Home अंतराष्ट्रीय 8 सालों में पहली बार अमेरिका जाने वाले भारतीयों की संख्या घटी

8 सालों में पहली बार अमेरिका जाने वाले भारतीयों की संख्या घटी

नई दिल्ली

8 सालों में पहली बार अमेरिका जाने वाले भारतीयों की संख्या में गिरावट देखने को मिली है। 2017 में करीब 11 लाख 14 हजार भारतीय अमेरिका गए थे। यह संख्या इसके पिछले साल के मुकाबले 5 फीसदी कम है। 2016 में 11.72 लाख भारतीय अमेरिका गए थे। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ नैशनल ट्रैवल ऐंड ट्रेड ऑफिस (NTTO) के हवाले से यह जानकारी सामने आई है।

NTTO ने अप्रैल में विदेशी यात्रियों के आंकड़े को जारी करने को अस्थायी रूप से निलंबित किया था। यूएस कस्टम ऐंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) से मिले रिकॉर्ड में विसंगतियों के चलते ऐसा फैसला लिया गया था। इस वजह से 2017 में अमेरिका जाने वाले विदेशी यात्रियों की संख्या की जानकारी नहीं मिल पा रही थी।

बुधवा को NTTO ने इस जानकारी को जारी कर दिया। इसके बाद पता चला है कि भारतीयों की संख्या में गिरावट हुई है। इससे पहले 2009 में 5.5 लाख भारतीयों ने अमेरिका की यात्रा की थी। तब इस संख्या में इसके पिछले साल के मुकाबले में 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। यह वह दौर था जब वैश्विक मंदी ने दुनिया को अपनी चपेट में लिया था। लोगों ने अपने खर्चों में कटौती की थी।

इसके बाद से 2016 तक हर साल अमेरिका जाने वाले भारतीयों की संख्या में इजाफा ही देखने को मिला था। हालांकि इसे अस्थायी परिघटना ही समझा जा रहा है। NTTO ने 2018 से 2022 के बीच अमेरिका जाने वाले भारतीयों की संख्या में इजाफे का अनुमान जताया है। ट्रैवल इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ सालों से विदेशों में जाने वाले भारतीयों की संख्या में 10-12 फीसदी का इजाफा देखने को मिल रहा है।

दिल्ली स्थित एक ट्रैवल एजेंट का कहना है कि हाल के समय में अमेरिका को लेकर एक ऐसी सोच बनी है कि वहां की यात्रा कठिन हो गई है। उनके मुताबिक अमेरिका में कुछ देशों के लोगों की एंट्री पर रोक लगाने के फैसले के बाद ऐसी धारणा बनी है। हालांकि उन्होंने कहा है कि यह एक गलत धारणा और अच्छे यात्रियों के लिए अमेरिका जैसा था वैसा ही आज भी है।

एक दूसरे ट्रैवल एजेंट ने बताया कि अमेरिका नियमति तौर भारतीय आवेदकों के लिए 10 साल की वैलिडिटी वाला मल्टिपल एंट्री वीजा जारी करता रहा है। यह वीजा टूरिस्ट (B1 और B2) कैटिगरी के अंदर जारी किया जाता है जिसकी फी 10 से 11 हजार रुपये तक है। वहीं यूरोपीय देश काफी सीमित समय के लिए वीजा जारी करते हैं और उनके चार्ज भी अधिक हैं।

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