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SC/ST ऐक्ट: ओबीसी-सवर्णों की नाराजगी से सरकार बेचैन

नई दिल्ली

एससी-एसटी ऐक्ट में बदलाव लाने के बाद ओबीसी और सवर्ण तबके से आ रहे विरोध के स्वर को किस तरह दबाया जाए, इसे लेकर नरेंद्र मोदी सरका में मंथन चल रहा है। सरकार और पार्टी के स्तर पर मिले फीडबैक के बाद चिंता है। सरकार इस वर्ग को आम चुनाव में मनाने के लिए खास रणनीति बना रही है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी ऐक्ट में बदलाव का आदेश देते हुए इसमें गिरफ्तारी से पहले जांच का आदेश दिया था। हालांकि केंद्र सरकार ने संसद के जरिए कोर्ट के आदेश को पलट दिया था। इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में सवर्ण आंदोलन शुरू हो गया था।

लगातार रखी गई नजर
सूत्रों के अनुसार सरकार के स्तर पर इस आंदोलन पर लगातार नजर रखकर इसके नफे-नुकसान का आकलन किया गया। पहले सरकार और पार्टी के अंदर यह अहसास हुआ कि इसके दूरगामी परिणाम नहीं होंगे और दलितों को नाराज करने का जोखिम सरकार नहीं ले सकती थी। लेकिन अब पिछले कुछ दिनों के दौरान समीकरण में बदलाव के चलते चिंता बढ़ गई है। यही कारण है कि सरकार ने अपनी नीतियों से सवर्ण और ओबीसी को किस तरह भरोसा दिला सकते हैं इसके तमाम विकल्पों को तलाशने की प्रक्रिया शुरू की है। पिछले दिनों पीएम मोदी की इसी मसले पर सीनियर मंत्रियों संग मीटिंग हुई। सूत्रों के अनुसार सरकार एससी-एसटी ऐक्ट में बदलाव के फैसले से पीछे नहीं हटेगी। दरअसल, 2014 आम चुनाव में दलितों के बड़े हिस्से ने बीजेपी को वोट दिया था और पार्टी को मिली बड़ी जीत के पीछे यह बड़ा फैक्टर बना था। ऐसे में 2019 के चुनाव में उस बढ़त को पार्टी खोना नहीं चाहती।

टिकट में प्राथमिकता
सूत्रों के अनुसार पार्टी के स्तर पर ओबीसी और सवर्ण नेताओं को लोकसभा में अधिक टिकट देने की भी रणनीति बन सकती है।इसके अलावा सरकार के स्तर पर संदेश दिया जाएगा कि किस तरह मोदी सरकार के कार्यकाल में इन दोनों तबकों के लिए कितनी योजनाएं लाई गईं। सरकार की ओर से ओबीसी और सवर्ण समुदाय से आने वाले मंत्रियों को इस काम में लगाया जाएगा।

एससी-एसटी ऐक्ट पर क्या था सुप्रीम कोर्ट का आदेश
बता दें कि मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी ऐक्ट के बेजा इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए इसके तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आदेश दिया था। इसके अलावा कोर्ट ने एससी/एसटी ऐक्ट के तहत दर्ज होने वाले केसों में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी दी थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ दलित संगठनों के विरोध के बाद मोदी सरकार ने अगस्त में संसद के जरिए कोर्ट के फैसले को पलट दिया। एससी/एसटी संशोधन विधेयक 2018 के तहत मूल कानून में धारा 18A को जोड़ते हुए पुराने कानून को फिर से लागू कर दिया गया।

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