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बैठक शुरू, लगातार तीसरी बार दरें बढ़ाएगा RBI?

मुंबई

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली छः सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बुधवार को तीन दिवसीय बैठक शुरू हो गई। इस बीच संभावना जताई जा रही है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का मुदास्फीति पर होने वाले प्रभावों को कम करने के लिए रिजर्व बैंक नीतिगत दर में चौथाई प्रतिशत वृद्धि कर सकता है।

रिजर्व बैंक शुक्रवार को यदि मुख्य नीतिगत दर में वृद्धि का ऐलान करता है तो यह लगातार तीसरी वृद्धि होगी। रिजर्व बैंक ने साढ़े चार साल के अंतराल के बाद पहली बार जून में हुई दूसरी द्वैमासिक समीक्षा बैठक में प्रमुख नीतिगत दर में वृद्धि की। इसके बाद, रिजर्व बैंक ने अगस्त की मीटिंग में भी रीपो रेट यानी अल्पकालिक दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की। लगातार दो बार 0.25 प्रतिशत की वृद्धि के बाद इस समय रीपो रेट 6.50 प्रतिशत पर है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, रुपये में गिरावट और बढ़ता चालू खाता घाटा इत्यादि कुछ ऐसे तत्व हैं, जिन्हें ब्याज दर पर निर्णय लेने के समय नीति-निर्माताओं को ध्यान में रखना होगा। बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर होकर 73.25 रुपये के सर्वकालिक निचले स्तर पर आ गया जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब थी। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद जुलाई के लिए 4.17 प्रतिशत के मुकाबले अगस्त में महंगाई का आंकड़ा घटकर 3.69 प्रतिशत रह गया।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) राजकिरन राय ने कहा, ‘पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने के साथ, माना जा रहा है कि मुद्रास्फीति (महंगाई) भी बढ़ेगी। इसलिए एहतियातन के तौर पर कदम उठाया जा सकता है। मुझे लगता है कि रीपो रेट में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि होगी।’

एक अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रमुख ने कहा कि व्यापक आर्थिक स्थिति को देखते हुए रिजर्व बैंक द्वारा आगे होने वाली मौद्रिक समीक्षा बैठक में रीपो रेट में 0.25 प्रतिशत वृद्धि हो सकती है। एचडीएफसी के उपाध्यक्ष और सीईओ केकी मिस्त्री ने कहा, ‘इस समय मुद्रा की विनिमय दर को देखते हुए मुझे लगता है कि वे आगामी समीक्षा बैठक में ब्याज दर में चौथाई प्रतिशत की वृद्धि करेंगे।’ एसबीआई ने अपनी रिसर्च रिपोर्ट इकोरैप में कहा है कि रिजर्व बैंक को रुपये की गिरावट को थामने के लिए नीतिगत ब्याज दर में कम से कम 0.25 प्रतिशत वृद्धि करनी चाहिए।

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