Home राज्य वाराणसी हादसाः घायल बोला, यकीन नहीं हो रहा कि वह जिंदा है

वाराणसी हादसाः घायल बोला, यकीन नहीं हो रहा कि वह जिंदा है

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वाराणसी

‘मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा कि मैं जिंदा हूं। मैं ऑटो रिक्शा में बैठकर जा रहा था तभी पुल का बड़ा हिस्सा ऊपर आकर गिरा। जो भी उसके नीचे आया बुरी तरह से दब गया।’ यह कहना है यूपी के वाराणसी में हुए फ्लाइओवर हादसे में पीड़ित प्रद्युमन लाल का। वाराणसी में चौका घाट से कैंट रेलवे स्टेशन होते हुए लहरतारा तक जाने वाले फ्लाइओवर का काम चल रहा है। मंगलवार की शाम लगभग साढ़े पांच बजे कैंट रेलवे स्टेशन के पास दो पिलर को जोड़ने वाली स्लैब असंतुलित होकर चलते ट्रैफिक पर जा गिरी। इस हादसे में 20 लोगों की मौत हो गई जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं।

मिर्जापुर जिले के पिपराही इलाके में रहने वाले प्रद्युमन भी इस स्लैब के नीचे दब गए। प्रद्युम का इलाज शिव प्रसाद गुप्ता डिविजनल हॉस्पिटल में चल रहा है लेकिन वह अभी भी सदमे में हैं। उन्हें जब पता चला कि ऑटो में जितने भी लोग थे, उनमें से सिर्फ वह ही जिंदा हैं तो वह काफी देर तक स्तब्ध हो गए। उन्‍होंने कहा कि वह अपने को बहुत ही भाग्यशाली मान रहे हैं कि मौत के मुंह में भी जाकर वह सुरक्षित बच गए।

नक्खीघाट के रहने वाले मोहम्मद शकील भी इस हादसे का शिकार हुए हैं। वह अपनी बाइक से जा रहे थे तभी स्लैब आकर उनके ऊपर गिरी। शकील के साथ ही सराय गोवर्धन एरिया के रहने वाले मोहम्मद इस्माइल को भी भरोसा नहीं हो रहा कि वह जिंदा हैं। घायलों का इलाज कर रहे डॉ. संजय राय ने बताया कि घायलों के लिए एक अलग से वॉर्ड बनाया गया है। इस वॉर्ड में उनका इलाज चल रहा है। चार घायलों को यहां लाया गया एक की हालत बहुत गंभीर थी तो उन्हें बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर रिफर किया गया है।

उधर, हादसे के दूसरे दिन बुधवार को की सुबह अपनों की तलाश में घटनास्थल पर बड़ी संख्‍या में लोग पहुंचे हैं। बीम के नीचे दबे वाहनों को निकालने का काम अभी भी जारी है। हालांकि जिस रोड पर हादसा हुआ था वहां अब आवागमन चालू हो गया है। इस बीच समाजवादी पार्टी के नेता एमएलसी शतरुद्र प्रकाश ने घटना के लिए प्रशासन को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि जब स्लैब रखने का काम चल रहा था तो ट्रैफिक डायवर्ट करना चाहिए था। इतना ही नहीं इस जगह पर काम रात के समय में होना चाहिए।

पूर्व एमएलसी अजय राय ने इस घटना की जांच उच्च स्तरीय कमिटी से कराए जाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों पर 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले फ्लाइओवर पूरा करने का दबाव है, इसलिए अधिकारी जल्दी-जल्दी काम कर रहे हैं। ऐसे में वे सुरक्षा के सारे प्रबंध भूल गए।

अफसरों की लापरवाही से हुआ हादसा
फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान मानकों का खुला उल्‍लंघन किया जा रहा था। अप्रोच मार्ग के दोनों ओर बैरिकेडिंग किए जाने का निर्देश सेतु निगम के अभियंताओं को दिया गया है लेकिन मनमाने तरीके से काम चलता रहा। लगातार प्रशासनिक अधिकारियों की चेतावनी के बाद भी सेतु निगम के अधिकारी आंख बंद किए रहे। फ्लाईओवर के अप्रोच मार्ग की चौड़ाई कम होने से मात्र एक वाहन के आने-जाने का रास्ता है।

इस रूट पर रेंगता है ट्रैफिक
जिस जगह हादसा हुआ वहां हमेशा जाम की स्थित रहती है। वैकल्पिक मार्ग न होने से इलाहाबाद और कानपुर रूट पर जाने वाली बसें और अन्‍य वाहन इसी रास्‍ते से आते-जाते हैं। जाम के कारण अक्‍सर फ्लाइओवर के ऊपर काम चलता रहता है और नीचे से वाहन आते-जाते हैं। भारी भरकम स्लैब पिलर पर चढ़ाते वक्‍त जब हादसा हुआ उस समय पीक आर था। दोनों ओर के अप्रोच मार्ग से बड़ी संख्‍या में वाहन गुजरते समय चपेट में आ गए। बैरिकेडिंग न होने से स्लैब गिरी तो दर्जनों छोटे-बड़े वाहन दबकर पूरी तरह चकनाचूर हो गए और उनमें सवार लोगों को देखते-देखते मौत निगल गई।

सीएम योगी ने लिया हाल
घटना होने के बाद सीएम योगी ने डेप्युटी सीएम केशव प्रसाद मौर्या को तत्काल मौके पर जाने को कहा। इसके साथ ही वह खुद विशेष विमान से रात लगभग बारह बजे वाराणसी पहुंचे। वह सबसे पहले कैंट रेलवे स्टेशन के सामने घटनास्थल पर पहुंचे। यहां अधिकारियों से पूछताछ के बाद वह ट्रॉमा सेंटर पहुंचे और घायलों का हालचाल जाना।

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