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वो 10 बाबा जो पलट सकते हैं मध्य प्रदेश में चुनाव के नतीजे

कर्नाटक की सियासत में मठों का वर्चस्व है तो वहीं मध्य प्रदेश की राजनीति में साधु-संतों का दबदबा है. इसी के चलते शिवराज सिंह चौहान ने कई बाबाओं को राज्य मंत्री के दर्जे से नवाजा था, लेकिन पिछले दिनों कंप्यूटर बाबा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. मध्य प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों इन बाबाओं को साधने में जुटी हैं.

कंप्यूटर बाबा- दिगंबर अखाड़ा से जुड़े श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर नामदेव त्यागी उर्फ कंप्यूटर बाबा का राज्य में अपना एक कद है. वो रामानंद संप्रदाय से ताल्लुक रखते हैं. संतों की लड़ाई लड़ने की बात कर रहे हैं. बीजेपी के कई नेता उनके करीबी हैं.

पंडोखर सरकार- गुरुशरण शर्मा मध्य प्रदेश के दतिया जिले के पंडोखर गांव हैं. इसीलिए इन्हें पंडोखर सरकार के नाम से जाना जाता है. इनका ग्वालियर, दतिया की तीन विधानसभा सीटों पर प्रभाव है. शिवराज सरकार में मंत्री उमाशंकर गुप्ता, विश्वास सारंग और महापौर आलोक शर्मा उनके भक्त हैं.

शंकराचार्य स्वरूपानंद- ज्योतिर्मठ-द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद कांग्रेस के करीबी माने जाते हैं. इतना ही नहीं वो संघ और बीजेपी के विरोधियों में गिने जाते हैं. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के नजदीकी है. स्वरूपानंद का मध्य प्रदेश के महाकौशल की करीब तीन दर्जन सीटों पर असर रखते हैं.

देव प्रभाकर (दद्दा जी)- मध्य प्रदेश के सागर के गृहस्थ संत देव प्रभाकर का मजबूत सियासी कद है. शिवराज सरकार के कई मंत्री उनके शिष्य हैं. दतिया, दमोह, जबलपुर, कटनी में 5 लाख से ज्यादा अनयायी हैं.

भैयाजी सरकार- नर्मदा पट्टी के किनारे बसे क्षेत्र में भैयाजी सरकार का अपना दबदबा कायम है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह से लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक उनकी पकड़ है.

ऋषभचंद्र सुरीश्वर- जैन समाज से ताल्लुक रखने वाले ऋषभचंद्र सुरीश्वर ख्यात ज्योतिषशास्त्री हैं. जैन समुदाय में अच्छी खासी पकड़ रखते हैं. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से लेकर राहुल गांधी तक आशिर्वाद लेने पहुंच चुके हैं.

स्वामी शांति स्वरूपानंद गिरी- निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर हैं. विहिप के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के सदस्य भी हैं. इसी के चलते संघ के करीबी है. उज्जैन के उत्तर दक्षिण विधानसभा सीट पर अच्छा असर है.

योगेंद्र महंत- कंप्यूटर बाबा के साथ योगेंद्र महंत को भी राज्य मंत्री का दर्जा मिला था. हालांकि कंप्यूटर बाबा ने शिवराज सरकार का साथ छोड़ दिया है, लेकिन वो अभी भी बने हुए हैं.

देवकीनंदन ठाकुर- कथा वाचक देवकीनंदन ऐसे में यूपी के मथुरा के रहने वाले हैं, लेकिन मध्य प्रदेश की सियासत में अच्छा खासा असर है. राज्य में उनके 10 लाख अनुयायी है और उन्होंने एसएस/एसटी एक्ट के खिलाफ मुखर हैं. उन्होंने अखंड भारत पार्टी बनाई हैं और चुनाव में उतरने का फैसला किया.

रावतपुरा सरकार- मध्य प्रदेश के ग्वालियर में रावतपुरा सरकार का प्रभाव है. हालांकि वो किसी एक दल के करीबी नहीं है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों के नेताओं के साथ उनके संपर्क हैं.

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