Home राष्ट्रीय सेना के लिए छोटे हथियारों की बड़ी कमी दूर होगी

सेना के लिए छोटे हथियारों की बड़ी कमी दूर होगी

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नई दिल्ली

सेना के लिए छोटे हथियारों की फौरी जरूरतों को पूरा करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने हजारों राइफलों और कार्बाइनों की खरीद को मंजूरी दी है। साथ ही देसी उद्योगों के लिए रक्षा उपकरणों को विकसित करने और निर्माण करने की नियमों को नरम किया गया है। अब स्टार्ट-अप भी भारतीय सशस्त्र बलों के लिए उपकरण विकसित कर सकेंगे।

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में मंगलवार को रक्षा खरीद परिषद की बैठक हुई। इसमें 72,400 राइफलों और 93,895 कार्बाइनों की खरीदारी को मंजूरी दी गई। यह खरीदारी फास्टट्रैक बेसिस पर होगी, जिसकी लागत 3547 करोड़ रुपये होगी। सेना में छोटे हथियारों की भी भारी कमी महसूस की जा रही है। करीब तीन दशक पहले तैयार किए गए इनसास राइफलों को हटाकर असॉल्ट राइफलें शामिल करने का प्लान है। रूस में बनी एक 47 असॉल्ट राइफलों की जगह अब कार्बाइनें लेंगी। हाल में देश में बनी असॉल्ट राइफलों की फायरिंग का प्रदर्शन किया गया था, जिसमें सुधार की गुंजाइश बताई गई है। बड़ी संख्या में कार्बाइन खरीदने का प्रस्ताव भी कुछ समय पहले ठंडे बस्ते में चला गया था। सेना में 6 लाख से ज्यादा असॉल्ट राइफलों और 3 लाख से ज्यादा कार्बाइनों की जरूरत बताई जाती है।

रक्षा मंत्री खरीद परिषद ने मेक-2 प्रक्रिया को भी आसान बनाने का फैसला किया है, जिसके तहत इंडस्ट्री के जरिए रक्षा उपकरणों को विकसित करने और निर्माण करने की गाइडलाइन तय की गई है। इसमें बदलाव के तहत, इंडस्ट्री की ओर से अपनी तरफ से पेश किए गए प्रस्तावों को भी रक्षा मंत्रालय अब मंजूर कर सकेगा। स्टार्ट-अप भी भारतीय सशस्त्र बलों के लिए उपकरण विकसित कर सकेंगे।

मेक-2 प्रॉजेक्ट में शामिल होने के लिए योग्यता की शर्त नरम की गई है। पहले सिर्फ दो वेंडर प्रोटोटाइप उपकरण बनाने के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाते थे, अब योग्यता के नरम किए गए मानकों पर खरे उतरने वाले सभी वेंडर शामिल हो सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति या फर्म इनोवेटिव सलूशन लेकर आए तो सेना हेड क्वॉर्टर के पास विकल्प होगा कि वह इस पर विचार करे। सेना हेड क्वॉर्टर को विषय के जानकारों और कंसल्टेंट हायर करने की भी इजाजत दी गई है।

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