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और साहब जीएम बनतेे-बनते रह गये

भोपाल

छोटी सी गलती कितनी बड़ी परेशानी का सबब बन जाती है इसको भेल के सभी अफसर जानते हैं लेकिन थोड़े से लाभ-शुभ के चलते बड़ी परेशानी में फंस जाते है। ऐसा ही एक मामला प्रशासनिक स्तर पर काफी चर्चाओं में है। भेल के एक अफसर की एक मामले में पर लंबे समय तक सीबीआई की जांच चलती रही, फिर सीबीआई की अनुशंसा पर प्रबध्ंान ने मेजर पैनाल्टी दे डाली, यहां तक की भेल की विजिलेंस ने भी इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। जब यह फाइल दिल्ली सीवीओ पहुंची तो उन्होंने इस फाइल को फिर से खोल डाली। चर्चा है कि साहब इस बार इस जांच के चलते महाप्रबध्ंाक बनते-बनते रह गये। यह 6 साल से इस मामले के चलते प्रमोशन नहीं पा सके, और जो पाये गये वह बड़े साहब की मेहरबानी से। इधर चर्चा है कि स्वीचगियर विभाग में कॉपर कांड थमने का नाम नहीं ले रहा है तो दूसरी और लोहे की रॉड पर कॉपर पॉलिस का मामला भी काफी चर्चाओं में है यहां तक कि सीआईएसएफ खुद प्रबध्ंान को इस मामले में पत्र पर पत्र लिख रही है। आज भी कॉपर कांड के आरोपियों के बल्ले-बल्ले है। चर्चा है कि एसटीएम विभाग के एक डीजीएम का तबादला इसलिए कर दिया कि उसने कम दर के मटेरियल को महंगे में खरीद डाला। खबर है कि भेल के एक सिविल ऑफिस में काम कर रहे सुपरवाइजर को एक ठेकेदार ने वीआईपी कुर्सी भेंट कर डाली।

इंटर यूनिट ट्रांसफर की चर्चाएं गर्म

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड(भेल) महारत् न कंपनी में इंटर यूनिट ट्रांसफर की खबर से खलबली मची हुई है। यह ट्रांसफर कब होंगे यह तो कार्पोरेट प्रबंधन ही जाने, लेकिन इससे कुछ अफसरों की नींद हराम है। खबर है कि भेल की तीन ईडी वी रविन्द्रन, राजीव मेहरा और एमके शर्मा रिटायर होने वाले हैं। इनकी की जगह भरना कार्पोरेट के लिए जरूरी हो गया है। दूसरी और डायरेक्टर पॉवर भी सितंबर में रिटायर होंगे। इसके लिए ईडी मनोज वर्मा, सी आनंदा, कमलेश यादव, सी मूर्ति, अनिल कपूर और पीपी यादव में से किसी एक का डायरेक्टर बनना लगभग तय है। इधर हरिद्वार के ईडी राजीव मेहरा की जगह जेपी सिंह और एसएसबीजी के ईडी रविन्द्रन की जगह शकील ले सकते हैं। ईडी एमके शर्मा की जगह नये ईडी की तलाश जारी है। यह कहा जाने लगा है कि महाप्रबंधक रहते राजीव सिंह और टीके बागची का तबादला होगा या जीएमआई बनाकर। चर्चा यह भी है कि भोपाल यूनिट में बड़े पदों पर रहकर कुछ अफसर अपने मनमर्जी का काम कर रहे हैं। इसकी रिपोर्ट कार्पोरेट और सीवीओ तक पहुंच चुकी है। ऐसे में कहीं इन अफसरों का नाम भी इंटर यूनिट ट्रांसफर में न जुड़ जाये। चर्चा है कि फिलहाल कुछ अफसरों को केन्द्र सरकार द्वारा रिटायरमेंट की उम्र 62 साल किये जाने का बेसब्री से इंतजार है।

पहली बार बने एचआर के जीएम

भेल भोपाल यूनिट में पहली बार एचआर विभाग से महाप्रबंधक मानव संसाधन बनाया गया है। इसके पहले या तो अन्य विभाग से लाकर जीएम सौंपा गया या फिर डबल चार्ज वाले को इस विभाग का मुखिया बनाया गया। यदि एमसी प्रसाद और आरएसवी प्रसाद को छोड़ दे तो योगेन्द्र पाठक, डीडी वर्मा, आरके गिरदोनिया, एसके चतुर्वेदी, पवन कुमार गोयल, गिरीश श्रीवास्तव, टीजी चौरागड़े, मनोज वर्मा, एमएस किनरा ऐसे एचआर के हेड रहे हैं जो किसी अन्य विभाग के स्पेशलिस्ट माने जाते थे। लंबे समय बाद भेल के मुखिया डीके ठाकुर ने अपनी मनपसंद के एजीएम को महाप्रबंधक मानव संसाधन बनाकर बिठाया है। इसको लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। यूं तो श्री ईसादोर इस विभाग के काफी जानकार हैं लेकिन कस्तूरबा अस्पताल, टाउनशिप और यूनियन नेताओं की समस्याएं सुरसा की तरह मुंह फाड़े खड़ी है। यह इनके लिए एक बड़ी चुनौती है इधर नेतागिरी की आड़ में सीआईएसएफ व विजिलेंस के कोटे में पास बनवाकर बाहर घूम रहे नेता भी किसी से कम नहीं हैं। कारखाने और टाउनशिप में भी कुछ नेता व कर्मचारी अपना प्रभाव दिखाकर खुलकर बाहर घूम रहे हैं। इससे भेल को हर माह लाखों का चूना लग रहा है। लोग कहने लगे हैं कि एचआर साहब को अपने अनुभव का डंडा घुमाना ही पड़ेगा, तब कही जाकर यह लोग अनुशासन का पाठ सीख पायेंगे।

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