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राजीव के बाद बागची का लगेगा नंबर

भोपाल

भेल का विगत कुछ सालों से रिकार्ड रहा है कि जो महाप्रबंधक टीसीबी ग्रुप में रहा है वह या तो इस ग्रुप में रहकर या तो जीएमआई या फिर ईडी बनकर दूसरी यूनिट में गया है। खबर है कि आज भी कुछ ऐसे हालात इस गु्रप में बन रहे हैं। भले ही पूर्व ईडी एएमवी युगांधर ने जिनकी तारीफ न की हो जल्द ही इस यूनिट से वर्तमान ईडी की पसंद बनकर महाप्रबंधक टीके बागची दिल्ली कार्पोरेट या फिर किसी अन्य यूनिट में जीएमआई बनकर जा सकते हैं।

यह अलग बात है कि उनका तबादला जीएम पद पर रहते हुए ही कर दिया जाये लेकिन वहां उन्हें जीएमआई बनाया जा सकता हैं। चर्चा है कि वह भोपाल यूनिट से विशाखापट्टनम यूनिट में भेज गये महाप्रबंधक राजीव सिंह की तर्ज पर भेजा जा सकता है। इधर यह भी अटकलें लगने लगी हैं कि श्री बागची के अलावा 2013 में बने महाप्रबध्ंाक डीडी पाठक, एम हलधर, ओपी सारस्वत और आरके आर्या कब कतार में लगेंगे, जबकि श्री बागची 2015 में महाप्रबध्ंाक बने हैं।

आखिर कहां गायब हो गई इंक्वायरी

भेल के गेस्ट हाउस के काम की एक इंक् वायरी कहां गायब हो गई इसे विभाग के लोग 6 माह से तलाश रहे हैं। फाइल गायब हो जाने से भेल के प्रतिष्ठित सांची और नर्मदा गेस्ट हाउस के बाग- बगीचे भी मुरझाने लगे हैं। इसके बाद भी इंक्वायरी की फाइल ढूंढे से भी नहीं मिल रही है। दरअसल मामला ही कुछ ऐसा है कि गेस्ट हाउस में वीआईपी लोग रूकते हैं और यहां बाग-बगीचों में में परिवार सहित चहल कदमी करते हैं। मार्च 2018 से बाग-बगीचों की साफ सफाई व सिंचाई का काम इसलिए रूका है कि टाउनशिप सिविल से जो फाइल एचआर और फायनेंस विभाग गई तो लौटकर नहीं आई। इस इंक्वायरी में 13 पार्टियां शामिल हैं। न तो इसकी चिंता ईडी को है और न ही एचआर विभाग को। अब इसके पीछे की राजनीति क्या है यह तो बड़े साहब ही जाने।

प्रबंधन के खिलाफ ठेकेदार लामबंद

यह एक अजीबो-गरीब फरमान भेल प्रशासन ने जारी कर दिया है कि भेल में काम कर रहे ठेकेदारों को उनके काम का अनुभव सर्टीफिकेट नहीं मिलेगा। यह फरमान भेल के लिए गले की फांस बन गया है। चर्चा है कि इसको लेकर भेल के ठेकेदार लामबंद हो गये हैं। मजेदार बात यह है कि यदि ठेकेदार को यह प्रमाण पत्र समय पर नहीं मिला तो वह काम ही नहीं ले पायेगा। इसके लिए भी ई-6 कॉडर के अफसर को हस्ताक्षर करने पड़ेंगे। ठेकेदार यह नहीं समझ पा रहे कि आखिर वह करें तो क्या करें, उस पर भी यह पूरा काम एचआर विभाग करेगा। इसको लेकर कुछ ठेकेदार लामबंद होकर कोर्ट में जाने की तैयारी कर रहे हैं। सिर्फ इंतजार है तो प्रबंधन के फरमान की कॉपी का।

भेल में यूनियनों की पैतरेंबाजी

आजकल अपनी-अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए कुछ नेता पैतरेंबाजी दिखाने से बाज नहीं आ रहे हैं, जब प्रतिनिधि यूनियन के चुनाव हुए थे तब प्रबंधन के सामने यूनियनों ने शपथ पत्र दिया था कि चुनाव हारने वाली यूनियनें अपना भेल का बंगलानुमा आफिस खाली कर देंगे। लेकिन यहां उल्टी गंगा बह रही है। हारी हुई यूनियनों से भेल प्रशासन आफिस तो खाली नहीं करा सका और नई-नई यूनियनों को आफिस आवंटन का काम शुरू कर दिया जिनका जीत से दूर-दूर का वास्ता भी नहीं हैं। चर्चा है कि हाल ही एक यूनियन ने भी अपना कार्यालय खोलने के लिए जब प्रबंधन को प्रस्ताव भेजा तो एक प्रतिनिधि यूनियन ने प्रबंधन से क हकर उसका प्रस्ताव ही निरस्त करा दिया। खबर है कि इससे नाराज यूनियन ने शिव सेना से एफिलेशन लेकर सीधे केन्द्रीय भारी उद्योग मंत्री(शिवसेना से जुड़े) से सीधे सम्पर्क बना लिया।

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