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शिव’राज’ में विकास कार्यों की रफ्तार भूमिपूजन तक सीमित..!

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भोपाल

मध्य प्रदेश में विकास की बात करने वाली शिवराज सरकार अब उसी विकास को लेकर विवादों में घिर गई है. ये विवाद 1.25 लाख करोड़ के विकास कार्यों के लंबित और भूमिपूजन तक सीमित होने की वजह से शुरू हुआ है. कांग्रेस अब इसे चुनावी मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने का मन बना चुकी है

कोलार में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 18 सिंतबर 2017 को 125 करोड़ की लागत से सीवेज नेटवर्क बिछाने के काम का भरे मंच से लोकार्पण किया था. आज जमीनी हकीकत है कि सीवेज नेटवर्क बिछाने के लिए टेंडर तक नहीं हो पाए हैं. ये मामला एक बानगी है. इसके अलावा भी पूरे प्रदेशभर में बीते 14 सालों में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, पार्षद और दूसरे जनप्रतिनिधियों ने 1.25 लाख करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन तो किया, लेकिन ये सभी विकास कार्य सिर्फ भूमिपूजन और लोकार्पण तक सिमट कर रहे गए.

चुनावी साल में आचार संहिता लगने से पहले सभी जनप्रतिनिधी वोट बैंक की राजनीति करते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में ताबड़तोड़ तरीके से विकास कार्यों के नाम पर भूमिपूजन और लोकार्पण कर रहे हैं. कांग्रेस ने सीएम और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. कांग्रेस का कहना है कि विकास सिर्फ बीजेपी के लोगों, सीएम, उनकी पत्नी और मंत्री मंडल का हुआ है.

विकास कार्यों का भूमि पूजन करने के मामले में मंत्री गोपाल भार्गव भी किसी से पीछे नहीं हैं. उन्होंने भी पिछले विधानसभा चुनाव में भूमिपूजन का रिकॉर्ड बनाया था. अपने विधानसभा क्षेत्र रेहली में भार्गव ने 2551 भूमिपूजन का रिकॉर्ड बनाकर सबको चौंका दिया था लेकिन बीते 5 साल के कार्यकाल में महज 30 प्रतिशत काम पूरा हो सका है…वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने 12 साल से अधिक के कार्यकाल में करीब 33 हजार घोषणाएं की.

बताया जा रहा है कि शिवराज की कुल घोषणाओं में से करीब 1500 से अधिक घोषणाएं आज भी लंबित है. दूसरी तरफ कांग्रेस का दावा है कि सीएम की करीब 22 हजार घोषणाएं आज तक पूरी नहीं हो पाई है. जनता की मांग और आवश्यकताओं के अनुसार योजनाओं, सडकों, नाली निर्माण, स्कूल, आंगनबाड़ी, नलकूप, सामुदायिक केंद्रों समेत दूसरे विकास कार्यों का भूमिपूजन तो कर दिया जाता है, लेकिन तय समय सीमा में काम नहीं होने के वजह से विकास कार्यों की लागत अक्सर बढ़ जाती है. बीजेपी अपना बचाव करते हुए विकास कार्यों के मुद्दे पर कांग्रेस को नलायक और खुद को लायक बता रही है. वहीं कांग्रेस अब इस मुद्दे को सूचीबद्ध कर चुनाव में उठाएगी.

लोकार्पण के पीछे की कहानी भी अजीब है. दरअसल, जब कोई अहम प्रोजेक्ट होता है, तो सीएम मंत्री या फिर केंद्रीय मंत्रियों को बुलाया जाता है और यदि परियोजना ज्यादा बढ़ी हो तो प्रधानमंत्री को बुलाया जाता है. आपको बता दें कि संविधान में कही नहीं लिखा है कि सरकारी विकास कार्यों का भूमिपूजन किया जाए. जिस राशि से भूमि पूजन होता है, वो पैसा जनता की गाढ़ी कमाई का होता है. ऐसे में सवाल उठाता है कि क्यों भूमिपूजन के नाम पर जनता से धोखा किया जा रहा है.

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