Home अंतराष्ट्रीय ‘मुस्लिमों पर चीन की नजर, घर के बाहर लगा रहा QR कोड’

‘मुस्लिमों पर चीन की नजर, घर के बाहर लगा रहा QR कोड’

लंदन

चीन ने अपने यहां रहनेवाले उइगर मुसलमानों पर ‘कड़ी नजर’ रखने के नई रणनीति बनाई है। इसके तहत अब उइगर मुसलमानों के घर के बाहर क्यूआर कोड सिस्टम लगाया जा रहा है। चीन पर यह आरोप ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) नाम के संगठन ने अपनी रिपोर्ट में लगाए हैं। चीन पहले भी मुस्लिम बहुल प्रांत शिनजियांग पर कई तरह की कार्रवाई कर चुका है। इसमें मनमानी हिरासत, नई-नई पाबंदी और धार्मिक कार्यक्रमों पर रोक शामिल है।

संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा उन घरों में रहनेवाले लोगों की तुरंत पहचान के लिए किया गया है। अब अधिकारी किसी घर में घुसने से पहले घर के दरवाजे पर लगे डिवाइस को मोबाइल से स्कैन करते हैं। HRW की चीन की डायरेक्टर सोफी रिचरडसन ने इस बारे में बताया है। उन्होंने कहा, ‘चीनी सरकार मानव अधिकारों पर हमला कर रही है और यह पिछले कई दशकों से अनदेखा किया जा रहा है।’ वहीं प्रशासन का अपनी सफाई में कहना है कि उन डिवाइस की मदद से जनगणना नियंत्रण और घर-घर दी जानेवाली सर्विस में मदद मिलती है।

शिनजियांग प्रांत को छोड़कर दूसरी जगह रहने गए शख्स ने HRW को उनपर हुए जुल्मों के बारे में बताया है। संगठन के मुताबिक, शख्स ने उन्हें बताया कि यह 2017 के आसपास शुरू हुआ था। अब प्रशासन के लोग आते हैं और पूछते हैं उस घर में कितने लोग रहते हैं, फिर निगरानी रखते और घर पर आनेवाले मेहमान से भी पूछताछ करते हैं कि वह वहां क्यों आए हैं? कई बार तो शाम को बिना कारण बताए चेकिंग भी होती है। सताए हुए अन्य कुछ लोगों ने यह भी बताया कि पासपोर्ट या आईडी कार्ड का आवेदन देने पर सरकार बायोमैट्रिक डेटा लेने लगी है। इसमें डीएनए, आवाज के नमूने भी लिए जाते हैं।

पहले उठी थी खुफिया शिविर की बात
बता दें कि इससे पहले यूएन की एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि चीन ने 10 लाख मुसलमानों को खुफिया शिविरों में कैद कर रखा है। तब यूएन ने आतंकवाद से निपटने के बहाने हिरासत में रखे गए इन लोगों को रिहा करने का आह्वान किया था। इसपर चीन ने सफाई दी थी कि उनकी सरकार ने ऐसा कुछ किया ही नहीं है और सीक्रेट शिविर की बात झूठी है।

शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमान बहुसंख्यक हैं। चीन के पश्चिमी हिस्से में स्थित इस प्रांत को आधिकारिक रूप से स्वायत्त घोषित करके रखा गया है। कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने उइगर मुसलमानों को सामूहिक हिरासत कैंपों में रखने और उनके धार्मिक क्रियाकलापों में हस्तक्षेप करने को लेकर चीन की आलोचना पहले भी कर चुके हैं।

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