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पिछले अनुभवों से राहुल ने लिया सबक, कांग्रेस नेताओं को राफेल डील की पैरवी न करने को कहा

नई दिल्ली,

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस नेताओं को एक सख्त ज्ञापन जारी किया है. सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी ने वकीलों को ऐसे केसों की पैरवी न करने के कहा है जो कांग्रेस के स्टैंड को कमजोर कर सकते हैं.2019 के लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी को मजबूत करने की कोशिश में जुटे कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी नेताओं को उन मामलों से स्पष्ट रूप से दूर रहने के लिए कहा है, जिनको लेकर बीजेपी अथवा केंद्र, कांग्रेस को निशाना बना सकते हैं या फिर जिनसे पार्टी स्टैंड कमजोर पड़ सकता है.

कांग्रेस अध्यक्ष ने इस तथ्य पर बल दिया कि पार्टी के किसी भी सदस्य को वकील के तौर पर राफेल मुद्दे को लेकर अनिल अंबानी का केस नहीं लड़ना चाहिए, जो कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच घमासान की वजह बना हुआ है.राहुल गांधी का यह स्टैंड अनिल अंबानी की कंपनी द्वारा कांग्रेस प्रवक्ताओं को नोटिस भेजने के बाद आया है. अनिल अंबानी ने राहुल गांधी को बताया कि राफेल मुद्दे पर उन्हें सही जानकारी नहीं दी गई है.

कांग्रेस सरकार पर राफेल विमान की कीमत का खुलासा न करने और एक विमान के लिए यूपीए की तुलना में तीन गुना अधिक कीमत देने के आरोप लगा रही है, इसके लिए कांग्रेस ने संयुक्त संसदीय समिति की मांग की है.अतीत में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कुछ ऐसे मामलों की पैरवी की थी जिनकी वजह से कांग्रेस पार्टी बैकफुट पर खड़ी होने पर मजबूर हो गई.

सुप्रीम कोर्ट में अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) की तरफ से ट्रिपल तलाक की पैरवी करते हुए सिब्बल की टिप्पणी ‘यह एक पुरानी परंपरा है और इसे असंवैधानिक नहीं माना जा सकता’ ने पार्टी को बैकफुट पर धकेल दिया.वहीं इस मुद्दे पर पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने अलग विचार पेश किया और कहा, “कांग्रेस हमेशा यह मानती है कि ट्रिपल तलाक का मुद्दा जेंडर जस्टिस और जेंडर इक्वेलिटी के बारे में है. कांग्रेस ट्रिपल तालाक को खत्म करने वाले किसी भी कानून का समर्थन करेगी.”

सुरजेवाला ने जोर देकर कहा, जैसा कि प्रस्तावित कानून के तहत विचार किया गया है यदि पति तीन साल तक जेल में है तो महिलाओं और बच्चों के रखरखाव और/अथवा गुजारा भत्ता का भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए.पार्टी को तब भी झटका लगा था जब सिब्बल और सिंघवी ने प्रणब मुखर्जी द्वारा लिए गए निर्णय के खिलाफ वोडाफोन की पैरवी की थी. हालांकि कांग्रेस ने ये कहते हुए अपने नेताओं का बचाव किया था कि उनके नेता वकील भी हैं और वे अपने पेशे के तहत काम करने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन फिर भी बीजेपी को कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका मिल गया.

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