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क्यों लेट होती हैं ट्रेनें, CAG ने लगाई फटकार फिर बताई असली वजह

पिछले कुछ सालों से ट्रेनों की लेटलतीफी की शिकायत आम हो गई है. अक्सर ट्रेनें या लेट से खुलती हैं या फिर अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचते-पहुंचते घंटों लेट हो जाती हैं. सरकार की ओर से इसके पीछे सुरक्षा समेत कई तर्क दिए गए. लेकिन मंगलवार को संसद में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट पेश की गई जिसमें लेट की लेटलतीफी के कई कारण बताए गए.

CAG ने ट्रेनों की टाइमिंग ठीक करने की बजाय केवल यात्रियों की सुविधाओं पर ध्यान देने के लिए रेलवे को फटकार लगाई. रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टेशनों के डेवलपमेंट और रीडेवलपमेंट के प्लान के तहत स्टेशनों में यात्रियों की सुविधा का ख्याल रखा गया है. लेकिन ट्रैफिक को सही रखने के लिए ट्रैक बनाने और उसके लिहाज से इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर जोर नहीं दिया गया.

सीएजी रिपोर्ट की मानें तो रेलवे ने ट्रेनों की लेटलतीफी का कारण छोटे प्लेटफॉर्म और उनकी कमी बताया है. जबकि इसे दूर करने के लिए रेलवे को प्लान बनाने के लिए कहा है.दरअसल समयबद्धता के पैमाने पर वित्त वर्ष 2017-18 रेलवे के लिए खराब सालों में से एक रहा है. आधिकारिक डेटा के मुताबिक इस वित्त वर्ष 30 फीसद ट्रेनें लेटलतीफी रहीं. CAG के मुताबिक सरकार के एक लाख करोड़ रुपये की पुनर्विकास योजनाओं में कुछ गंभीर त्रुटियां हैं. स्टेशनों पर ट्रेनों के लिए पर्याप्त जगह का न होना इनकी देरी का प्रमुख कारण होता है.

लेटलतीफी की जांच के दौरान सीएजी ने 15 स्टेशनों पर ट्रेनों का निरीक्षण किया. जिसमें पाया कि इन स्टेशनों पर प्रतिदिन हैंडल करने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ रही हैं. लेकिन ट्रेनों की संख्या में वृद्धि के अनुसार स्टेशनों पर प्लेटफार्मों, वॉशिंग पिट लाइनों और स्थिर लाइनों जैसे बुनियादी ढांचे को नहीं बढ़ाया गया.

कैग की रिपोर्ट के अनुसार इन 15 स्टेशनों पर मार्च 2017 तक 2,436 ट्रेनें की आवाजाही हुईं. जिनमें से 638 ट्रेनों में 24 से ज्यादा कोच थे. कैग ने कहा कि ऐसी ट्रेनों को लंबे प्लेटफॉर्म की जरूरत होती है.

कैग ने स्टेशन के आउटर पर ट्रेनों को रोकने को लेकर भी रेलवे की खिंचाई की. कैग ने कहा कि रेलवे स्टेशनों पर प्लेटफॉर्मों की कमी भी ट्रेनों को आउटर पर रोकने के बड़ा कारण है और इस वजह से ट्रेनें खासकर लेट हो जाती हैं.

रेलवे को दिए अपने सुझावों में कैग ने कहा कि सभी जोनल रेलवे को ज्यादा पैसेंजर ट्रैफिक से निपटने के लिए एक मास्टर प्लान बनाना होगा. साथ ही स्टेशनों के आधुनिकीकरण से पहले स्टेशनों पर अतिरिक्त प्लेटफॉर्म बनाकर उसे बढ़ाया जाना चाहिए. (Photo: getty)

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