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ईएम ग्रुप का एक सप्लायर दु:खी

भोपाल

भेल कारखाने के ईएम ग्रुप के कुछ अफसरों की मनमानी कहें या लाभ शुभ एक सप्लायर को लंबे समय से परेशान किये हुए हैं। दरअसल मामला ही कुछ ऐसा है कि उसका दु:ख सुनकर लोग दांतों तले ऊं गली दबा लेते हैं। चर्चा है कि इंडस्ट्रीयल एरिया के एक सप्लायर को मोटर में लगने वाले कूलर बनाने का ऑर्डर इस विभाग के कु छ अफसरों ने लाभ शुभ के चलते दे डाला। फिर इसी ऑर्डर को गोविन्दपुरा क्षेत्र के ही एक अन्य सप्लायर को इसी का सप्लाई ऑर्डर दे दिया। जो लाभ पहले सप्लायर से लेना था वह भी ले डाला।

चर्चा है कि आजकल यह सप्लायर काफी दु:खी है और उसके पास अधिकारियों को कोसने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। इस मामले को भेल में कुछ इस तरह देखा जा रहा है कि पहले सप्लायर का ऑर्डर देने में भी एडवांस लेने और अब दूसरे सप्लायर से भी लाभ लेने की तैयारी शुरू हो गई है। हुआ यूं कि पहले सप्लायर ने मोटर तो बना ली लेकिन विभाग को देने में देर कर दी। इस पर उसका ऑर्डर ही निरस्त कर दिया, जबकि नियम यह कहता है कि पहले सप्लायर पर लेट डिलेवरी कटवाने के बाद उससे मटेरियल ले लेना चाहिए था लेकिन हुआ उल्टा। विभाग के अफसर अब नई मोटर बनने का दो माह और इंतजार करेंगे, ऐसा है हमारा ईएम ग्रुप।

जिसको चाहूं काम पर रखूं मेरी मर्जी

सीआईएम विभाग की एक महिला अफसर के मामले में विभाग के लोग यह कहने से नहीं चूक रहे हैं कि जिसको चाहूं काम पर रखूं मेरी मर्जी। चर्चा है कि जिन पर वह मेहरबान हो जाये उन्हें कम काम वाली जगह पर रखवा दिया जाता है और जिस पर नाराज है उन्हें भारी काम सौंप दिया जाता हैं। यही नहीं स्कील डेवलपमेंट वेलफयर सोसायटी से भेजे गये कुछ को तो अपर ग्रेड भी दे दिया जाता हैं। इनके संरक्षण में पल रहे एक सुपरवाइजर तो ड्यूटी समय में डेयरी उद्योग का संचालन कर रहा है। चर्चा है कि अपने चहेते को स्कील डेवलपमेंट में सुपरवाइजर बना डाला चाहे वह काम पर आये या न आयें। हाल ही में सोसायटी से भेजे गये वर्करों को बेहतर जगह काम देकर बिठा दिया, ऐसे में अब इनके खिलाफ आवाज उठाने का साहस अन्य वर्कर इसलिए नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें नौकरी से निकालने या ब्रेक देने का डर बना रहता है। प्लानिंग में एक वर्कर को अपर ग्रेड देकर नवाजा गया है। चर्चा है कि इससे विभाग में काम कम और भेल को नुकसान ज्यादा उठाना पड़ रहा है। अब यह तो जांच के बाद ही पता चल पायेगा कि इस मामले में कितना दम है। हां यह जरूर है कि कुछ नेताओं के नाम से इस मामले की शिकायत करने की तैयारी शुरू हो गई है।

भेल में लोन दिलाने का खेल

आप भरोसा करें या न करें कारखाने के कु छ विभागों में लोन दिलाने का खेल कुछ नेताओं और अफसरों की मिली भगत से शुरू हुआ। यह लोन किस तरह का था यह तो यह तो दिलाने वाले जाने, लेकिन इस खेल में यह भरोसा दिलाया गया था कि यह लोन कभी वापस नहीं क रना पड़ेगा, इसके चलते कई कर्मचारियों ने लोन फार्म भरकर विभाग का सील-ठप्पा लगाकर ले लिया। यह खेल तब चर्चाओं में आया जब इसकी वसूली के नोटिस जारी हुए। इसको लेकर कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। यह मामला इतना गोपनीय है कि इसको न तो अधिकारी बताने तैयार और न ही कर्मचारी। हां यह जरूर है कि इसकी गोपनीय शिकायत मानव संसाधन विभाग में की गई है। मजेदार बात यह है कि इसमें नेता और कुछ अफसरों का शामिल होना आश्चर्य की बात है, फिलहाल तो मामला अति गोपनीय रखा गया है। इधर कारखाने के न्यू टीआरएम विभाग में क्रेन ऑपरेटर और स्लींगर का काम कर रहे कुछ मजदूरों का वेतन व बोनस अधिकारियों की मिली भगत से एक ठेकेदार द्वारा नहीं दिये जाने का मामला भी नेताओं के पाले में पहुंच गया है। ठेकेदार की दादागिरी वर्करों को रास नहीं आ रही हैं।

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