Home भेल मिर्च मसाला कौन बनेगा भेल का डायरेक्टर!

कौन बनेगा भेल का डायरेक्टर!

भोपाल

कौन बनेगा भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड(भेल) का डायरेक्टर इसकी चर्चाएं जोरों पर हैं। भेल के डायरेक्टर पॉवर और ई,आर एंड डी के पद के लिए 13 व 14 सितंबर को इंटरव्यू होगा। खास बात यह है कि भेल जैसी महारत्न कंपनी में डायरेक्टर पॉवर का पद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके लिए ईडी मनोज वर्मा, अनिल कपूर और सी मूर्ति के नामों की चर्चा हैं। वैसे डायरेक्टर पॉवर के लिए इस इंटरव्यू में ईडी अनिल कपूर, मनोज वर्मा, सी मूर्ति, सी आनंदा, कमलेश दास और जीएमआई पीपी यादव को शामिल किया गया हैं। जबकि डायरेक्टर ई, आर एंड डी पद के लिए मनोज वर्मा, संजय गुलाटी, सी आनंदा, श्री मुनि, कमलेश दास और पीपी यादव शामिल हैं। जबकि डायरेक्टर ई, आर एंड डी पद के लिए संजय गुलाटी या सी आनंदा प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। आखिरी समय में उलटफेर नहीं हुआ तो इनमें से किसी एक नाम पर मुहर लग सकती है। प्रशासनिक स्तर पर चर्चा है कि डायरेक्टर पॉवर के लिए काफी दांव पेंच खेले जायेंगे। इंटरव्यू के बाद ही डायरेक्टर पॉवर और डायरेक्टर ईएंडआरडी के नामों की घोषणा कर दी जायेगी। देखना यह है कि इस बार डायरेक्टर चेयरमेन की पसंद का होगा या फिर दबाव के चलते बनाया जायेगा। डायरेक्टर पॉवर अखिल जोशी इसी माह रिटायर होने वाले हैं जबकि डायरेक्टर ई, आर एंड डी सुब्रतो विश्वास फरवरी 19 में रिटायर होंगे।

मामला सीनियर को चेयरमेन बनाने का

भेल के प्रशासनिक भवन में इस बात की चर्चाएं गर्म है कि आखिर भेकनिस जैसी सांस्कृ तिक संस्था का चेयरमेन किसी सीनियर महाप्रबंधक को क्यों नहीं बनाया जाता। इसी तरह भेल ऑफिसर्स क्लब, आटा क्लब और स्पोटर्स क्लब को लेकर भी अधिकारी धीमी जबान से चर्चा करते नजर आते हैं। दरअसल भेकनिस का चेयरमेन महाप्रबंधक हरीश निगम को लंबे समय से बनाया गया है जबकि आफिसर्स क्लब के चेयरमेन श्री निगम साहब ही हैं जबकि इन क्लबों सीनियर मोस्ट महाप्रबंधक डीडी पाठक को बिठाना चाहिए था । चर्चा है कि बड़े साहब की नजदीकियां निगम साहब को काफी काम आई।अब तो भेल के अफसर यह भी कहने से नहीं चूक रहे हैं कि भेल में कुछ परम्पराएं जानबूझ कर तोड़ी जा रही है। हालांकि श्री पाठक सिर्फ आटा क्लब के चेयरमेन हैं। खबर तो यह भी है कि सीनियर क्लब का नाम ऑफिसर्स क्लब और आटा क्लब का नाम जूनियर एक्जुक्यूटिव क्लब कर दिया गया है लेकिन इसकी जानकारी भी बहुत कम लोगों को हैं। रही बात महाप्रबंधक पीके मिश्रा की तो प्रशासनिक क्षमता के चलते उन्हें मुखिया ने न केवल हाइड्रो ग्रुप देकर नवाजा है बल्कि भेल स्पोटर्स क्लब का चेयरमेन भी बना दिया। इस वित्तीय वर्ष में ईएम ग्रुप कितना परफार्मेंस दे पायेगा यह तो ग्रुप के कर्मचारी और अधिकारी चर्चा करते नजर आते हैं। इसलिए मुखिया को इसके लिए काफी सोचना होगा।

एजीएम संभाल रहे मैनेजर का काम

भेल कारखाने में बेहतर परफार्मेंस दिखाने वाले चार अपर महाप्रबध्ंाक नगर प्रशासन विभाग में काम देख रहे हैं। हद तो तब हो गई कोई काम न होने से एक अपर महाप्रबध्ंाक सपन सुहाने को पिपलानी सिविल आफिस में मैनेजर का काम देखना पड़ रहा है। कहने को वह टाउनशिप सिविल के मुखिया भी कहलाते हैं। चर्चा है कि एक लाख से ज्यादा वेतन पाने वाले इस अफसर को सिविल वर्क के कामों का अनुभव न होने के बाद भी यह काम क्यों सौंपा गया है। इनके बारे में कहा जाता हैं कि फीडर्स ग्रुप में इन्होंने बेहतर काम किया, और आज कल सिविल आफिस पिपलानी में चापलूस ठेकेदारों से घिरे हुए हैं, इसके चलते देर रात तक उन्हें बैठना पड़ता हैं। अपर महाप्रबंधक अनंत टोप्पो को टाउनशिप का हेड बनाया गया है इनके बारे में कहा जाता हैं कि पॉवर सेक्टर केे कामों में इन्होंने महारथ हासिल कर रखी है। ऐसा ही कुछ हाल अपर महाप्रबंधक एसबी सिंह साहब का हैं। थर्मल में एमटेक किया है और एमबीए फायनेंस लेकिन अब काम देख रहे हैं टाउनशिप का। इलेक्ट्रिकल्स के एक्सपर्ट अर्नेस्ट बिलुंग बिजली विभाग का काम संभाल रहे हैं। ऐसे में चार अपर महाप्रबध्ंाकों के अनुभवों का लाभ कारखाने को नहीं मिल पा रहा हैं। रही बात कारखाने के अपर महाप्रबंधकों की तो कई अपर महाप्रबध्ंाक ऐसे है जो भारी भरकम वेतन तो ले रहे हैं लेकिन कंपनी के लिए उपयोगी साबित नहीं हो रहे हैं।

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