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‘बूढ़ी आबादी’ से परेशान चीन, चाहता है अब ज्यादा बच्चे पैदा करें लोग

चीन को 1979 में लागू की गई ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ अब भारी पड़ रही है. चीन ने अपनी बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण करने के लिए ‘वन चाइल्ड’ की पॉलिसी लागू की थी. 2015 तक ‘वन चाइल्ड’ की पॉलिसी चलती रही लेकिन फिर इस नियम में कुछ ढील देते हुए दो बच्चे पैदा करने की छूट दी गई.

चीन के एक सरकारी अखबार में छपे एक संपादकीय लेख में कहा गया कि बच्चे पैदा करना पारिवारिक मामला है लेकिन एक राष्ट्रीय मामला भी है. इस लेख में कपल्स को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है. इसके साथ ही युवाओं को परिवार शुरू करने के लिए सक्षम बनाने के लिए सरकार की तरफ से कदम उठाए जाने की अपील की गई है.चीन की सरकार के मुखपत्र पीपल्स डेली में छपे लेख में चेतावनी देते हुए कहा है कि निम्न प्रजनन दर का अर्थव्यवस्था और समाज पर नकारात्मक असर दिखना शुरू हो गया है.

बूढ़ी आबादी की समस्या से निपटने के लिए चीन की सरकार ने ‘दो बच्चों की नीति’ से पीछे हटने के संकेत भी दिए हैं और बच्चे पैदा करने को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों में भी ढील देने की सोच रही है.हाल ही में सरकार ने एक पोस्टेज स्टैम्प जारी किया है जिसमें सुअर के 3 बच्चे दिखाई दे रहे हैं. इसे भी इस बात के संकेत के तौर पर लिया जा रहा है कि चीन बच्चों की संख्या को लेकर लगाए प्रतिबंध को हटा सकता है.

यह स्टैम्प आने वाले पिग ईयर के लिए जारी किया गया है. 2016 में मंकी ईयर पर बंदर और उनके साथ दो बच्चे के चित्र वाले स्टैम्प जारी किए गए थे. इस स्टैम्प के जारी होने के बाद चीन की सरकार ने वन चाइल्ड की पॉलिसी को छोड़कर टू चाइल्ड पॉलिसी की घोषणा की थी.बीजिंग ने अपनी विवादित वन चाइल्ड पॉलिसी को काफी समय तक बनाए रखा. इस नीति के तहत अगर कोई दंपती दूसरा बच्चा पैदा करने की कोशिश करता था तो उस पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान था. हालांकि चीन की इस नीति का बुरा असर जल्द दिखने लगा.

चीन में बुजुर्ग आबादी बढ़ती जा रही है, घटती जन्म दर की वजह से आने वाले वक्त में चीन की विकास की गाड़ी भी पटरी से उतर सकती है. बड़ी आबादी वाले चीन में अधिकारियों ने पहले तो वन चाइल्ड की नीति का बचाव किया. अधिकारियों का दावा था कि इस नीति के लागू होने से करीब 40 करोड़ बर्थ कम करने में मदद मिली. इस दौरान चीन ने अपने जनसांख्यकीय का भी भरपूर फायदा उठाया क्योंकि चीन दुनिया भर की इंडस्ट्रीज को सस्ता लेबर उपलब्ध कराने में सक्षम था लेकिन अब चीन में श्रमिक आबादी घटती जा रही है.चीन की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, 2016 में चीन की कुल आबादी 134.7 करोड़ थी और 2017 में इसकी जनसंख्या बढ़कर 139 करोड़ हो गई.

80 और 90 के दशक में ओल्ड डिपेंडेंसी रेशियो (कामगार आबादी पर निर्भर बुजुर्ग आबादी का अनुपात) 8.3 था. अब यह 15.9 है. इससे चीन के कामगार युवाओं पर बोझ बढ़ा है. इसके अलावा चीन की सरकार पर अपने वृद्ध नागरिकों के लिए पेंशन स्कीम्स और हेल्थ केयर स्कीम चलाने का दबाव भी बढ़ा है.

इन सभी फैक्टरों को चीन की वन चाइल्ड पॉलिसी के दौरान की पीढ़ी पर बढ़ते बोझ की तरह भी देखा जा रहा है, वह पीढ़ी जिनके कोई भाई-बहन नहीं है. जब ये पीढ़ी बड़ी हो जाएगी तो उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि उन्हें ना केवल अपने माता-पिता बल्कि अपने 4 दादा-दादी की भी देखभाल करनी होगी. चीनी समाजशास्त्रियों ने इसे 4-2-1 की पारिवारिक संरचना कहा है. उनका कहना है कि इससे लंबे समय में व्यक्ति की परचेसिंग पावर बिल्कुल कम हो जाएगी.

यूएन के मुताबिक, 20 वर्षों में चीन में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या का अनुपात दोगुना हो जाएगा जो 2017-2037 के बीच 10-20 फीसदी है. यूएन का अनुमान है कि चीन में 2050 तक करीब 30 फीसदी से ज्यादा लोग 60 साल की उम्र से ज्यादा के होंगे.

कम जन्म दर के साथ-साथ चीन के सामने यह भी समस्या है कि कई लोग बच्चे पैदा ही नहीं करना चाह रहे हैं. चीन में फिलहाल फर्टिलिटी रेट 1.57 प्रति महिला है जो चीन की मृत्यु दर को भरने के लिए पर्याप्त नहीं है. मृत्यु दर को देखते हुए चीन में फर्टिलिटी रेट 2.1 प्रति महिला होना चाहिए.

2016 में चीन की सरकार ने वन चाइल्ड पॉलिसी को छोड़ते हुए दो बच्चों की नीति अपनाई थी. उस वर्ष तो जन्म दर बढ़ी लेकिन अगले साल फिर से कम हो गई. 2016 में जहां 178.6 लाख जन्म हुए वहीं 2017 में 172.3 लाख पहुंच गई. चीन के नागरिकों के लिए एक बच्चे की मानसिकता से निकलना मुश्किल काम हो गया.

ज्यादा बच्चे पैदा करने में चीनी दंपतियों की इस झिझक के लिए शहरों में बच्चों की परवरिश पर बढ़ते खर्च को दोषी ठहराया गया. विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को सब्सिडीज और टैक्स ब्रेक्स जैसे कदम उठाने चाहिए.

कुछ शहरों और प्रांतों ने लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए नीतियां बनाना शुरू कर दिया है. पिछले महीने लियानिंग प्रांत ने दो बच्चों वाले परिवार को भत्ते देने की घोषणा की. जुलाई में जारी किए गए जनसंख्या विकास योजना (2016-30) में कहा गया है कि प्रांतीय सरकार 4 सदस्यों वाले परिवार को अतिरिक्त भत्ते देगी.

पिछले महीने चीन की शीर्ष अदालत तलाक ले रहे दंपतियों के लिए तीन महीने का ‘काम डाउन पीरियड’ का प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है ताकि वे अपने फैसले पर फिर से विचार कर सकें. प्रांतीय सरकारें शादी करने वाले दंपतियों को कैश सब्सिडीज भी दे रही हैं.

हालांकि कुछ लोगों को यह भी डर है कि ज्यादा बच्चे पैदा करने का दबाव महिलाओं पर नकारात्मक असर डाल सकता है. महिलाएं पहले से ही नौकरी में कई तरह की मुश्किलों का सामना कर रही हैं. जॉब सर्च वेबसाइट 51job.com के एक सर्वे के मुताबिक, 75 फीसदी कंपनियां टू चाइल्ड पॉलिसी के आने से महिलाओं को हायर करने की इच्छुक नहीं हैं. कई विज्ञापनों में महिलाओं से यह जानकारी मांगी गई कि उनके पहले से बच्चे हैं या नहीं ताकि मैटरनिटी कॉस्ट देने से बचा जा सके.

अब एंप्लायार बिना संतान वाली महिलाओं को हायर करने में और हिचकेंगे. उनकी यही सोच होगी कि अब वे एंप्लायमेंट के दौरान दो बार मैटरनिटी लीव ले सकेंगी जिससे कंपनी को नुकसान होगा.

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