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चुनावी घोषणापत्र में शराबबंदी का ऐलान कर बड़ा दांव लगाने की तैयारी में कांग्रेस

मध्य प्रदेश में कांग्रेस अपने चुनावी मेनिफेस्टो में शराबबंदी की घोषणा कर बड़ा राजनीतिक धमाका करने की तैयारी में है. कांग्रेस प्रदेश की 50 प्रतिशत महिला वोटर्स को साधने का दांव खेलते हुए दस हजार करोड़ राजस्व नुकसान सहने के लिए भी तैयार है.

कांग्रेस के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के आग्रह पर गुजरात, बिहार, केरल की शराबबंदी पॉलिसी पर फाइनेंस से जुड़े लोगों से अध्ययन करवाया गया है. उनकी सलाह इस मामले में सकारात्मक नहीं थी. क्योंकि बड़ा राजस्व घाटा इसमें दिख रहा है. बावजूद इसके कमलनाथ ने आश्वस्त किया है कि कांग्रेस की सरकार बनती है तो वे इस घाटे से निपटने में सक्षम हैं

यह वचन पत्र अब तैयार हो गया है. गणेश चतुर्थी के दिन कांग्रेस वचन पत्र समिति के अध्यक्ष राजेद्र सिंह और विवेक तन्खा ने इसकी सॉफ्ट कॉपी प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को सौंप दी है. हार्ड कॉपी आज सौंपी जा रही है. 17 सितंबर को राहुल गांधी भोपाल से चुनाव अभियान की शुरुआत करेंगे. प्रदेश भर के पार्टी पदाधिकारी राहुल से ‘वन टू वन’ चर्चा के लिए बुलाए गए हैं. माना जा रहा है कि इस दौरान ही यह वचन पत्र जारी किया जाएगा.

सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो को पूरी रणनीति के साथ तैयार किया है. सबसे पहले तो प्रदेश की जनता के बीच यह मैसेज पहुंचाया गया कि यह मेनिफेस्टो नहीं वचनपत्र होगा. याने जो कहा जाएगा उसे साल भर में पूरा किया जाएगा. प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ कहते हैं कि वादे तो कई होते हैं लेकिन हमारा यकीन काम करने में है इस कारण हम इसे हम घोषणा पत्र नहीं वचन पत्र कह रहे हैं.

भावांतर- संबल के बाद बदला प्लान
मंदसौर में किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने पर राहुल गांधी ने किसानों की कर्जमाफी की घोषणा की थी. इसी तरह बिजली के बिल माफी का भी मामला जनता के बीच पहुंचाया गया. लेकिन शिवराज सरकार की भावांतर योजना और धान के समर्थन मूल्य को लेकर दिखाई गई उदारता और असंगठित मजदूरों के लिए तैयार की गई संबल योजना को देखते हुए कांग्रेस को अपना प्लान बदलना पड़ा.

शराबबंदी क्यों
कांग्रेस शराबबंदी को मुद्दा बनाकर शिवराज सिंह सरकार को दरअसल नैतिक मनोबल के स्तर पर भी घेरना चाहती है. बिहार में शराबबंदी के बाद शिवराज सिंह ने भी मध्यप्रदेश में शराबबंदी लागू करने की तैयारी की थी. अधिकारिक तौर पर इसकी तैयारी भी की गई . कैबिनेट में चर्चा भी हुई लेकिन यह संभव नहीं हो पाया. मध्यप्रदेश पौने दो सौ लाख करोड़ के कर्ज़ में है. इस वजह से इस हानि का जोखिम शिवराज नहीं ले पाए. कांग्रेस अब इस मुद्दे को अपने चुनावी अभियान में भुनाना चाहती है. वह चुनाव से पहले लोगों के दिमाग में डालना चाहती है कि राजनीतिक शुचिता उसका नारा है.

वचनपत्र की हाईलाइट्स
*मध्यप्रदेश में पैट्रोल प्रति लीटर पांच रुपए और डीजल तीन रुपए प्रति लीटर तक सस्ता किया जाएगा.
इसके लिए वैट की दरों में कमी लाई जाएगी.
*छात्रों को लुभाते हुए व्यापम की परीक्षाओं में जमा हुई फीस छात्रों को वापस की जाएगी.
*शिवराज सरकार के 200 रू. बिजली बिल के जवाब में 100 रुपए प्रतिमाह के फिक्स चार्ज पर अनलिमिटेड बिजली देने का वादा.
*एक किलो वाट से अधिक भार का उपयोग करने वालों की बिजली की दरें आधी करने का वादा.
*युवाओं को लुभाने के लिए बेरोज़गारों को हर माह 4000 रुपए बेरोज़गारी भत्ते का वादा.

घोषणा पत्र कमेटी में कौन
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस कमेटी को गठित किया विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा, पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन इसके सदस्य हैं.

सौंप दिया है
कमेटी के अध्यक्ष डा. राजेंद्र सिंह ने न्यूज 18 से चर्चा में बताया कि हमने अपना डॉक्यूमेंट प्रदेश अध्यक्ष को सौंप दिया है. यह खास काम गणेश चतुर्थी पर किया गया है. इसमे क्या मुद्दें शामिल हैं इसे उजागर नहीं किया जा सकता. हम प्रदेश को एक बेहतर और विकासशील प्रदेश बनाना चाहते हैं. ऐसे तमाम मुद्दें उसमें शामिल हैं.

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