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टीआरएम में फिर वापसी

भोपाल

एक नेता के चहेते ठेका श्रमिकों की दादागिरी के चलते प्रबंधन ने उन्हें काम से हटा दिया था। दादागिरी भी ऐसी कि डिप्टी मैनेजर संजय कुमार, इंजीनियर डीके चौधरी और एक ठेकादार को मानसिक रूप से प्रताडि़त होना पड़ा। इसमें नेताजी के रिश्तेदार भी शामिल थे। जब टीआरएम इन्शूलेशन में दोबारा नये ठेके हुए तो वही पुराने ठेका श्रमिकों के चेहरे दिखाई देने लगे। इससे विभाग में पुरानी घटना की याद ताजा हो गई। विभाग के अफसर खुद इन चेहरों को देखकर डरे हुए हैं। खबर तो यह है कि नेताजी के रिश्तेदार फिलहाल बाहर कर दिये गये हैं। इधर चर्चा तो यह भी है कि भेल प्रबंधन जिन कॉन्ट्रक्टरों को प्रेस टेंडर के माध्यम से काम दे रहा है उनमें भी गिने चुने चहेते कॉन्ट्रक्टरों को ही काम मिल पा रहा है। इसके पीछे कारण बताया जा रहा है कि टेंडर की शर्तें ही चहेते ठेकेदारों की मनमर्जी की होती है ताकि नये ठेकेदारों को काम करने का मौका ही नहीं मिल सके।

और इंटक के राष्ट्रीय कार्यकारिणाी में …

इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्र्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक धमाकेदार रही। भोपाल से जहां इंटक के प्रदेश अध्यक्ष ने इस बैठक में भाग लिया वहीं विरोधी गुट को भी इस बैठक में राष्ट्रीय नेताओं ने न केवल विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में बुलाया गया बल्कि एक युवा नेता को तो मंच पर बोलने का मौका तक दे डाला। यही नहीं चार युवाओं को तो राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी। इसको लेकर भोपाल यूनिट में चर्चाओं का बाजार गर्म है। चर्चा है कि इस बार कहीं इंटक के दो फाड़ न हो जाये। केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति ने यह प्रस्ताव भी पास कर डाला कि मप्र, दिल्ली और पंजाब में प्रदेश स्तर पर बदलाव होंगे। मजेदार बात यह है कि जो प्रतिनिधि भेल इंटक से नाराज मो. साहिद, केके नेमा, विजेन्द्र पाटिल और सतेन्द्र शर्मा को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बुलाना आश्चर्य से देखा जा रहा है। इस बात के संकेत भी मिलने लगे है कि कहीं एक और नई इंटक के गठन की तैयारी तो नहीं या राष्ट्रीय अध्यक्ष युवाओं को मौका देने के पक्ष में हैं। इस बैठक को लेकर पूरे भेल में चर्चाओं का बाजार गर्म है। अब देखना यह है कि प्रतिनिधि यूनियन के रूप में काम कर रही इंटक बनी रहेगी या फिर इसके दो फाड़ होंगे। इधर भेल की एक और यूनियन में भी रिटायर नेता को हटाने की तैयारी भीतर ही भीतर शुरू हो गई हैं।

सुपरवाइजर और आर्टिजनों में घमासान

भेल कारखाने के स्वीचगियर विभाग के टेस्टिंग विभाग में कार्यरत एक हाल ही प्रमोट हुए एक सुपरवाइजर और 11 आर्टिजनों में घमासान मचा हुआ है। दरअसल यह सुपरवाइजर न केवल इन आर्टिजनों को दादागिरी दिखा रहे हैं बल्कि उनको जाति सूचक शब्दों का प्रयोग कर परेशान किये हुए है। यूं तो यह इस विभाग के अधिकारियों को चहेते सुपरवाइजर माने जाते हैं इसलिए आर्टिजनों द्वारा की गई शिकायत पर कोई असर ही नहीं होता। जब सुपरवाइजर द्वारा परेशान किये जाने की हदें पार हो गई तब इसकी शिकायत नये महाप्रबंधक मानव संसाधन और एससी आयोग में की गई है। यही नहीं एक यूनियन के नेता तो अपर महाप्रबध्ंाक एचआर से कार्यवाही किये जाने के लिए अड़े हुए हैं। यदि स्थानीय प्रबंधन कार्यवाही नहीं करता है तो अब एससी वर्ग के 11 आर्टिजन संयुक्त रूप से ऊपर तक कार्यवाही का मन बना चुके हैं।

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