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केरल: बाढ़ से बचाने में मदद कर रहे हैं इसरो के 5 सैटलाइट्स

चेन्नै

केरल में बाढ़ से मची तबाही को रोकने और उससे निपटने के लिए जमीन पर तक हर प्रयास जारी है ही, साथ ही आसमान से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। इंडियन स्पेस रीसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के पांच सैटलाइट्स राहत कार्य में मदद करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। यह जानकारी इसरो से जुड़े एक अधिकारी ने दी। बता दें कि केरल में बाढ़ के चलते मई से अब तक मरने वालों की संख्या 350 के पार हो गई है। 9 अगस्त के बाद से 196 लोगों की मौत हो चुकी है।

इसरो के अधिकारी ने बताया कि धरती पर नजर रखने वाले सैटलाइट्स ओशनसैट-2, रिसोर्ससैट-2, कार्टोसैट-2 और 2A और इनसैट 3DR ग्राउंड स्टेशन को रियल टाइम तस्वीरें भेजते रहते हैं। इससे बाढ़ की तीव्रता समझने और राहत-बचावकार्य की योजना बनाने में आसानी होती है। उन्होंने बताया कि इन सैटलाइट्स के मिले डेटा के आधार पर बाढ़ के बारे में अलर्ट जारी करने में मदद मिलती है।

राज्यों को भी मिलती है मदद
साथ ही ऐसे इलाकों को चिह्नित किया जा सकता है जहां पानी का स्तर काफी ज्यादा हो गया हो। मौसम से जुड़ी संभावनाएं भी पता की जा सकती हैं। अधिकारियों ने बताया कि ये डेटा हैदराबाद के नैशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर स्थित डिसिजन सपॉर्ट सेंटर में प्रोसेस किया जाता है। वहां से यह इसरो के डिजास्टर मैनेजमेंट सपॉर्ट प्रोग्राम के तहत समय-समय पर केंद्र और राज्यों को भेजा जाता है।

सरकारों को दी जाती है सूचना
इनसैट- 3DR इमेजिंग सिस्टम और ऐट्मसफेरिक साउंडर से लैस है। यह तापमान से लेकर नमी तक के बारे में पूर्वानुमान बताता है। कार्टोसौट और रिसोर्ससैट में कैमरे लगे हैं जिनसे ये हाई रेजॉलूशन की तस्वीरें भेजकर बाढ़ के बारे में चेतावनी देते हैं। इसके बाद उस जगह का पता लगाया जाता है जहां बाढ़ आने वाली है। जो डेटा मिलता है उसके आधार पर मैप बनता है, जिनमें अलग-अलग रंगों में दिखाया जाता है किस इलाके में बाढ़ है। ये मैप सरकारों को भेजे जाते हैं और उनके आधार पर प्रभावित गांवों, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क आदि को लेकर अलर्ट जारी किए जाते हैं।

लहरों का भी हाल..
वहीं, समुद्र में मौजूद उपकरण पश्चिमी तट के मौसम के बारे में बताते हैं। हैदराबाद स्थित इंडियन नैशनल सेंटर फॉर ओशन इन्फर्मेशन सेंटर के वैज्ञानिक अगले तीन दिन तक ऊंची लहरों और हवा के रुख के बारे में पता लगाते हैं। कोझिकोड और कोल्लम से ऐसे ही दो उपकरण जानकारियां भेज रहे हैं।

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