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राफेल मामले में हमलावर होकर ‘बोफोर्स का दाग’ धोएगी कांग्रेस

नई दिल्ली

राफेल फाइटर जेट डील के मुद्दे पर कांग्रेस मोदी सरकार को बख्शने के मूड में बिल्कुल नहीं है। पिछले कुछ अर्से से इस मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरती आ रही कांग्रेस ने मॉनसून सत्र के समापन तक अपने तेवर तीखे कर लिए। इसलिए सत्र के अंत तक आते-आते कांग्रेस इस मुद्दे पर जेपीसी की मांग उठाने लगी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इसे देश का अबतक का सबसे बड़ा रक्षा घोटाला बता रहे हैं। वह लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘राफेल लड़ाकू विमान सौदे को देश का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा घोटाला है। राफेल विमानों का दाम 540 करोड़ रुपये प्रति विमान से जादुई तरीके से बढ़कर 1600 करोड़ रुपये हो गया।’

सत्र के आखिरी दिन संसद में गांधी प्रतिमा के सामने कांग्रेस का प्रदर्शन
मॉनसून सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस ने गांधी प्रतिमा के सामने राफेल डील के मुद्दे को लेकर जिस तरह से प्रदर्शन किया और उसमें यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी भी उतरती दिखाई दीं, उससे साफ है कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सिलसिलेवार ढंग से लोगों के बीच ले जाने की तैयारी में है। दरअसल, कांग्रेस राफेल मुद्दे को न सिर्फ अपने दामन पर बोफोर्स को लेकर लगे दाग के जवाब के तौर पर देख रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस को लगता है कि यूपीए के भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बनाते हुए जिस तरह से पीएम नरेंद्र मोदी सत्ता में आए, अब उनकी सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राफेल एक बड़ा हथियार साबित हो सकता है।

लड़ाई में अलग-थलग कांग्रेस
हालांकि, संसद सत्र में इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस जहां अकेली पड़ती दिखाई दी, उससे साफ है कि इस मुद्दे पर उसे बाकी दलों से उस तरह का सहयोग नहीं मिल पा रहा, जैसा एक बड़े मुद्दे पर विपक्ष एकजुट होता रहा है।

शुक्रवार को हुए प्रदर्शन में कांग्रेस ने दूसरे दलों को बुलाने की सूचना तो भेजी, लेकिन ज्यादातर दलों ने या तो दूरी बनाई या फिर अगर अपने सदस्य भेजे तो वे काफी जूनियर सदस्य थे। कांग्रेस के इस धरने में विपक्ष का कोई बड़ा चेहरा शामिल नहीं हुआ। विपक्ष की मानें तो यह कहीं न कहीं कांग्रेस की ओर से चूक भी मानी जा रही है कि उसने सही तरह से विपक्ष को अपने साथ खड़े करने की कोशिश नहीं की। वहीं, विपक्ष के एक बड़े नेता ने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस के लिए यह मुद्दा इतना अहम है और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल को लेकर सरकार पर इतने हमलावर दिख रहे हैं तो कांग्रेस ने अपने प्रदर्शन के लिए ऐसा दिन क्यों चुना, जिस दिन वह दिल्ली में नहीं थे।

जमीनी स्तर पर ले जाने की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कांग्रेस सुनियोजित तरीके से इस मुद्दे को असेंबली व अगले आम चुनाव का मुद्दा बनाने में जुटेगी। इसके लिए देशभर में बाकायदा अभियान चलाए जाएंगे। लोगों के बीच इस मुद्दे को लगातार रखा जाएगा। इतना ही नहीं, राफेल को लेकर कांग्रेस की इस सक्रियता के पीछे खुद को लोगों के बीच मोदी सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ी और प्रमुख आवाज के तौर पर पेश करना है। बताया जाता है कि मीडिया में जाने के अलावा सोशल मीडिया पर कैंपेन, रैली और सभाओं में इसे मुद्दे बनाना और इस मुद्दे पर सिलसिलेवार तरीके से लेख निकालना कांग्रेस की रणनीति का अहम हिस्सा है।

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