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₹10 करोड़ तक के इन्वेस्टमेंट वाले स्टार्टअप्स को टैक्स में राहत

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नई दिल्ली

सरकार ने एंजल इन्वेस्टर के कंट्रीब्यूशन सहित ₹10 करोड़ तक के टोटल इन्वेस्टमेंट वाली स्टार्टअप्स को टैक्स कंसेशन (टैक्स में छूट) की इजाजत देकर उभरते उद्यमियों को बड़ी राहत दी है। कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक स्टार्टअप में स्टेक लेने के इच्छुक एंजल इन्वेस्टर की मिनिमम नेटवर्थ दो करोड़ रुपये या पिछले तीन फाइनेंशियल ईयर में 25 लाख रुपये से ज्यादा एवरेज रिटर्न्ड इनकम होनी चाहिए।

मिनिस्ट्री की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, ‘नोटिफिकेशन के जरिए किए गए अमेंडमेंट्स के साथ ही अब स्टार्टअप्स के लिए फंड का एक्सेस आसान हो जाएगा। इससे नया बिजनस शुरू करना आसान हो जाएगा, स्टार्टअप ईकोसिस्टम और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा, देश में रोजगार सृजन बढ़ेगा।’

इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 56 के तहत कई स्टार्टअप्स ने एंजल फंड्स से जुड़े टैक्सेशन को लेकर चिंता जताई थी। इस सेक्शन के प्रोविजन एंटिटी को मिले फंड के टैक्सेशन से जुड़े हैं। इसके तहत टैक्स अथॉरिटीज अब तक कम से कम 18 स्टार्टअप्स को नोटिस भेज चुके हैं। इस सेक्शन के मुताबिक अगर कोई कंपनी (क्लोजली हेल्ड) फेयर मार्केट वैल्यू से ज्यादा रेट पर शेयर इशू करती है तो कंपनी को इशू के लिए फेयर मार्केट वैल्यू से जितनी ज्यादा रकम मिलेगी, उसे दूसरे सोर्स से हासिल इनकम माना जाएगी और उसी हिसाब से टैक्स लगेगा।

स्टार्टअप्स को लगातार सात असेसमेंट ईयर में तीन में इनकम टैक्स बेनेफिट ले सकते हैं। इन कंसेशंस का फायदा उठाने के लिए स्टार्टअप्स को आठ मेंबर वाले इंटर मिनिस्ट्रियल बोर्ड ऑफ सर्टिफिकेशन से संपर्क करना होगा।

मिनिस्ट्री के बयान के मुताबिक, ‘डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन (DIPP) ने गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके जरिए इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत स्टार्टअप्स को मुहैया किए जाने वाले इंसेंटिव्स का दावा करने के वास्ते एप्लिकेशन देने के लिए इंटर मिनिस्ट्रियल बोर्ड पर आधारित बोर्ड का गठन किया गया है।’

1 अप्रैल 2016 को या उसके बाद प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप के तौर पर शुरू की गई स्टार्टअप टैक्स कंसेशन लेने की हकदार होगी। मिनिस्ट्री ने कहा है कि इनकम टैक्स एक्ट के तहत मिलने वाले एग्जेम्पशन के बाबत स्टार्टअप्स की अहम मांगों के मद्देनजर ये संशोधन किए गए हैं। हाल में स्टार्टअप्स ने एंजल टैक्स प्रोविजन को लेकर होने वाली कई समस्याओं से सरकार को अवगत कराया था। उनका कहना था कि ये प्रोविजंस उनके लिए फायदेमंद नहीं हैं।

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