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सेना का अपमान मोहन भागवत ने नहीं बल्कि JNU ने किया : उमा भारती

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भोपाल

केन्द्रीय मंत्री उमा भारती ने सरसंघचालक मोहन भागवत के सेना पर दिये गये बयान को फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन बताया है. उन्होंने कहा कि सेना का अपमान सरसंघचालक मोहन भागवत के बयान ने नहीं बल्कि JNU ने किया है.

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित प्रेस वार्ता में संघ के स्वयंसेवक के देश की रक्षा के लिए फौरन तैयार होने के भागवत के बयान पर पूछे सवाल के जवाब में उमा भारती ने कहा कि मोहन भागवत ने किसी रूप में सेना का अपमान नहीं किया. उन्होंने कहा कि सेना का अपमान तो जेएनयू में उस वक्त हुआ जब सेना पर महिलाओं के साथ बलात्कार होने के भाषण दिये गये.

उमा भारती ने कहा कि वो तो आप कुछ भी बना दो लेकिन फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन सबको देना चाहिए. भागवत जी की भी होगी. फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन उनका भी अधिकार है. हम उनपर एफआईआर दर्ज कर रहे हैं गालियाँ दे रहे हैं.

उन्होंने कहा कि आर्मी के खिलाफ जेएनयू में भाषण हो रहे हैं. भारत की सेना पर महिलाओं के साथ बलात्कार का अपमान जेएनयू कैंपस में भाषणों में हुआ. मीडिया ने लाईव टेलिकास्ट किया. वो फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन में आ गया? औऱ ये कहना कि आरएसएस का स्वयंसेवक मर मिटेगा देश के लिये इसमें ये सब शुरू हो गया कि सेना का अपमान है? सेना का अपमान ये नहीं है सेना का अपमान तो जेएनयू के कैंपस में हुआ था.

इससे पहले उमा भारती ने राहुल गांधी पर भी हमला बोला. भोपाल में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने उन्होंने राहुल गांधी को सलाह दी कि वो पार्लियामेंट में बैठना शुरू करें औऱ सुनना शुरू करें. उत्तर देते समय वो भाग जाते हैं.

वहीं उमा भारती ने अपने चुनाव न लड़ने वाले बयान पर भी सफाई दी. उन्होंने कहा कि डॉक्टर्स की सलाह पर स्वास्थ्य कारणों के चलते अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी के सामने मंत्री पद छोड़ने की पेशकश की थी. लेकिन अमित शाह ने कहा कि आप 2019 तक मंत्री बनी रहें.

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