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जब एचआर ने लगाई फटकार

भोपाल

भेल कारखाने में ही नहीं बल्कि उद्योग नगरी के बाहर भी महाप्रबध्ंाक मानव संसाधन ने अफसरों की क्लास लेना शुरू कर दी है। पहले एक कर्मचारी नेता को सस्पेंड करने फिर कुछ कर्मचारी नेताओं के विभागों में फेरबदल करना चर्चाओं का विषय बना हुआ है। हाल ही में एचआर साहब ने भेल के कस्तूरबा अस्पताल पहुंचकर अधिकारी-कर्मचारियों को फटकार लगा डाली। दरअसल मामला अस्पताल प्रमुख से जुड़ा हुआ है। कुछ समय पूर्व एक महिला सफाई कर्मी की छेड़छाड़ के मामले को लेकर एचआर साहब क्लास लेने अस्पताल पहुंचे थे। चर्चा है कि एचआर साहब ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब अस्पताल में एक अपर महाप्रबध्ंाक सहित सात एक्जुक्यूटिव तैनात हैं तो ऐसे में अस्पताल प्रमुख को सफाई व्यवस्था देखना गले नहीं उतर रहा है। चर्चा है कि ठेकेदार और अफसरों की मिलीभगत से सफाई व्यवस्था पर पलीता लगाया जा रहा है।

पार्क को बना दिया जंगल

भेल उद्योग नगरी के ज्यादातर पार्क वैसे ही उजड़े पड़ें हैं। वैसे ही उद्यान विभाग के कर्मचारी आधे से ज्यादा कम कर दिये हैं उस पर ईडी बंगले के सामने का रानी दुर्गावती पार्क जंगल बनकर रह गया है। चर्चा है कि कम से कम इस पार्क को तो बक्श दिया जाता। यही हाल इसके बगल के पार्क का है। चर्चा है कि अफसरों ने इस जंगलनुमा बने पार्क में पौधे लगाने के नाम पर ही बड़ी धनराशि खर्च कर डाली। न पौधे उगे और न ही जंगल की सफाई हुई। साफ जाहिर है कि इस पार्क से सांप-बिच्छू का खतरा अफसरों के आवासों में आने का मंडराने लगा है। जब ईडी बंगले के सामने के पार्क का यह हाल है तो उद्योग नगरी के पार्काे का क्या होगा।

सामान खरीदी से खुश भेल के अफसर

भेल कारखाने में नट-बोल्ट खरीदी के मामले को प्रशासनिक स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस मामले में मलाईदार काम के मजे ले रहे कुछ अफसर खुश हैं। दरअसल कारखाने के हर ब्लॉक में हार्डवेयर का सामान नट-बोल्ट लाखों की तादाद में खरीदे जाते हैं। जब यह भेल के प्रवेश द्वार से कारखाने के भीतर आता है तब इसे गिनने वाला कोई नहीं होता है। सालों से चल रहे इस घपले का सच यह है कि यदि 1 हजार नट-बोल्ट खरीदी का आर्डर है तो उसमें 800 ही होते हैं। चाहे सीआईएसएफ के जवान है या फिर विभाग के अधिकारी सिर्फ पेपर की इंट्री ही चेक करते हैं। पेटी के अंदर कितना सामान है इसे चेक करने की जरूरत ही नहीं समझते हैं, इससे भेल को सालों से लाखों की चपत लब रही है। एक खबरीलाल ने इसकी खबर भेल की विजिलेंस को तो दी थी लेकिन उसने भी इस गोरखधंधे को जांचने की जरूरत ही नहीं समझी।

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