Home कॉर्पोरेट रुपये की गिरावट से सिकुड़ रहा है भारत का विदेशी मुद्रा भंडार

रुपये की गिरावट से सिकुड़ रहा है भारत का विदेशी मुद्रा भंडार

नई दिल्ली

तुर्की में आर्थिक संकट की आहट के बीच मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में रेकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई। दिनभर के कारोबार में रुपये में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई और यह 70.10 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया। हालांकि दिन का कारोबार खत्म होने पर रुपया डॉलर के मुकाबले 69.90 पर बंद हुआ। एक दिन पहले सोमवार को यह 69.93 पर बंद हुआ था।

तुर्की की मुद्रा लीरा में जबरदस्त गिरावट का दौर जारी है। पिछले एक साल में डॉलर के मुकाबले लीरा की कीमत में 50 प्रतिशत तक की गिरावट हो चुकी है। अमेरिका द्वारा तुर्की से स्टील और ऐल्युमिनियम के आयात पर शुल्क बढ़ाने के बाद पिछले कुछ दिनों से लीरा के मूल्य में तेज गिरावट आई है।

निवेशक इसे वैश्विक व्यापार के लिए बुरी खबर के तौर पर देख रहे हैं। निवेशकों में इस कदर चिंता बढ़ी है कि वे लीरा और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को हटा रहे हैं सुरक्षा के लिए अमेरिकी डॉलर को अपना रहे हैं। अमेरिकी डॉलर की मांग में इजाफा होने की वजह से यह मुद्रा ज्यादातर मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हो रही है। यूरो और पाउंड जैसी मजबूत मुद्राओं के मुकाबले भी अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रही है।

भारत पर असर
डॉलर में मजबूती से रुपया कमजोर हो रहा है। रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह यह है कि भारत एक प्रमुख आयातक देश है, लिहाजा उसे हर साल आयात के लिए और ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ रही है। विदेशी निवेश में भी कमी आ रही है।नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने सोमवार को 971.86 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की। इस साल की शुरुआत से शेयरों में विदेशी निवेश में 35,356 करोड़ रुपये की कमी आई है।

इसके अलावा पिछले 7 महीनों में पहली बार जुलाई में सोने का आयात बढ़ा है, इससे भी राजकोषीय घाटे की स्थिति खराब हुई है रुपया कमजोर हुआ।भारतीय केंद्रीय बैंक आरबीआई रुपये में बहुत ज्यादा गिरावट को रोकने के लिए समय-समय पर डॉलर बेचकर हस्तक्षेप करता है। इसका विदेशी मुद्रा भंडार पर काफी असर पड़ा है, जो अप्रैल के 426 अरब डॉलर के रेकॉर्ड उच्च स्तर से लुढ़ककर अगस्त के शुरुआती हफ्ते में 403 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। रुपये में तेज गिरावट पर सरकार ने कहा है कि चिंता की कोई बात नहीं है। माना जा रहा है कि विदेशी मुद्रा भंडार में 5 से 8 प्रतिशत तक की और गिरावट को बिना किसी चिंता के बर्दाश्त किया जा सकता है।

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