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दक्षिण एशिया को ‘कॉमन फैमिली’ बनाना चाहते थे अटल बिहारी वाजपेयी

लखनऊ

दुनियाभर में भारतीय विदेश नीति का लोहा मनवाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार को दिल्‍ली के एम्‍स अस्‍पताल में निधन हो गया। प्रधानमंत्री बनने से पहले विदेशमंत्री का पदभार संभाल चुके वाजपेयी ने जहां परमाणु परीक्षणों को स्‍वीकृति देकर भारत की ताकत बढ़ाने का काम किया वहीं पड़ोसियों के साथ अच्‍छे रिश्‍ते बनाने पर जोर दिया। दरअसल, पूरे दक्षिण एशिया को वह एक ‘कॉमन फैमिली’ बनाना चाहते थे।

अंतरराष्‍ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ डॉक्‍टर रहीस सिंह ने एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत में कहा कि वाजपेयी का भारत ही नहीं पूरे दक्षिण एशिया में बहुत सम्‍मान था। उन्‍होंने वर्ष 1977 में संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ में हिंदी में भाषण देकर पूरे देश का मान बढ़ाया। वाजपेयी देश को सशक्‍त बनाना चाहते थे, इसलिए उन्‍होंने सत्‍ता में आते ही परमाणु परिक्षणों को अपनी हरी झंडी दिखाई। यही नहीं अमेरिकी प्रतिबंधों का मुकाबला करने के लिए उन्‍होंने एक नायाब तरीका निकाला।

उन्‍होंने बताया कि भारत सरकार ने रिसर्जेंट इंडिया बॉन्‍ड जारी कर विदेशों में रह रहे भारतीयों से अपील की कि वे इसे खरीदें। इस बॉन्‍ड के जरिए भारत सरकार ने 5 अरब डॉलर जुटाए। इसके बाद वाजपेयी अमेरिका को यह समझाने में कामयाब रहे कि भारत ने परमाणु परीक्षण अपने अपनी सुरक्षा के लिए किए हैं न कि किसी देश पर हमला करने के लिए। इससे धीरे-धीरे भारत अमेरिका संबंध सुधरे और अमेरिकी राष्‍ट्रपति बिल क्लिंटन भारत आए।

सिंह ने बताया कि यह वाजपेयी की पहल का ही नतीजा है कि भारत-अमेरिका संबंध आज अपने सबसे अच्‍छे दौर से गुजर रहा है। अटलजी ने पड़ोसियों के साथ रिश्‍ता सुधारने पर भी बहुत जोर दिया। उनका मानना था कि अगर पूरे दक्षिण एशिया को एक कॉमन फैमिली बना दिया जाए तो भारत-पाकिस्‍तान विवाद हमेशा के लिए खत्‍म हो जाएगा। उनका मानना था कि इस कॉमन फैमिली की समान मुद्रा, समान बाजार और समान संस्‍कृति होगी। समान मुद्रा के प्रस्‍ताव पर तो पाकिस्‍तान को छोड़कर बाकी देश सहमत हो गए थे। इसीलिए वाजपेयी ने परवेज मुशर्रफ को भारत का आने न्‍योता दिया था।

उन्‍होंने कहा कि आधुनिक भारतीय विदेश नीति में तीन पड़ाव हैं। पहला-अमेरिका के सामने झुके बिना इंदिरा गांधी का बांग्‍लादेश को आजाद कराना, दूसरा-नरसिंहा राव का उदारीकरण, निजीकरण और ग्‍लोबलाइजेशन की नीति को शुरू करना तथा तीसरा वाजपेयी के नेतृत्‍व में भारत का परमाणु बम विस्‍फोट करना और बाद में अमेरिका के साथ रिश्‍तों का मधुर बनाना है।

डॉक्‍टर सिंह ने बताया कि वाजपेयी ने भारत की विदेश नीति को लोकप्रिय नीति में बदला ताकि आमजन भी उसे समझ सकें। वाजपेयी ने प्रवासी भारतीयों को जोड़ा और उन्‍हें अपनेपन का अहसास कराया। इसका फायदा यह हुआ कि भारतीय समुदाय के लोगों ने अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करने में काफी आर्थिक मदद की। वाजपेयी की इन्‍हीं नीतियों को डॉक्‍टर मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगे बढ़ा रहे हैं।

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