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नोमुरा ने बताया, चीनी युआन से ज्यादा स्थिर ₹

नई दिल्ली

एक दशक में तीन-तीन बार मुद्रा संकट का सामना करने के बाद भारत फिर से डॉलर के मुकाबले रुपये को टूटता हुआ देख रहा है। डर इस बात का है कि रुपये में आ रही इस बार की गिरावट देश को कहीं चौथे मुद्रा संकट की ओर नहीं धकेल दे। गौरतलब है कि भारत को 2013, 2011, 2008 और 1997 में मुद्रा संकट का सामना करना पड़ा था।

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को उम्मीद है कि रुपया एक स्तर के बाद नहीं गिरेगा और रिजर्व बैंक महंगाई पर नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाएगा। वहीं, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रुपये में और गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई की कमान में पर्याप्त तीर हैं।

बुधवार को थोड़ी गिरावट के बाद शुक्रवार को फॉरेक्स मार्केट में रुपया डॉलर के मुकाबले 50 पैसे मजबूत खुला। वैसे रुपये में इस वर्ष 11 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। सितंबर महीने के पहले 10 दिनों में ही यह 1% टूट गया। रुपया अपनी फितरत में बहुत नाजुक नहीं है। हां, इसे बाहरी झटकों का सामाना करने में परेशानी जरूर होती है। यह बात 30 उभरते बाजारों की मुद्राओं के अध्ययन से सामने आई है।

नोमुरा के डैमोकल्स इंडेक्स में भारत 25वें स्थान पर है जिससे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले इसकी स्थिरता का पता चलता है। डैमोकल्स इंडेक्स आठ महत्वपूर्ण संकेतकों पर आधारित है जो झूठे संकेतों और वास्तविक संकट के संकेतों के बीच संतुलन कायम करते हुए यह एक्सचेंज रेट क्राइसिस को जोखिमों को 12 महीने पहले भांप लेता है।

100 से ऊपर डैमोकल्स का मतलब है कि उस देश को एक्सचेंज रेट क्राइसिस का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, आंकड़ा यदि 150 से ऊपर पहुंच जाए तो स्पष्ट है कि उस देश में कभी भी मुद्रा संकट आ सकता है, जैसा कि अभी श्रीलंका के साथ है। चीन का डैमोकल्स 37 है जबकि मलयेशिया का 62।

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