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भेल के मुखिया ने ली राहत की सांस

भोपाल

भेल भोपाल यूनिट में पिछले एक साल से इस बात की चर्चाएं प्रशासनिक स्तर पर गर्म थी कि इस यूनिट की कमान बंग्लूरू यूनिट के मुखिया कभी भी संभाल सकते हैं। इस खबर से भोपाल यूनिट के मुखिया की नींद हराम हो गई थी। वह अपनी कुर्सी बचाने के लिए पूरी ताकत झोंके हुए थे लेकिन हाल ही में बंग्लूरू यूनिट के मुखिया के डायरेक्टर बना देने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली हैं। भेल के थर्ड फ्लोर में अधिकारी इस तरह की गपशप करते नजर आते हैं। इधर शनिवार को भेल के चेयरमेन झांसी यूनिट लोकोमेटिव इंजिन डब्ल्यूएजी-7 का लोकापर्ण करने पहुंचे जहां भेल भोपाल यूनिट के मुखिया ने भी शिरकत की। चर्चा है कि इस कार्यक्रम में बैनर पर भोपाल ईडी का न तो फोटो दिखाई दिया और न ही नाम।

सीनियर इंजीनियर के बल्ले-बल्ले

भेल कारखाने के सीडीसी विभाग में काम कर रहे एक सीनियर इंजीनियर की जितनी तारीफ की जाये कम हैं। इस विभाग में वर्षों से जमे यह इंजीनियर अपने से बड़े अफसरों को ठेंगा दिखा रहा हैं। इन्हें विभाग के आला अफसर ने टेंडर का काम सौंपा है बजाय वह अपना यह काम करने के टेंडर की कमियां दूर करने के लिए अनुभव प्रमाण-पत्र बनाने का काम करने लगे हैं। मजेदार बात यह है कि यह अनुभव प्रमाण-पत्र सही है या नहीं इसकी जांच करने की जरूरत भी नहीं समझते। इससे जो वेंडर क्वालीफाई होते ही वह तो काम से बाहर हो जाते हैं और गलत प्रमाण पत्र वाले क्वालीफाई नहीं हैं वह अंदर। यह सब मामला निजी लाभ से जुड़ा है। इस मामले में किसी वेंडर ने आवाज उठाई तो समझो उसकी खैर नहीं। चर्चा है कि बेहतर सेटिेंग के चलते इनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

मामला एक सीनियर डीजीएम की दादागिरी का

कारखाने के हाल ही में बने एक सीनियर डीजीएम के दादागिरी के चर्चे कम नहीं हैं। दरअसल ईएम ग्रुप वैसे ही कोई बेहतर परफार्मेंस नहीं दिखा पा रहा है। यहां प्रशासनिक पकड़ वाले अफसरों का टोटा हैं उस पर एक सीनियर डीजीएम ने अपने मातहतों पर दादागिरी का काम करना शुरू कर दिया हैं यहां के कर्मचारी उनसे काफी परेशान बताये जा रहे हैं। एक ही ब्लॉक में सालों से रहे यह अफसर न केवल आफलोडिंंग करने के लिए मशहूर है बल्कि यहां खरीदे गये सामान को खराब बताकर बाहर फिकवा देते हैं और नये खरीदने का ऑर्डर दे देते हैं। इसको लेकर भेल की कुछ ट्रेड यूनियनों ने इस अफसर की न केवल ईडी से शिकायत की बल्कि बात चेयरमेन तक पहुंचा डाली। रही बात ग्रुप के जीएम की तो वह तो काम में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा पा रहे हैं। चर्चा है कि इस वित्तीय वर्ष में भगवान ही मालिक है ईएम ग्रुप का।

भेल में यूनियनों की पैतरेंबाजी

आजकल अपनी-अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए कुछ नेता पैतरेंबाजी दिखाने से बाज नहीं आ रहे हैं, जब प्रतिनिधि यूनियन के चुनाव हुए थे तब प्रबंधन के सामने यूनियनों ने शपथ पत्र दिया था कि चुनाव हारने वाली यूनियनें अपना भेल का बंगलानुमा आफिस खाली कर देंगे। लेकिन यहां उल्टी गंगा बह रही है। हारी हुई यूनियनों से भेल प्रशासन आफिस तो खाली नहीं करा सका और नई-नई यूनियनों को आफिस आवंटन का काम शुरू कर दिया जिनका जीत से दूर-दूर का वास्ता भी नहीं हैं। चर्चा है कि हाल ही एक यूनियन ने भी अपना कार्यालय खोलने के लिए जब प्रबंधन को प्रस्ताव भेजा तो एक प्रतिनिधि यूनियन ने प्रबंधन से क हकर उसका प्रस्ताव ही निरस्त करा दिया। खबर है कि इससे नाराज यूनियन ने शिव सेना से एफिलेशन लेकर सीधे केन्द्रीय भारी उद्योग मंत्री(शिवसेना से जुड़े) से सीधे सम्पर्क बना लिया।

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