्स को किसने अप्वॉइंट किया था, जिसने घोटाले होने की मंजूरी दी. हमें सार्वजनिक बैंकों के कामकाज और नियमन में सुधार को लेकर गंभीरता से सोचने की जरूरत है.

आरबीआई के पू्र्व गवर्नर ने कहा, “जहां तक 80:20 गोल्ड स्कीम की बात है, तो यह स्कीम गोल्ड सप्लाई की कमी का सामना करने के लिए लाई गई थी, ताकि इंडियन ज्वेलरी सेक्टर में जॉब के मौके लाई जा सके.” राजन ने कहा 2014 में सरकार रुपये को मजबूत बनाने के लिए सोने के आयात निषेध (इम्पोर्ट रेस्ट्रिकशन) पर रियायत देना चाहती थी. इसके लिए केंद्रीय बैंक ने ’80:20 गोल्ड इम्पोर्ट स्कीम’ लागू किया. इस तरह निवेशकों को कुछ शर्तों के साथ सोनों के आयात की दोबारा से अनुमति दी गई.

रघुराम राजन ने पीएनबी स्कैम को अपने नाम से फर्जी बयान और टिप्पणी चलाने पर सोशल मीडिया पर भी हमला बोला. सोशल मीडिया पर चल रही कुछ खबरों में दावा किया गया था कि रघुराम राजन ने पीएनबी में वित्तीय अनियमितता और नीरव मोदी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को चेतावनी दी थी. राजन ने कहा, “मेरे बारे में बकवास बातें कहना और लिखना सोशल मीडिया की आदत बन चुकी है.”

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