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क्या यूपीए के समय भी पेट्रोल के दाम पहुंच गए थे 80 के पार?

नई दिल्ली,

पेट्रोल के दाम पर मचे घमासान के बीच कुछ बीजेपी समर्थक ये सवाल उठा रहे हैं कि राहुल गांधी उस समय क्यों चुप थे, जब यूपीए शासनकाल में कीमत 80 रुपये प्रति लीटर से उपर पहुंच गई थी? यूपीए 2 के कार्यकाल के दौरान पेट्रोल के बेकाबू दामों को दिखाने के लिए पोस्टकार्ड न्यूज के फाउंडर महेश विक्रम हेगड़े ने ट्वीट किया है. हेगड़े ने मैसूरू के एक पेट्रोल पम्प का बिल भी साथ अपलोड किया है जिसमे साफ़ दिख रहा है कि सितंबर 2013 में मैसूरु में पेट्रोल का दाम 82.53 रुपए प्रति लीटर था. हेगड़े को ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी फॉलो करते हैं.

17 सितंबर 2013 के जिस बिल के आधार पर उस उस समय पेट्रोल के 82 रूपए 53 पैसे प्रति लीटर होने का दावा किया जा रहा है उसकी जांच करने पर हमने ये पाया कि वो असली है. महेश विक्रम हेगड़े ने जिस पेट्रोल पंप के बिल को ट्वीट किया है उसकी सच्चाई जानने के लिए हमने बिल पर दिए फ़ोन नंबर पर संपर्क किया. पेट्रोल पंप के मालिक पी विश्वनाथ ने हमें बताया कि ये बिल एकदम असली है और उन्ही के पेट्रोल पंप का है. उन्होंने हमें इसी बिल की एक दूसरी कॉपी (hyperlink the copy sent by the Owner) भी भेजी.

लेकिन क्या 2013 में पेट्रोल के कीमतों की सीधी तुलना इस समय की कीमतों से की जा सकती है ? इस बात की गहराई में जाने पर कहा जा सकता है कि ये तुलना पूरी तरह ठीक नहीं है. उस समय मंहगे पेट्रोल की सबसे बडी वजह अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें में उछाल था जबकि इस समय पेट्रोल मंहगा होने का बड़ा कारण ये है कि पिछले तीन सालों में इस पर टैक्स काफी बढ़ा दिया गया है.

2013 में क्रूड आयल का औसत दाम 105.87 डॉलर प्रति बैरल था और भारत सरकार एक लीटर पेट्रोल पर लगभग 9 रुपए 48 पैसे एक्साइज ड्यूटी वसूलती थी जबकि 2018 में क्रूड आयल के दाम औसतन 69.02 डॉलर प्रति बैरल है और एक्साइज ड्यूटी 19 रुपए 48 पैसे पर पहुंच गई है. यानि केन्द्र सरकार अब 2013 के मुकाबले पेट्रोल पर दोगुना से ज्यादा एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है. हमारी पड़ताल से साबित हुआ कि हेगड़े ने पेट्रोल का जो बिल ट्वीट किया है वो नकली तो नहीं है लेकिन पेट्रोल के दामों की यह पूरी कहानी बयान नहीं करता.

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