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झांसी जायेंगे ईएम के साहब

भोपाल

भेल कारखाने में एक अपर महाप्रबध्ंाक स्तर के अधिकारी की झांसी जाने का सपना पूरा होता दिखाई दे रहा है। कारखाने के ईएम मेन्यूफेक्चरिंग विभाग में पदस्थ ईएम ग्रुप के साहब क रीब डेढ़ माह से भेल के ईडी के पास झांसी यूनिट में जाने की गुहार लगा रहे हैं। इसको लेकर उन्होंने कार्पोरेट स्तर पर जुगाड़ फिट करने की कोशिश की। दरअसल यह साहब अपनी ही कॉलोनी के विवादों में कुछ इस तरह फंसे हैं कि वह हर हाल में भोपाल से झांसी यूनिट तबादले का मन बना चुके हैं। यूं तो भेल के प्रशासनिक भवन के थर्ड फ्लोर में अफसरों से इन साहब की कहानी छिपी नहीं है, फिर भी झांसी तबादले का और क्या कारण हो सकता है यह समझ से बाहर है। उनकी मनोरंजन की खबर सुनकर भेल के मुखिया बल्कि कार्पोरेट के अफसर भी परेशान हैं।

तीन नंबर यूनियन पर मेहरबान

आजकल भेल में तीन नंबर यूनियन पर बड़े साहब की मेहरबानी चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल जबसे इस यूनिट में प्रतिनिधि यूनियन केे चुनाव हुए उसके बाद बड़े साहब का भोपाल आना तब से दो नंबर यूनियन बड़े साहब की चहेती यूनियन मानी जाती थी। रही बात एक नंबर यूनियन की तो वैसे भी वह किसी से कम नहीं आकीं जाती। अब बड़े साहब ने दोनो यूनियनों को ठेंगा दिखाते हुए तीन नंबर यूनियन पर मेहरबानी बरसाना शुरू कर दिया है। न तो वह एक नंबर यूनियन के कार्यक्रमों में शिरकत करने की हामी भरते हैं और न ही दो नंबर यूनियन के। शनिवार को उन्होंने दो नंबर यूनियन के राष्ट्रीय अधिवेशन में जाने से भी साफ इंकार कर दिया। ऐसे में दोनों यूनियनों में नाराजगी लाजमी है। तीसरी यूनियन पर बड़े साहब की मेहरबानी विस्फोटक हो सकती है।

नेताजी पर गिरी ढाई इंक्रीमेंट की गाज

भेल कारखाने में एक युवा इंटक के नेता पर कर्मचारियों को ढाई इंक्रीमेंट दिलाये जाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन की गाज चर्चाओं का विषय बनी। यह मांग प्रबंधन को काफी खटक रही थी। नेताजी ने सभी कर्मचारियों को एकजुट कर कारखाने में आंदोलन तेज कर दिया था।चर्चा है कि इससे नाराज प्रबंधन ने युवा नेता पर बिना सोचे समझे ही वार कर दिया यानी बिना कोई चार्जशीट थमाये सस्पेंड कर दिया। इस बात ने जब तूल पकड़ा तब कहीं जाकर प्रबंधन ने नेताजी को चार्जशीट थमाई। अब नंबर वन यूनियन के नेता को सस्पेंड करने का मामला प्रबंधन की गले की फांस बन गया है। चर्चा है कि नेताजी को बहाल करने प्रबंधन पर काफी दबाव बना हुआ है। ईडी साहब की भी नींद हराम है।

नट-बोल्ट खरीदी से खुश अफसर

भेल कारखाने में नट-बोल्ट खरीदी के मामले को प्रशासनिक स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस मामले में मलाईदार काम के मजे ले रहे कुछ अफसर खुश हैं। दरअसल कारखाने के हर ब्लॉक में हार्डवेयर का सामान नट-बोल्ट लाखों की तादाद में खरीदे जाते हैं। जब यह भेल के प्रवेश द्वार से कारखाने के भीतर आता है तब इसे गिनने वाला कोई नहीं होता है। सालों से चल रहे इस घपले का सच यह है कि यदि 1 हजार नट-बोल्ट खरीदी का आर्डर है तो उसमें 800 ही होते हैं। चाहे सीआईएसएफ के जवान है या फिर विभाग के अधिकारी सिर्फ पेपर की इंट्री ही चेक करते हैं। पेटी के अंदर कितना सामान है इसे चेक करने की जरूरत ही नहीं समझते हैं, इससे भेल को सालों से लाखों की चपत लब रही है। एक खबरीलाल ने इसकी खबर भेल की विजिलेंस को तो दी थी लेकिन उसने भी इस गोरखधंधे को जांचने की जरूरत ही नहीं समझी।

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