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मुफ्त में मजे ले रहे हैं दो रिटायर ईडी

भोपाल

भेल कार्पोरेट आफिस में जुगाड़ तुगाड़ वाले अफसरों के भी बल्ले-बल्ले हैं। रिटायरमेंट के बाद भी कार्पोरेट प्रबध्ंान ऐसे अफसरों को बड़ी जवाबदारी के साथ सारी सुविधाएं भी मुहैया करा रहा है जबकि भेल जैसी महारत् न कंपनी में नियमित रूप से काम कर रहे अफसरों की कोई कमी दिखाई नहीं देती। ऐसा ही एक मामला कंपनी स्तर पर चर्चाओं में है। यह काम ऊंची पहुंच वाले अफसरों के इशारे पर किये जाने की खबरें आम हो गई हैं। दरअसल कार्पोरेट स्तर पर दो कार्यपालक निदेशक को दो साल के लिए कंसलटेंट नियुक्त कर डाला। कंपनी के नियमानुसार जो सुविधांए व वेतन ईडी स्तर के अफसरों को मिलती है वह भी उन्हें दी जाने लगी है।

यही नहीं रिटायरमेंट के बाद भी हवाई यात्रा और फाइव स्टार होटल की सुविधाएं भी जारी रखी उस पर बंगला भी वही। मामला हाइड्रो और इंडस्ट्रीज सेक्टर से जुड़ा है। हर 6 माह में कंसलटेंट ईडी का कार्यकाल बढ़ाते हुए उन्हें इस पद पर बनाये रखा। इनमें से एक ईडी का कार्यकाल तो पूरा हो गया लेकिन दूसरे ईडी आज भी इन सब सुख-सुविधाओं का पूरा आनंद ले रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर चर्चा है कि एक कंसलटेंट ईडी की सिफारिश एक कश्मीरी आईएएस ने की थी।

फर्जी आय प्रमाण पत्र का खेल

पुत्र मोह में एक पिता को किस तरह नियम विरूद्ध काम करना पड़ता है इसकी चर्चा भेल कारखाने में सुनी जा सकती है।भेल के एक मैकेनिकल इंजीनियर के लिए उसके पिता ने कुछ ऐसा ही कारनामा कर डाला, जिसकी चर्चाएं विभाग के कर्मचारी करते नहीं थकते। मामला उस समय का है जब उनका बेटा रमेश साहू पंजाबी बाग के आयडियल स्कूल के पढ़ा करता था। उस समय उसके पिता ने बेटेे को छात्रवृति दिलाने के लालच में उसका फर्जी आय प्रमाण पत्र बना डाला। यही नहीं इसके बाद सरकार द्वारा उसे छात्रवृति भी प्रदान की गई, जबकि उसके पिता की एक फोर व्हीलर कलेक्टर आफिस में सिर्फ किराये पर नहीं चल रही थी बल्कि उसके पिता एल.एन.सिटी कॉलेज में सुपरवाइजर के रूप में भारी भरकम वेतन भी प्राप्त कर रहे थे। चर्चा है कि फर्जी आय प्रमाण पत्र के आधार पर छात्रवृति लेने वाला यह युवक भेल में मैकेनिकल इंजीनियर बन गया। कहा जा रहा है कि एक मामले में बाप-बेटे जेल की हवा भी खा चुके हैं। ऐसे में इंजीनियर बेटा भेल में कैसे ईमानदारी से काम कर पायेगा इस पर सवालिया निशान लग गया है।

वाटर सप्लाई विभाग में टैंकर से टायर गायब

भेल टाउनशिप के पिपलानी स्थित वाटर सप्लाई विभाग के अफसरों की जितनी तारीफ की जाये कम हैं। भीषण गर्मी में जब टाउनशिप में टैंकरों से पानी सप्लाई को लेकर हड़कंप मचा हुआ था तब करीब 6-7 टैंकर जो देखने में नये दिख रहे हंै वह बिना टायर पत्थरों पर आज भी खड़े हैं।इसको लेकर भेल कर्मचारी आज भी परेशान हैं। एक साल पहले खरीदे गये टायर खराब कैसे हो गये और आज नये टायरों की डिमांड कै से खड़ी हो गई यह जांच का विषय है। एक नहीं बल्कि टैंकरों के चारो टायर ही गायब है। इनको भेल कर्मचारी इटेलियन टैंकर की संज्ञा देने से नहीं चूक रहे हैं। वैसे भी क्या इस विभाग में ईमानदारी से काम होता है इस पर आज भी लोग चर्चा करते नजर आ रहे हैं। जब टाउनशिप में पानी की कमी थी तब भी यह विभाग गहरी नींद सो रहा था। इधर चर्चा है कि भेल कारखाने के टीसीबी विभाग में आईल का खेल और कारखाने के ही एक विभाग में कॉपर के खेल को लेकर विजिलेंस की जांच शुरू हो गई है। इसको लेकर विभाग में काफी हड़कंप मचा हुआ है। दोषी कौन है यह तो विजिलेंस की जांच के बाद ही पता चल पायेगा।

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