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शिवसेना को ‘तलाक’ देने को तैयार नहीं BJP, मिला ये जवाब

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मुंबई

बीजेपी महाराष्ट्र में अपने सहयोगी दल शिवसेना को मनाने में जुटी हुई है. बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘एक शादी में पति-पति के बीच लड़ाई होती ही है. लेकिन मैं चाहता हूं कि मेरी पत्नी मेरे साथ ही रहे.’ इस पर शिवसेना के एक नेता ने कहा कि इस रिश्ते में उनकी पार्टी पति की भूमिका में है और तलाक रद्द करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता.

ये बातचीत दोनों पार्टियों के बीच परामर्श सत्र के दौरान हुई. इसमें दोनों दलों ने भाग लिया क्योंकि बीजेपी महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता पर काबिज रहने के लिए अपने सहयोगियों को मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती.

बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक शुरुआती बातचीत महाराष्ट्र बीजेपी के कुछ नेताओं और शिवसेना के कुछ चुने हुए उद्धव ठाकरे के करीबी नेताओं के बीच हुई. इस बातचीत का मकसद मैत्रीपूर्ण सीटों के बंटवारे के लिए सहयोगी पार्टी को मनाना था जो दोनों ही पार्टियों में से किसी के भी हित को प्रभावित न करें.

बंद हो चुके सुलह के रास्ते
एनडीए गठबंधन में सहयोगी पार्टियों को दूर जाते देखकर बीजेपी डर रही है कि आगामी चुनाव में जीत कठिन हो सकती है. इसके अलावा एनसीपी और कांग्रेस के हाथ मिलाने की संभावनाएं बीजेपी के लिए और चिंता पैदा कर रही है.

इससे पहले शिवसेना ने कहा था कि वह अपने दम पर चुनाव लड़ेगी. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि शिवसेना में केवल एक व्यक्ति ही फैसला लेता है और वो हैं उद्धव ठाकरे. उन्होंने कहा है कि हम अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे. किसी दूसरे नेता के साथ बातचीत का कोई मतलब नहीं है.उन्होंने आगे कहा कि अब सुलह की कोई संभावना नहीं है. वापस लौटने के दरवाजे काफी पहले ही बंद हो चुके हैं. हमारे राष्ट्रीय कार्यकारी ने ये फैसला लिया है और इसे बदलने का कोई तरीका नहीं है.

समझौते के लिए ये कदम उठाएं पीएम मोदी
लेकिन एक अन्य नेता ने समझौते का तरीका सुझाया है. उन्होंने कहा कि इसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को उद्धव ठाकरे से मिलने मातोश्री आना होगा.

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि बीजेपी को पता है कि मोदी लहर जिसने राज्य में पिछली बार चुनाव जीतने में मदद की थी, वह कम हो रही है और महाराष्ट्र में बीजेपी विरोधी सत्ता से इनकार नहीं कर सकता. अगर राज्य की चारों बड़ी पार्टियां बीजेपी, कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना अलग-अलग चुनाव लड़ती है तो भी बीजेपी जीत सकती है लेकिन अगर एनसीपी कांग्रेस से हाथ मिला लेती है तो बीजेपी के लिए चुनाव जीतना मुश्किल हो जाएगा.

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