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शर्मिष्ठा की पिता को नसीहत- आपका गलत इस्तेमाल कर सकता है RSS

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नई दिल्ली

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने के लिए नागपुर पहुंच चुके हैं. बुधवार को नागपुर पहुंचने पर आरएसएस के स्वयंसेवक उन्हें लेने पहुंचे. पिता प्रणब मुखर्जी के आरएसएस कार्यक्रम में शामिल होने से उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी नाखुश हैं. उन्होंने प्रणब मुखर्जी को नसीहत दी है.

शर्मिष्ठा ने ट्वीट करते हुए लिखा कि उम्मीद है आज कि घटना के बाद प्रणब मुखर्जी इस बात को मानेंगे कि बीजेपी किस हद तक गंदा खेल सकती है. यहां तक ​​कि आरएसएस भी इस बात पर विश्वास नहीं करेगा कि आप अपने भाषण में उनके विचारों का समर्थन करेंगे. उन्होंने कहा कि भाषण तो भुला दिया जाएगा, लेकिन तस्वीरें बनी रहेंगी और उनको नकली बयानों के साथ प्रसारित किया जाएगा.

बता दें ऐसी खबरें सामने आ रही थीं कि शर्मिष्ठा बीजेपी से जुड़ सकती हैं. इन्हीं खबरों का जिक्र करते हुए शर्मिष्ठा ने कहा कि बीजेपी किस हद तक गंदा खेल सकती है. शर्मिष्ठा के मुताबिक उनकी बीजपी से जुड़ने की अफवाह फैलाई गई.उन्होंने पिता को नसीहत देते हुए आगे लिखा कि नागपुर जाकर आप बीजेपी और आरएसएस को फर्जी कहानियां बनाने, जैसे आज उन्होंने अफवाह फैलाई, वैसी अफवाह फैलाना और उसको सही तौर पर मनवाने का मौका दे रहे हैं. अभी तो ये शुरुआत है.

कांग्रेस के कई नेता भी दे चुके हैं प्रणब के विरोध में बयान
प्रणब के नागपुर में आरएसएस मुख्यालय जानने से सिर्फ उनकी बेटी शर्मिष्ठा नाखुश नहीं हैं. कांग्रेस के कई नेता भी प्रणब के विरोध में बयान दे चुके हैं. वहीं बुधवार को इन कांग्रेसी नेताओं की बयानबाजी के जवाब में RSS के थिंक-टैंक कहे जाने वाले मनमोहन वैद्य ने एक लेख लिखा. इसमें उन्होंने प्रणब के विरोध को कांग्रेस का बैद्धिक आतंकवाद करार दिया है.

जो बोलना है नागपुर में बोलूंगा- प्रणब मुखर्जी
इसके पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को कांग्रेस के नेताओं ने ये नसीहतें दी कि वो क्या बोलें और क्या न बोलें. हालांकि प्रणब मुखर्जी ने इन सबको दो टूक जवाब दिया. उन्होंने कहा, ‘मुझे जो बोलना होगा, मैं वहीं बोलूंगा. और नागपुर में जाकर ही बोलूंगा. मेरे पास कई चिट्ठियां और फोन कॉल आए हैं. मैंने किसी का जवाब नहीं दिया.’बता दें प्रणब मुखर्जी 7 जून को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नागपुर मुख्यालय में संघ शिक्षा वर्ग के तृतीय वर्ष ओटीसी (ऑफिसर्स ट्रेनिंग कैंप) में शामिल हो रहे स्वयंसेवकों को संबोधित करेंगे.

अपने पूरे राजनीतिक करियर में कांग्रेस से जुड़े रहे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कांग्रेस की सरकारों के दौरान वित्त, रक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले हैं, जबकि आरएसएस को भारतीय जनता पार्टी के मातृ संगठन के रूप में में जाना जाता है. बताया जाता है कि पिछलेकुछ वर्षों में प्रणब मुखर्जी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बीच अच्छे रिश्ते बन गए हैं.

गौरतलब है कि गर्मियों के दौरान आरएसएस पूरे देश में अपने स्वयंसेवकों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित करता है. तृतीय वर्ष का अंतिम प्रशिक्षण शिविर संघ के मुख्यालय नागपुर में आयोजित किया जाता है. अक्सर तृतीय वर्ष प्रशिक्षण हासिल करने के बाद ही किसी स्वयंसेवक को आरएसएस का प्रचारक बनने के योग्य माना जाता है.

क्या कहेंगे प्रणव दा?
मुखर्जी RSS के कार्यक्रम में क्या कहेंगे, इस बारे में स्पष्टतौर पर कुछ भी कहा नहीं जा सकता लेकिन राष्ट्रपति के तौर पर आखिरी दिन उनके द्वारा दिए भाषण से एक संकेत मिलता है कि आरएसएस प्रचारकों को क्या सुनने को मिल सकता है। आपको बता दें कि 2017 में मुखर्जी ने हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा था कि कैसे अविश्वास ही हिंसा की मूल वजह बन रहा है।

2012 में शपथ ग्रहण के समय उन्होंने विविधता और सहिष्णुता की बात की थी। दोनों संबोधनों में उन्होंने शिक्षा पर बोला था। 2012 में उन्होंने उन फैक्टर्स पर जोर दिया था जो आधुनिक देश के लिए जरूरी हैं- जैसे लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समानता। उन्होंने कहा था कि असली विकास वह है जब सबसे गरीब व्यक्ति को महसूस हो कि वह उभरते हुए भारत का हिस्सा है।

गौर करने वाली बात यह है कि मुखर्जी हिंदुत्व की विचारधारा और सांप्रदायिकता के आरोपों के कारण RSS के बड़े आलोचक रहे हैं। ऐसे में अब यह जानना दिलचस्प होगा कि जब वह आरएसएस के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे तो उनका भाषण क्या होता है।

RSS ने किया पूर्व राष्ट्रपति के फैसले का स्वागत
उधर, RSS के सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य ने प्रणब मुखर्जी के फैसले का स्वागत किया है. एक अखबार में लिखे अपने लेख में उन्होंने कहा, ‘नागपुर में स्वागत है प्रणब दा.’ उन्होंने लिखा है कि मुखर्जी के इवेंट में शामिल होने को लेकर कांग्रेस को परेशानी है, लेकिन RSS कैडर के बीच कांग्रेस से लंबे समय तक जुड़े रहे नेता को आमंत्रित करने में हमें कोई दिक्कत नहीं है.

संघ शिक्षा वर्ग क्या है?
ये सालाना प्रशिक्षण शिविर है, जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ हर साल करता है. ये तीसरे साल के स्वयंसेवकों के लिए होता है. इससे पहले पहले साल और दूसरे साल के स्वयंसेवकों का कैंप भी होता है जो प्रांत और क्षेत्र आधार पर आयोजित किया जाता है. पहले साल के स्वयंसेवकों का शिविर 20 दिनों का होता है और संघ के 42 प्रांत ईकाइयों में होता है. दूसरे साल के स्वयंसेवकों के लिए ट्रेनिंग कैंप क्षेत्रीय आधार पर लगते हैं. ये भी 20 दिनों के होते हैं. लेकिन तीसरे साल के स्वयंसेवकों का कैंप नागपुर में ही होता है. हालांकि, पहले और दूसरे साल के कैंप में शामिल होने वाली लिस्ट जिला स्तर पर कई आधार पर छांटकर तैयार की जाती है.

संघ शिक्षा वर्ग के कैंप में क्या होता है?
25 दिन का ये प्रोग्राम अप्रैल मई में होता है जब नागपुर में काफी गर्मियां पड़ रही होती हैं. तापमान आमतौर पर 45 डिग्री सेंटीग्रेड को छूता है. ये ट्रेनिंग काफी कठिन होती है और इसका रूटीन बहुत कड़ा होता है. स्वयंसेवकों को सुबह चार बजे उठना होता है. रात 10.30 बजे सोने का समय होता है. इस दौरान उन्हें केवल एक ब्रेक मिलता है- वो एक घंटे का होता है.
सामान्य तौर पर सुबह के पहले दो घंटे का समय शारीरिक अभ्यास का होता है, जिसमें कई तरह की ड्रिलिंग. शस्त्ररहित कलाएं, जूडो, कराटे और दंडयुद्ध करना होता है. दिन के प्रोग्राम में अलग अलग ग्रुप के साथ दो मीटिंग्स होती हैं. रोज एक संयुक्त सत्र भी होता है, जिसे बौद्धिकी कहा जाता है.

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