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मामला कस्तूरबा की बिल्डिंग शिफ्टिंग का

भोपाल

साल भर से ज्यादा समय से भेल के कस्तूरबा अस्पताल की नई बिल्डिंग का लोकार्पण पूर्व डायरेक्टर मानव संसाधन आर कृष्णन ने किया था। हाल ही में प्रबंधन ने पुरानी बिल्डिंग के वार्डों को आनन-फानन में यूनियनों के दबाव के चलते नई बिल्डिंग में शिफ्ट तो कर दिया लेकिन मूलभूत सुविधाओं को लेकर आज भी चर्चाओं का दौर जारी है। ऐसे में बेचारे मरीजों की फजीहत हो गई। इस नई बिल्डिंग में जहां ऑक्सीजन की कमी है तो नर्सिंग स्टाफ भी न के बराबर है।

रही बात एसी(एयरकंडीशन)और फेन की तो वह भी आधे-अधूरे लगे हैं। चर्चा है कि बिल्डिंग भी कुछ इस स्टाईल की बनाई है कि कुछ कमरों में डबल बेड ही नहीं बन पा रहे हैं। भगवान ही मालिक है इस शिफ्टिंग का, ऐसे में 15 अगस्त को मरीजों को फल वितरण करने की तैयारी भी शुरू हो गई है। आजकल यह भी चर्चा आम हो गई है सभी यूनिटों के लिए खरीदी गई लाखों टेबलेट (गोली)एक्सपाईरी डेट की बांटी जा रही है। दबी जबान से कस्तूरबा के कर्मचारी खुद इस बात से परेशान हैं और इसकी उच्चस्तरीय जांच कराने की बात भी करते नजर आ रहे हैं।

तिमाही में टीसीबी ने मारी बाजी

भेल कार्पोरेट के मुखिया की नजर भोपाल यूनिट के प्रोडक्शन पर लगी हुई है। हों भी क्यों नहीं इसी यूनिट से काफी उम्मीदें लगी हुई हैं। यह अलग बात है कि पिछली तिमाही में कारखाने के 900 करोड़ के टर्न ओवर करने का टारगेट दिया हो और मुखिया ने पूरी ताकत के साथ करीब 750 करोड़ टर्न ओवर पूरा किया। मजेदार बात यह है कि इस तिमाही में इस बार टीसीबी (ट्रांसफार्मर) ने रिकार्ड 182 करोड़ का टर्न ओवर पूरा किया है। वहीं टीपीटीएन दूसरे और हाइड्रो तीसरे नंबर पर रहा है। स्वीचगियर, थर्मल, ईएम और फीडर्स काम में कम भूमिका अदा की है।थर्मल और हाइड्रो की बात करें तो यहां पूरे साल आर्डर न होने का रोना जारी रहेगा। वैसे भी हाइड्रो से जीएम राजीव सिंह के जाने के बाद भेल के मुखिया ने नये जीएम को बिठाने की जरूरत ही नहीं समझी। ईएम ग्रुप में काम बेहतर होने के पीछे जीएम विनय निगम को भुलाया नहीं जा सकता। उनको डब्ल्यू ई विभाग भेजने के बाद काम में कसावट आने से आसार नजर नहीं आ रहे हैं। फिलहाल तो एक जीएम दूसरे जीएम को रिपोर्ट करते दिखाई दे रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर चर्चा है कि चहेतों को मलाईदार विभाग बांट देने से भी काम में तेजी दिखाई नहीं दे रही है।

नये जीएम साहब के सख्त तेवर

भेल में नये जीएम मानव संसाधन विभाग ने सख्त तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। कर्मचारी भी उनके तेवर देख सकते में हैं। दरअसल जब वह इस विभाग में अपर महाप्रबध्ंाक थे तो कर्मचारी उन्हें सीधा समझते थे लेकिन आज उनके तीखे तेवर की बात कर कारखाने को चलाने के लिए सख्ती जरूरी है कहना शुरू कर दिया है। चर्चा है कि नये साहब ने फरमान जारी कर कारखाने में ड्यूटी समय में फालतू घूमने वाले कर्मचारियों की फोटोग्राफी शुरू कर दी है। नये साहब के नये नियम से हड़कंप मचा हुआ है। कर्मचारी सुबह 7.15 बजे के बाद दिखाई दिये तो समझो खैर नहीं। कुछ कर्मचारी नेता सिर्फ इस बात से परेेशान है कि कारखाने में काम कम होने से जायें तो जायें कहां। अब सवाल यह भी उठाने लगे हैं कि जिस हनुमान मंदिर की पूजा-अर्चना से भोपाल यूनिट तेज रफ्तार से दौड़ रही है कम से कम वहां जाने से तो न रोका जाये। भले ही दबी जबान से कर्मचारी एक वर्ग विशेष की चर्चा कर रहा हो लेकिन भीतर ही भीतर इसको लेकर आक्रोश भी व्याप्त है। इसको लेकर वर्गभेद की भावना भी जागना शुरू हो गई है। यदि प्रबंधन ने मंदिर दर्शन गंभीरता से नहीं लिया तो मामला तूल पकड़ सकता है।

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