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आईटी विभाग में एक सप्लायर की दो कंपनी

भोपाल

भेल कारखाने के प्रशासनिक भवन के आईटी विभाग के एक पूर्व अपर महाप्रबध्ंाक को भले ही महाप्रबध्ंाक बनाकर यूनिट से बाहर भेज दिया हो लेकिन उनके कार्यकाल में एक सप्लायर की दो कंपनियों को मालामाल करने की चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही। मामला तब प्रकाश में आया जब कुछ समय पहले विभाग में कर्मचारियों को डेस्कटॉप बांटे गये। इनकी शिकायत है कि यह डेस्कटॉप 2015 में एक कंपनी से बुलाये गये थे और तीन साल तक इनके मैनटेनेंस का काम इसी कंपनी को सौंपा गया। मजेदार बात यह है कि इसी सप्लायर की दूसरी कंपनी को 2015 में फिर से सप्लाई और मैनटेनेंस का काम दे दिया गया।

तीन साल से आईटी विभाग में पड़े डेस्कटॉप को 2018 में कर्मचारियों को बांट दिये गये। दोनों ही कंपनियां मैनटेनेंस का काम आज भी कर रही हैं। जो कंपनी को 2011 में काम दिया था और 2015 में काम खत्म हो रहा था उसे तीन साल का एक्टेंनशन दे दिया गया। खबर है कि इन डेस्कटॉप की यूपीएस की बैटरी के अलावा अन्य सामान भी खराब होने से काम करने में दिक्कतें आ रही हंै। इससे भेल को लाखों का चूना लग रहा है। आईटी विभाग के एजीएम तो यूनिट से बाहर चले गये लेकिन कर्मचारियों को अपने चंद फायदे के लिए खराब डेस्कटॉप थमा गये। अब विभाग के मुखिया इस मामले की क्या पड़ताल करते हैं यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा।

स्वीचगियर के एससी कर्मचारी आयोग जायेंगे

भेल कारखाने के स्वीचगियर विभाग के टेस्टिंग विभाग में कार्यरत एक हाल ही प्रमोट हुए एक सुपरवाइजर और एससी आर्टिजनों में घमासान मचा हुआ है। दरअसल यह सुपरवाइजर साहब विभाग के अपर महाप्रबंधक व महाप्रबंधक के मुंह लगे होने से मनमानी करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। शुरू से ही इस विभाग में इनका बोलबाला रहा है। विभाग के एससी वर्ग के कर्मचारियों को जाति सूचक शब्दों का प्रयोग कर परेशान किये हुए है। जब सुपरवाइजर द्वारा परेशान किये जाने की हदें पार हो गई तब इसकी शिकायत नये महाप्रबंधक मानव संसाधन और भेल के इंटरनल एससी आयोग में की गई है। इसके बाद भी सुपरवाइजर पर कार्यवाही नहीं की गई तो मप्र एससी आयोग जायेंगे। खबर है कि सुपरवाइजर के खिलाफ एससी वर्ग के कर्मचारी लामबंद होकर विभाग से हटाने की मांग पर अड़े हुए हैं। इसको लेकर चार नंबर ब्लॉक में कभी भी टूल डाउन की स्थिति निर्मित हो सकती है। इधर टीसीबी विभाग में भी तेल के खेल की चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। दरअसल ट्रांसफार्मर का ऑइल के एक 210 लीटर के ड्रम को जब विभाग के ही एक आर्टिजन ने रॉड़ डालकर चेक किया तब पता चला कि हर ड्रम में ऑइल कम है। कॉपर की तरह ही ऑइल सप्लाई करने वाली भी गुजरात की ही एक कंपनी बताई जा रही है। अब भेल के मुखिया इस मामले की जांच क रायेंगे तभी पता चल पायेगा कि ड्रम के अंदर कितना ऑइल कम है।

भूमि पूजन और सम्मान समारोह की होड़

इन दिनों गोविन्दपुरा विधान सभा क्षेत्र में मिशन 2018 को देखते हुए भूमि पूजन और सम्मान समारोह आयोजन की होड़ सी लगी हुई है।  एक तरफ महापौर तो दूसरी और पूर्व महापौर किसी से कम नहीं दिख रहे हैं। जहां महापौर ने ग्रीन भोपाल का सहारा लेकर इस क्षेत्र में जगह-जगह सम्मान समारोह के माध्यम से मिशन 2018 के लिए टिकट की दावेदारी के संकेत दिये है तो दूसरी और पूर्व महापौर ने इस क्षेत्र में भूमि पूजनों की झड़ी सी लगा दी है। साथ ही भोपाल के पुजारियों के सम्मान के कार्यक्रम में कमी नहीं रखी। रही बात विधायक जी की तो वह एक सिरे से इस क्षेत्र की दर्जनों कॉलोनियों में जनता की समस्याएं जानने में पीछे दिखाई नहीं दे रहे हैं। यह सब इतनी तेजी से हो रहा है कि दो धड़ों में बंटे पार्टी कार्यकर्ता कहां जाये कहां न जाये को लेकर असमंजस की स्थिति में है। फिलहाल इस बार मिशन 2018 गुटबाजी के चलते कार्यकर्ताओं के लिए परेशानी भरे हैं।

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