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1.67 लाख इंजीनियरिंग सीटें हुईं कम, 5 साल में सबसे नीचे

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नई दिल्ली

एक समय था जब इंजीनियरिंग पढ़ने वाले छात्रों की संख्या काफी ज्यादा थी. वहीं अब ताजा आंकड़ों के अनुसार इंजीनियरिंग में एडमिशन लेने वाले छात्रों की संख्या में कमी आई है. कमी की वजह छात्रों की दिलचस्पी बताई जा रही है, जो धीरे-धीरे इंजीनियरिंग में खत्म हो रही है. इसी वजह से कई कॉलेज बंद हो गए हैं और कई कॉलेज बंद होने के आसार हैं.

ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्न‍िकल एजुकेशन (AICTE) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल इंजीनियरिंग में एडमिशन लेने वालों की संख्या में इन पांच सालों में सबसे तेजी से गिरावट देखी गई है. वेबसाइट द इंडियन एक्सप्रेस ने एआईसीटीई की ओर से बताया है कि साल 2017-18 में देश भर में इंजीनियरिंग की 1.67 लाख सीटें कम हुई हैं. पिछले साल के अनुसार यह गिरावट दोगुनी है. पिछले साल अंडरग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन इंजीनियरिंग में 16.62 लाख सीटें थी, और 2016-17 में 17.5 लाख सीटें थीं.

आपको बता दें, साल 2012- 2013 से इंजीनियरिंग में एडमिशन लेने वाले छात्रों की संख्या में करीब 1.86 लाख की कमी आई है. जिसके बाद साल 2016 से पाया गया कि हर साल इंजीनियरिंग में एडमिशन लेने वाले छात्रों की संख्या में लगातार कमी आ रही है. वहीं एआईसीटीई के मुताबिक, हर साल करीब 75,000 छात्र कम हो रहे हैं. साल 2016-17 में बीई/ बीटेक की 51 फीसदी सीटें 3291 कॉलेज में खाली रह गईं थी.

इंजीनियरिंग सीटों की गिरावाट लगातर बढ़ रही है. आपको बता दें, अब कई कॉलेजों ने एआईसीटीई से संपर्क कर बीटेक और एमटेक सीटों को कम करने का अनुरोध किया है. वहीं सीट कम होने की बड़ी वजह 755 कॉलेज को बताया जा रहा है जिनके पास करीब 92,553 सीटें हैं. इन कॉलेजों ने एआईसीटीई से सीट में कमी और कुछ इंजीनियरिंग ब्रांच को पूरा बंद करने की मांग की है.

एआईसीटीई अभी 83 इंजीनियरिंग कॉलेज को बंद करने के लिए सहमत हो गई. इन कॉलेज के बंद हो जाने के बाद 24,290 सीटें कम हो जाएगी. दूसरी ओर लगभग 53 संस्थानों को दंडित किया गया है. जिसकी वजह से 17,907 सीेटें कम हो गई हैं. एआईसीटीई के सूत्रों के मुताबिक, इंजीनियरिंग सीटों में ये गिरावट पिछले कुछ सालों से कॉलेजों में कम एडमिशन की वजह से बताया जा रहा है. वहीं इजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन न लेने की सबसे बड़ी वजह छात्रों को इस क्षेत्र में नौकरी न मिलना बताया गया है.

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