Home राष्ट्रीय सूचना आयोग की सूचना कौन देगा? CIC के पास नहीं कोई डिटेल

सूचना आयोग की सूचना कौन देगा? CIC के पास नहीं कोई डिटेल

0 94 views
Rate this post

बड़ी अजीब बात है कि जिस संस्‍थान को सूचना प्रदान करवाने की जिम्‍मेदारी दी गई है, उसके पास खुद के ही संस्‍थान में उठाए गए कदमों और कार्रवाई की जानकारी मौजूद नहीं है. सूचना हासिल करने में आई परेशानियों का आखिरी हल केंद्रीय सूचना आयोग (Central information commission) के पास होता है. RTI के तहत मांगी गई जानकारी पर टालमटोल करने वाले विभागों पर आयोग ही अाखिरी फैसला करता है लेकिन दिलचस्‍प है कि आयोग के फैसले का पालन हुआ है या नहीं, इसकी जानकारी खुद आयोग के पास नहीं है.

मामला सूचना न देने पर वसूले गए जुर्माने को लेकर मांगी गई जानकारी से जुड़ा है. भागलपुर के अजीत सिंह की एक RTI पर आयोग (CIC) में 20 मार्च 2018 को सुनवाई हुई है. जिसमें दिलचस्‍प बात सामने आई है कि आयोग के पास अपने फैसले में लगाए गए जुर्माने की वसूली होने या न होने का कोई डाटा मौजूद नहीं है. 2005 से चल रहे आयोग के पास इतने सालों में हुई कार्रवाई का ही ब्‍यौरा नहीं है.

बता दें कि इसी मसले पर आरटीआई डालकर केंद्रीय सूचना आयोग से जानकारी मांगी गई थी, जिसका लंबे समय तक जवाब नहीं मिला और मामला केंद्रीय सूचना आयोग में सुनवाई के लिए पहुंच गया.इसी दौरान फैसला सुना रहे सूचना आयुक्‍त दिव्‍य प्रकाश सिन्‍हा ने आयोग के लीगल सेल के कंसल्‍टेंट किशोर कुमार पुखराल और सीपीआईओ (CPIO) के रवैये पर गहरी नाराजगी जाहिर की और भविष्‍य के लिए चेतावनी दी है.

फैसला सुनाते वक्‍त सिन्‍हा ने कहा, “जिस प्रकार आवेदक ने अभी तक के सालों में लगाए गए जुर्माने की वसूली की जानकारी मांगी है, वह जानकारी मौजूद नहीं है और हो सकता है कि यह जानकारी शायद इकठ्ठी ही नहीं की गई हो लेकिन सीपीआईओ से ये उम्‍मीद की जाती है कि वे आवेदक को जितना संभव हो सके बिना टालमटोल किए जानकारी मुहैया कराएं.इसे लेकर हमने सूचना आयुक्‍त सिन्‍हा से फोन पर दो बार बातचीत करने की कोशिश की लेकिन उनके निजी सचिव की ओर से कहा गया,आरटीआई की सुनवाई के बाद आया फैसला ही उनका बयान है.

 

स‍िन्‍हा के निजी सचिव ने कहा कि फैसले के बाद पदाधिकारियों ने आवेदक को जानकारी मुहैया कराई है या नहीं, इसकी जानकारी उन्‍हें नहीं है और न ही वे इस मामले पर कोई कार्रवाई करने जा रहे हैं.लेकिन अगर RTI आवेदक इस पूरे मामले पर असंतोष जाहिर करते हुए गैर अनुपालन (non compliance) की अपील दाखिल करता है तो आगे सुनवाई हो होगी और कार्रवाई की जाएगी.

गौरतलब है कि आरटीआई डालने के बाद जानकारी न देने पर सीआईसी जन सूचना अधिकारी/संबंधित अधिकारी पर 250 प्रतिदिन से अधिकतम 25000 रुपये तक का जुर्माना लगाता है. इसके अलावा विभागीय कार्रवाई भी करता है. अभी तक करीब 25 मामलों में जनसूचना अधिकारियों पर पेनल्‍टी लगाई गई है, लेकिन वसूली हुई या नहीं, इसका डाटा सीआईसी के पास नहीं है.

केंद्रीय सूचना आयोग के पास नहीं हैं ये जानकारियां

1. आरटीआई आवेदकों को सूचना प्रदान न कराने पर दंडित किए गए कितने अधिकारियों ने दंड की रकम जमा की है?

2.कितने अधिकारियों ने दंड की रकम जमा नहीं की है और उनके खिलाफ क्‍या दंडात्‍मक कार्रवाई की गई है? या कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं?

3. कितने केंद्रीय जन सूचना अधिकारियों को बरी किया गया है?

4. सूचना न मिलने पर कितने आरटीआई आवेदकों को मुआवजे की रकम दिलाई गई है?

5. आयोग के अादेशों को न मानने वाले पदाधिकारियों की सूची ?

दो सालों में अपील पर अपील न सूचना मिली न सुनवाई हुई
बता दें कि इसी संबंध में अजीत सिंह की ओर से पहली आरटीआई 20 फरवरी 2016 को डाली गई थी. जिसमें केंद्रीय सूचना आयोग से सूचना देने में आनाकानी करने वाले केंद्रीय जन सूचना अधिकारियों पर लगाए गए जुर्माने, उनके खिलाफ की गई दंडात्‍मक या विभागात्‍मक कार्रवाई, अधिकारियों को दोषमुक्‍त करने, सीआईसी के आदेश को न मानने वाले अधिकारियों की लिस्‍ट और जानकारी न मिलने पर आवेदक को मिलने वाले मुआवजे के संबंध में जानकारी मांगी गई थी.

लेकिन आरटीआई के इन पांच सवालों के जवाब न मिलने पर प्रथम और द्वितीय अपील की गई. इसके बाद केंद्रीय सूचना आयोग में बैठे अधिकारियों ने दो सवालों के जवाब देकर इस आरटीआई 148102/2016 को सुधार की गुंजाइश बताते हुए वापस भेज दिया. हालांकि आवेदक सुधार कर फाइल आयोग में भेज दी है लेकिन दो साल गुजरने के बाद भी इस मामले में न तो पूरी सूचना ही मिली है और न ही इस मामले की सीआईसी में सुनवाई हुई है.

इसके बाद दूसरी आरटीआई अक्‍तूबर 2016 में डाली गई, जिसपर सुनवाई हुई और फैसले में सूचना आयुक्‍त दिव्‍य प्रकाश सिन्‍हा ने जुर्माना वसूली और पदाधिकारियों पर दंडात्‍मक कार्रवाई की जानकारी इकठ्ठी न होने की बात कही है.

2005 में बना था केंद्रीय सूचना आयोग
गौरतलब है कि किसी भी सरकारी विभाग या मंत्रालयों से सूचनाएं न मिल पाने और सूचना प्रदान करने में सरकारी कर्मचारियों की मनमर्जी को खत्‍म करने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम सामने आया और केंद्रीय सूचना आयोग की स्‍थापना की गई. इसका उद्धेश्‍य यही था कि किसी भी भारतीय नागरिक को किसी भी सरकारी विभाग से जानकारी लेने के लिए भटकना न पड़े.

दोस्तों के साथ शेयर करे.....