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जब CPM ने सोमनाथ चटर्जी को पार्टी से निकाला

नई दिल्ली

देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों में से एक लोकसभा स्पीकर के पद की शोभा बढ़ाने वाले दिग्गज राजनेता सोमनाथ चटर्जी नहीं रहे। सोमवार को 89 साल के इस पूर्व कम्युनिस्ट नेता ने आखिरी सांस ली। वैसे तो सोमनाथ चटर्जी ने अपनी लंबी राजनीतिक पारी में तमाम ख्याति हासिल की, लेकिन लोकसभा स्पीकर का उनका कार्यकाल कुछ खास ही चर्चित रहा। चटर्जी ने बतौर स्पीकर एक ऐसा काम किया जो उनकी पार्टी सीपीएम को नागवार गुजरा और पार्टी ने इस दिग्गज नेता को बाहर का रास्ता दिखा दिया।

कहानी पुरानी है पर ऐसा उदाहरण दूसरा नहीं
सोमनाथ चटर्जी से जुड़ा यह किस्सा तबका है जब वह यूपीए 1 के दौरान लोकसभा स्पीकर थे। 2008 में अमेरिका के साथ न्यूक्लियर डील के मुद्दे पर लेफ्ट पार्टियों ने मनमोहन सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद मनमोहन सरकार को विश्वास मत हासिल करने लिए विशेष सत्र बुलाया गया। सीपीएम चाहती थी कि पार्टी के समर्थन के ऐलान के बाद सोमनाथ चटर्जी भी स्पीकर का पद छोड़ दें।

हालांकि चटर्जी ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। चटर्जी का मानना था कि स्पीकर किसी पार्टी का नहीं होता। सैद्धांतिक रूप से चटर्जी की बात सही भी थी, लेकिन राजनीति का व्यवहारिक कटु पक्ष उनपर भारी पड़ा। सीपीएम पोलित ब्यूरो ने ‘पार्टी हितों को नुकसान पहुंचाने’ का आरोप लगाते हुए बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि इसके बाद चटर्जी ज्यादा दिनों तक सक्रिय राजनीति में नहीं रहे। उन्होंने 2009 में राजनीति से संन्यास का ऐलान कर दिया।

हिंदूवादी पिता का कम्युनिस्ट पुत्र, सुषमा ने भी कसा था तंज
सोमनाथ चटर्जी का जन्म 25 जुलाई 1929 को असम के तेजपुर में हुआ था। उनके पिता निर्मलचंद्र चटर्जी और मां वीणापाणि देवी थीं। मशहूर वकील और कलकत्ता हाई कोर्ट के जज रहे निर्मलचंद्र चटर्जी आजादी से पहले हिंदू महासभा के संस्थापक सदस्य रहे थे। देश के पहले लोकसभा चुनाव में सोमनाथ के पिता अखिल भारतीय हिंदू महासभा के टिकट पर निर्वाचित भी हुए थे।

हालांकि हिंदूवादी पिता के पुत्र सोमनाथ चटर्जी की राजनीति की धारा उलटी बही। सोमनाथ चटर्जी को वामपंथ की राजनीति रास आई। 1968 में वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सदस्य बने और 1971 में पार्टी के टिकट पर पहली बार संसद पहुंचने में कामयाब रहे। सोमनाथ चटर्जी के परिवार के इस खास पहलू पर एक बार सुषमा स्वराज ने तंज भी कसा था।

1990 के दशक में एक बार संसद में बोलते हुए सुषमा ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ‘एक देश-एक संस्कृति’ के विचार पर बोलते हुए सोमनाथ चटर्जी को ही उदाहरण के रूप में पेश कर दिया था। सुषमा ने कहा था कि एक देश और एक संस्कृति का ही परिणाम है कि एक बंगाली निर्मलचंद्र चटर्जी ने अपने बेटे का नाम सोमनाथ रखा। दरअसल सुषमा मशहूर सोमनाथ मंदिर का जिक्र कर रही थीं, जिसे आक्रांता महमूद गजनवी ने गिराया था।

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