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भारतीय कोच होने से अब संवाद की बाधा खत्म हो गई: सरदार सिंह

नई दिल्ली

भारतीय हॉकी टीम के वरिष्ठ खिलाड़ियों सरदार सिंह और मनप्रीत सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय टीम का मुख्य कोच भारतीय होने से अब संवाद को लेकर कोई बाधा पैदा नहीं होती है तथा रणनीतिक तौर पर हरेंद्र सिंह किसी विदेशी कोच से कम नहीं हैं।

हरेंद्र को मई में हॉकी टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया था। उनके रहते हुए भारतीय टीम पिछले महीने चैंपियन्स ट्रोफी में लगातार दूसरे साल उप विजेता रही थी। सरदार ने कहा, ‘मुझे अब भी याद है कि हरेंद्र पाजी ने 15-16 साल पहले मुझे राष्ट्रीय शिविर में बुलाया था। हम लंबे समय से एक दूसरे को जानते हैं। जब वह 2009 में जोस ब्रासा के साथ सहायक कोच थे तब भी मैं उनके मातहत खेला था।’

उन्होंने कहा, ‘एक भारतीय कोच के साथ काम करना अलग तरह का अहसास है। हम उनके साथ कुछ भी चर्चा कर सकते हैं। वह हमें खुलकर सलाह देते हैं और जानते हैं कि सीनियर खिलाड़ी होने के कारण हम अपना खेल पूरी तरह से नहीं बदल सकते हैं।’

अभ्यास के दौरान बात समझाने के लिए कोच के पास समय होता है लेकिन विदेशी कोच की दो क्वॉर्टर के बीच दो मिनट के ब्रेक के दौरान सलाह को समझना मुश्किल होता है। यहां पर हरेंद्र ने बड़ा अंतर पैदा किया। सरदार ने कहा, ‘अगर आप देखोगे तो उन्होंने महिला टीम और जूनियर टीम के साथ भी अच्छे परिणाम दिए हैं। जूनियर टीम ने विश्व कप उनके रहते हुए ही जीता। उन्होंने सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षकों के साथ काम किया है। उनके आने से सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू यह रहा कि अब हिन्दी में बातचीत करते हैं।’

उन्होंने कहा, ‘विदेशी कोच के साथ अगर आप दो मिनट के ब्रेक के दौरान कोई एक पॉइंट भूल जाओ तो यह खिलाड़ियों के दिमाग में भ्रम पैदा कर सकता है। कोच बाहर से खेल का आकलन कर रहे होते हैं कि और वह अपनी भाषा में आपको सही तरह से समझा सकता है। आपके पास समय कम होता है और इसलिए ऐसी भाषा जिसे सभी समझते हैं से काफी मदद मिली।’

सरदार के साथी मनप्रीत ने भी उनका समर्थन किया। मनप्रीत ने कहा, ‘जब भी नया कोच आता है तो उसे यह सुनिश्चित करना होता है कि हम खेल की अपनी शैली नहीं बदलें। हमारी ताकत आक्रमण और जवाबी हमला करना है। हरेंद्र पाजी जानते हैं कि कैसे एसवी सुनील और आकाशदीप जैसे तेजतर्रार फॉरवर्ड का कैसे उपयोग किया जाए।’ उन्होंने कहा, ‘वह बेहद सकारात्मक व्यक्ति हैं। वह कम समय में सही चीजें कहते हैं। उन्होंने बेहतरीन प्रशिक्षकों के साथ काम किया है लेकिन अब भी कहते हैं कि वह सीख रहे हैं।

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