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राफेल पर रक्षा मंत्री ने फिर दी सफाई, दसॉ ने ही किया था अंबानी से करार का फैसला

पेरिस,

राफेल डील पर फ्रांसीसी पत्रिका के खुलासे से मचे सियासी घमासान के बीच रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने फिर दोहराया है कि यह डील दो सरकारों के बीच थी और ऑफसेट पार्टनर के तौर पर दसॉ ने ही अनिल अंबानी की कंपनी को चुना था.बता दें कि बुधवार को फ्रांसीसी पत्रिका मीडियापार्ट खुलासा किया था कि भारत से राफेल डील में शर्त के तौर पर ऑफसेट डील के तहत राफेल बनाने वाली फ्रांस की कंपनी दसॉ अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस से करार करने को बाध्य थी.

मीडियापार्ट के आरोपों पर दसॉ ने विस्तृत जवाब दिया. दसॉ ने अपने जवाब में कहा कि फ्रांस और भारत के बीच सितंबर 2016 में सरकार के स्तर पर समझौता हुआ था. उसने भारतीय नियमों (डिफेंस प्रॉक्यूरमेंट प्रोसीजर) और ऐसे सौदों की परंपरा के अनुसार किसी भारतीय कंपनी को ऑफसेट पार्टनर चुनने का वादा किया था. इसके लिए कंपनी ने जॉइंट-वेंचर बनाने का फैसला किया. दसॉ कंपनी ने कहा है कि उसने रिलायंस ग्रुप को अपनी मर्जी से ऑफसेट पार्टनर चुना था.

गौरतलब है कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण इस समय तीन दिवसीय यात्रा पर फ्रांस में हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मीडिया पार्ट के खुलासे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और यह भी कहा कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पीएम के फैसले को सही साबित करने की प्रक्रिया के तहत फ्रांस गईं हैं.

उल्लेखनीय है कि मीडियापार्ट की ओर से जारी किए गए दस्तावेजों की मुताबिक फ्रेंच कंपनी दसॉ के सामने अनिल अंबानी के कंपनी रिलायंस के साथ राफेल डील करने की शर्त रखी गई थी और इसके अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं दिया गया था. दसॉ एविएशन के डिप्टी चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ने नागपुर में दोनों कंपनियों के स्टाफ के सामने प्रेजेंटेशन देते वक्त यह बात साफ तौर पर कही थी. मीडियापार्ट ने अपने दस्तावेज में यह दावा किया है.

बता दें कि कुछ दिन पहले ही फ्रांस की पत्रिका मीडियापार्ट ने पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के हवाले से लिखा था कि राफेल डील के लिए भारत सरकार की ओर से अनिल अंबानी की रिलायंस का नाम प्रस्तावित किया था. दसॉ एविएशन कंपनी के पास कोई और विकल्प नहीं था. ओलांद का कहना था कि भारत सरकार की तरफ से ही रिलायंस का नाम दिया गया था. इसे चुनने में दसॉ की भूमिका नहीं है.

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