Home राष्ट्रीय स्कूल रेप केस: बच्ची ने मां को पहले ही बताया था

स्कूल रेप केस: बच्ची ने मां को पहले ही बताया था

नई दिल्ली

एनडीएमसी स्कूल में बच्ची से रेप मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पहचान नहीं बताने की शर्त पर स्कूल स्टाफ से जुड़े एक मेंबर ने बताया कि आरोपी ने वारदात से एक दिन पहले भी बच्ची का हाथ पकड़ा था। उसे साथ ले जाने की कोशिश की थी। तब बच्ची उसका हाथ छुड़ाकर भाग आई थी। यह बात खुद बच्ची की मां ने गुरुवार को उस वक्त बताई, जब वारदात के बाद मां शिकायत करने स्कूल आई थीं।

एक दिन पहले बच्ची ने मां से की थी शिकायत
इस स्टाफ मेंबर का दावा है कि जिस दिन आरोपी ने बच्ची का हाथ पकड़ा था, उस दिन शाम को बच्ची ने अपनी मां को इस बारे में बताया भी था। उन्होंने इसकी शिकायत स्कूल प्रशासन से नहीं की। स्टाफ मेंबर का कहना है कि अगर बच्ची के पैरंट्स एक दिन पहले यानी बुधवार की सुबह ही स्कूल प्रशासन से इसकी शिकायत कर देते, तो शायद उस दिन दोपहर में यह वारदात नहीं होती। स्टाफ मेंबर के मुताबिक, आरोपी शायद 2-3 दिनों से या उससे भी पहले से बच्ची पर नजर रख रहा था। उसे मौका मिलता तो वह एक दिन पहले ही वारदात को अंजाम दे डालता।

आरोपी की नजर थी बच्ची पर
अगले दिन हुई वारदात से यह साफ हो गया कि यह बच्ची उसके टारगेट पर थी। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह वन बेडरूम फ्लैट में अपनी पत्नी और 3 बच्चों के साथ रहता है। बच्चे बड़े हैं। उनकी उम्र 14 से 18 साल के बीच है। स्कूल स्टाफ ने बताया, 2 बजे सीनियर सेक्शन की छुट्टी होती है। उस दौरान टीचर्स और बाकी स्टाफ बच्चों को पैरंट्स और कैब ड्राइवर को हैंडओवर करने में बिजी रहता है। जो अन्य पुरुष वर्कर्स हैं, जैसे माली, सफाई कर्मचारी, पंप ऑपरेटर सभी लंच करने चले जाते हैं। उसी का फायदा उठाकर आरोपी ने वारदात को अंजाम दिया। सूत्रों के मुताबिक, आरोपी एनडीएमसी + का स्थायी कर्मचारी है। 15 साल से काम कर रहा है। पंप ऑपरेटर उसका जानकार है। उसे पता था कि पंप हाउस की चाबी कहां रखी रहती है।

6 महीने में हो फांसी: स्वाति मालीवाल
दिल्ली महिला आयोग ने घटना पर संज्ञान लेते हुए एसएचओ और स्कूल के प्रिंसिपल को नोटिस भेजा है। डीसीडब्ल्यू की अध्यक्ष स्वाति जयहिंद ने कहा कि आज बच्चे स्कूलों के अंदर भी असुरक्षित होते जा रहे हैं। स्कूलों के लिए यह बहुत जरूरी है कि वो बच्चों की सुरक्षा के लिए नियमों का सख्ती से पालन करवाएं। आरोपी को नए कानून के तहत 6 महीने में फांसी होनी चाहिए।

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